केंद्र सरकार ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि सरकारी तेल कंपनियों की ओर से बेचे जाने वाले प्रीमियम पेट्रोल में एथेनॉल की मिलावट नहीं की जा रही है. साथ ही, सरकार ने कहा कि पेट्रोल में 20 फीसदी से अधिक एथेनॉल मिलाने को लेकर फिलहाल कोई फैसला नहीं हुआ है और E0 या E10 पेट्रोल की सप्लाई दोबारा शुरू करने का भी कोई प्रस्ताव नहीं है.
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने लोकसभा में लिखित जवाब में यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इंडियन ऑयल के XP100, हिंदुस्तान पेट्रोलियम के poWer100 और भारत पेट्रोलियम के Speed100 जैसे प्रीमियम पेट्रोल में एथेनॉल नहीं मिलाया जाता है. ये खास किस्म के ईंधन हैं, जिनमें बेहतर प्रदर्शन के लिए विशेष एडिटिव मिलाए जाते हैं. इनकी बिक्री देश में होने वाली कुल पेट्रोल बिक्री का करीब 0.5 फीसदी ही है.
इन प्रीमियम पेट्रोल की कीमत करीब 160 रुपये प्रति लीटर है, जबकि सामान्य पेट्रोल की कीमत करीब 102.12 रुपये प्रति लीटर है. सामान्य पेट्रोल में फिलहाल 20 फीसदी तक एथेनॉल मिलाया जाता है.
E20 से वाहनों को नुकसान नहीं: सरकार
सुरेश गोपी ने कहा कि पेट्रोल में 20 फीसदी से ज्यादा एथेनॉल मिलाने का कोई भी फैसला विस्तृत वैज्ञानिक और तकनीकी अध्ययन के बाद ही लिया जाएगा. इस प्रक्रिया में वाहन निर्माताओं, तेल विपणन कंपनियों और शोध संस्थानों से भी सलाह ली जाएगी.
सरकार ने बताया कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की तेल कंपनियों को देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 20 फीसदी तक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है. एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम के तहत 1 अप्रैल 2026 से न्यूनतम 95 रिसर्च ऑक्टेन नंबर (RON) वाला एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल भी अधिसूचित किया गया है.
सरकार के मुताबिक, वाहन निर्माताओं, ऑटोमोबाइल संगठनों या उपभोक्ता संगठनों की ओर से E20 पेट्रोल को लेकर बड़े पैमाने पर कोई प्रमाणित शिकायत नहीं मिली है. प्रयोगशाला अध्ययनों, फील्ड ट्रायल और परिचालन आंकड़ों से भी यह सामने आया है कि E20 ईंधन से इंजन की मजबूती, प्रदर्शन या वाहन की उम्र पर व्यापक प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा है.
मंत्री ने कहा कि देश में 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर चल रही हैं. अभी तक एथेनॉल मिश्रण की वजह से बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने की कोई प्रमाणित जानकारी सामने नहीं आई है.
E0 या E10 की वापसी क्यों नहीं?
सरकार ने E0 और E10 पेट्रोल की सप्लाई दोबारा शुरू नहीं करने के पीछे लॉजिस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियों का भी हवाला दिया. सरकार का कहना है कि देशभर में एक लाख से अधिक पेट्रोल पंपों पर E0, E10 और E20 पेट्रोल की अलग-अलग सप्लाई व्यवस्था बनाए रखने से परिवहन, भंडारण और ईंधन प्रबंधन की लागत काफी बढ़ जाएगी.
बता दें कि E0 का मतलब बिना एथेनॉल वाला पेट्रोल है, जबकि E10 में 10 फीसदी एथेनॉल मिलाया जाता है. वहीं E20 पेट्रोल में 80 फीसदी पेट्रोल और 20 फीसदी एथेनॉल होता है. फिलहाल देशभर के एक लाख से ज्यादा पेट्रोल पंपों पर E20 पेट्रोल उपलब्ध कराया जा रहा है. दूसरी ओर, प्रीमियम ग्रेड का पेट्रोल केवल चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर ही मिलता है.
सुरेश गोपी ने कहा कि सरकार की नीति का उद्देश्य बेहतर और स्वच्छ ईंधन की दिशा में आगे बढ़ना है, न कि पुराने मानक पर वापस लौटना. उन्होंने कहा कि E20 ईंधन को वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद अपनाया गया है और ऑटोमोबाइल उद्योग ने भी व्यापक परीक्षण के बाद इसे स्वीकार किया है. सरकार का लक्ष्य ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरणीय स्थिरता और किसानों के हितों के बीच संतुलन कायम रखते हुए स्वच्छ ईंधन की दिशा में आगे बढ़ना है.
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