परिसीमन पर TVK की बैठक का DMK ने किया बहिष्कार, बोली- कावेरी मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश

तमिलनाडु में परिसीमन को लेकर बुलाई गई विजय सरकार की सर्वदलीय बैठक का DMK ने बहिष्कार कर दिया है. पार्टी ने बैठक बुलाने के समय और मकसद पर सवाल उठाए हैं.

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परिसीमन पर टीवीके की सर्वदलीय बैठक का डीएमके ने किया बहिष्कार. (File photo) परिसीमन पर टीवीके की सर्वदलीय बैठक का डीएमके ने किया बहिष्कार. (File photo)

प्रमोद माधव

  • चेन्नई,
  • 08 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 3:54 PM IST

तमिलनाडु में परिसीमन को लेकर बुलाई गई TVK सरकार की सर्वदलीय बैठक का द्रविड़ मुनेत्र कझगम (DMK) ने बहिष्कार कर दिया है. पार्टी का कहना है कि इस समय सबसे बड़ा मुद्दा कावेरी और मेकेदातु बांध है. ऐसे में परिसीमन पर बैठक बुलाना लोगों का ध्यान असली मुद्दे से हटाने की कोशिश है.

DMK ने साफ कर दिया है कि वह TVK सरकार की बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में शामिल नहीं होगी. पार्टी की ओर से एम. के. कनिमोझी ने कहा कि परिसीमन पर पार्टी का रुख पहले से ही तय है. इस मुद्दे पर पहले हुई सर्वदलीय बैठकों में प्रस्ताव भी पारित किए जा चुके हैं, ऐसे में दोबारा नई बैठक बुलाने की कोई तुक समझ नहीं आती.

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उन्होंने सवाल उठाया कि जब सभी दल पहले ही अपना रुख बता चुके हैं तो फिर दोबारा बैठक क्यों बुलाई गई है. क्या सरकार चाहती है कि राजनीतिक दल अपना पहले वाला फैसला बदल दें?

'कावेरी मुद्दे से ध्यान हटाने की कोशिश'

DMK का आरोप है कि इस वक्त तमिलनाडु में कावेरी नदी के पानी और मेकेदाटू बांध के निर्माण को लेकर किसानों का प्रदर्शन जारी है. ऐसे समय पर सरकार को मेकेदातु बांध के खिलाफ रणनीति बनाने के लिए बैठक बुलानी चाहिए थी. इसकी जगह परिसीमन के नाम पर बैठक रखना केवल एक सियासी ड्रामा है.

इसी वजह से DMK ने इस बैठक से पूरी तरह दूर रहने का फैसला किया है. वहीं TVK ने उन मांगों को खारिज किया था, जिन पर तमिलनाडु के सभी राजनीतिक दल एकमत थे.

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'पहले किसानों के मुद्दे पर कदम उठाए सरकार'

कनिमोझी के मुताबिक, अगर किसानों की भलाई की सच में फिक्र है, तो राज्य सरकार के प्रतिनिधियों और सांसदों को तुरंत दिल्ली भेजा जाना चाहिए. ये प्रतिनिधि केंद्रीय जल संसाधन मंत्री से सीधे मिलकर मेकेदातु बांध के खिलाफ विधानसभा में पास हुए प्रस्ताव को सौंपें. केवल कागजी बैठकों से किसानों की समस्याओं का समाधान संभव नहीं है. जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठाकर ही राज्य के अधिकारों की रक्षा की जा सकती है. 

DMK के बहिष्कार के बाद तमिलनाडु में परिसीमन और कावेरी, दोनों मुद्दों पर सियासत तेज हो गई है. अब नजर इस बात पर रहेगी कि विजय सरकार इस बैठक के बाद क्या फैसला लेती है और बाकी राजनीतिक दल इस पर क्या रुख अपनाते हैं.

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