जंग के बीच दमदार डिप्लोमेसी, ईरानी नौसेना ने भारतीय LPG टैंकर को पार कराया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज

ईरानी नौसेना चुनिंदा जहाजों को वेरिफिकेशन के बाद ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति दे रही है. हालांकि, इस क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण होर्मुज से गुजरने वाली जहाजों को मिसाइल और ड्रोन हमलों का खतरा है. भारत ने अपनी जहाजों की सुरक्षा के लिए नौसेना की तैनाती की है.

Advertisement
ईरानी नौसेना ने भारतीय एलपीजी टैंकर को होर्मुज से सुरक्षित मार्ग प्रदान किया. (File Photo) ईरानी नौसेना ने भारतीय एलपीजी टैंकर को होर्मुज से सुरक्षित मार्ग प्रदान किया. (File Photo)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 7:37 PM IST

ईरान पर 28 फरवरी से ही अमेरिकी हमले जारी हैं. ईरान इसका जवाब खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हमले करके दे रहा है. इस कारण पूरे पश्चिम ​एशिया में युद्ध जैसे हालात हैं. ईरान ने दुनिया के महत्वपूर्ण जलमार्गों में शामिल 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' की भी नाकेबंदी कर दी है, जिस कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल मच गया है. दुनिया का करीब 20 फीसदी कच्चे तेल और गैस का परिवहन होर्मुज के रास्ते ही होता है. इसका असर भारत पर भी पड़ा है. लेकिन भारत कूटनीतिक रास्ते अपनाकर इस संकट को बहुत हद तक टालने की लगातार कोशिश कर रहा है.

Advertisement

ईरानी नौसेना ने पिछले सप्ताह एक भारतीय एलपीजी (LPG) टैंकर को सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कराया. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, यह नई दिल्ली की कूटनीतिक पहल के बाद हो संभव सका. जहाज पर मौजूद एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर ब्लूमबर्ग को बताया कि यह टैंकर उन दो भारतीय जहाजों में शामिल था जिन्हें इस संवेदनशील मार्ग से गुजरने की अनुमति दी गई. यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब क्षेत्र में तनाव के कारण ग्लोबल शिपिंग रूट प्रभावित हो रहे हैं और ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण इस रास्ते पर खतरे बढ़ गए हैं.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित निकलने तक भारतीय तेल टैंकर लगातार ईरानी नौसेना के संपर्क में रहा. ईरान की नौसेना ने जहाज पर लगे झंडे, वह कहां से निकला है और कहां जा रहा है, उसके  चालक दल में किस देश के लोग शामिल हैं, ये सब जानकारियां मांगी. जहाज के सभी क्रू मेंबर्स भारतीय थे. इसके बाद जहाज को एक तय मार्ग पर आगे बढ़ाया गया, जो संकेत देता है कि तेहरान एक कंट्रोल्ड ट्रांजिट सिस्टम लागू कर रहा है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: 'होर्मुज से रास्ता देंगे', अमेरिका के दोस्त को छूट देने पर राजी हुआ ईरान! कैसे बदल गया 'खेल'

होर्मुज से गुजरना जोखिम भरा

सुरक्षा जोखिमों का आकलन करने वाली फर्म ईओएस रिस्क ग्रुप (EOS Risk Group) के हेड कंसल्टेंट मार्टिन केली ने कहा, 'ऐसा लगता है कि ईरान वेरिफाई करने के बाद चुनिंदा जहाजों को होर्मुज से गुजरने दे रहा है. ये वेरिफिकेशन प्रोसेस ईरानी जलक्षेत्र में जहाजों के प्रवेश के दौरान पूरी की जाती है. हालांकि जहाजों को अनुमति मिल रही है, लेकिन इसका लाभ मुख्य रूप से ईरान को ही है.' संघर्ष शुरू होने के बाद से इस क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें नाविकों की मौत हुई है और जहाजों के इंश्योरेंस चार्ज में भारी वृद्धि हुई है. 

इसके अलावा समुद्र में बारूदी सुरंगों की मौजूदगी की भी खबरें हैं, जिससे कमर्शियल जहाजों के लिए खतरा और बढ़ गया है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय टैंकर लगभग दस दिनों तक फारस की खाड़ी में लंगर डाले रहा, जिसके बाद 13 मार्च की रात उसे आगे बढ़ने की अनुमति मिली. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एंट्री से पहले जहाज पर मौजूद चालक दल ने आपातकालीन तैयारियां कीं, जिसमें लाइफ राफ्ट तैयार रखना भी शामिल था. 

Advertisement

यात्रा के दौरान जहाज ने अपना ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) बंद रखा. इस क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण जीपीएस सिग्नल में बाधा आई, जिससे यात्रा और जटिल हो गई. हाल के दिनों में कई जहाज ईरान के लारक और केश्म द्वीपों के बीच एक संकरे मार्ग से होकर गुजरते देखे गए हैं, जहां वे सुरक्षा के लिए ईरानी तट के करीब रहते हैं. ओमान की खाड़ी में पहुंचने के बाद भारतीय टैंकर को इंडियन नेवी के जहाजों ने एस्कॉर्ट किया और फिर वह भारत की ओर रवाना हो गया.

यह भी पढ़ें: ईरान ने 4000 KM दूर डिएगो गार्सिया पर दागीं मिसाइलें, जानें क्यों बढ़ गई अमेरिका-ब्रिटेन की टेंशन

तेहरान से संपर्क में नई दिल्ली

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारतीय ध्वज वाले एलपीजी और एलएनजी टैंकरों का स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते निकलना ईरान के साथ भारत के कूटनीतिक संवाद का परिणाम है. उन्होंने बताया कि भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ईरान के साथ लगातार संपर्क में है. भारत ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और उत्तर अरब सागर में जहाजों की सुरक्षा के लिए नौसेना की तैनाती भी की है. वर्तमान में करीब 22 भारतीय जहाज इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं, और खतरे के बीच एस्कॉर्ट ऑपरेशन जारी हैं.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »