भ्रष्टाचार पर CM विजय का कड़ा प्रहार, चेन्नई में 7 अधिकारी सस्पेंड, FIR दर्ज

तमिलनाडु में मुख्यमंत्री विजय की भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत कार्रवाई जारी है. ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन ने भ्रष्टाचार के आरोप में सात अधिकारियों को निलंबित कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. राज्य सरकार ने हाल ही में भ्रष्टाचार की शिकायतों के लिए व्हाट्सऐप हेल्पलाइन भी शुरू की है, जिससे भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को और मजबूती मिली है.

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भ्रष्टाचार के खिलाफ मुख्यमंत्री विजय के सख्त रुख के बीच ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन के 7 अधिकारी सस्पेंड. (Photo: PTI) भ्रष्टाचार के खिलाफ मुख्यमंत्री विजय के सख्त रुख के बीच ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन के 7 अधिकारी सस्पेंड. (Photo: PTI)

aajtak.in

  • चेन्नई,
  • 18 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:25 PM IST

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम जारी है. ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन (GCC) ने शनिवार को कथित भ्रष्टाचार के आरोप में सात अधिकारियों को निलंबित कर दिया और उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई. यह कार्रवाई पिछले सप्ताह ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन की ओर से किए गए औचक निरीक्षण (सरप्राइज इंस्पेक्शन) के बाद की गई. जांच के दौरान अधिकारियों के पास से बेहिसाब नकदी और संदिग्ध डिजिटल लेनदेन मिलने का दावा किया गया.

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जीसीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, एक सहायक कार्यकारी अभियंता (Assistant Executive Engineer) अपने 2.39 लाख रुपये के GPay ट्रांजैक्शन का संतोषजनक जवाब नहीं दे सके. अधिकारियों के मुताबिक, यह निरीक्षण ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन के जोन-6 और जोन-9 में किया गया था. जोन-6 में कोलाथुर, अयनावरम और पेरंबूर जैसे उत्तर चेन्नई के इलाके आते हैं, जबकि जोन-9 में थाउजेंड लाइट्स, मायलापुर और नुंगमबक्कम जैसे प्रमुख व्यावसायिक और रिहायशी क्षेत्र शामिल हैं.

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तमिलनाडु सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (DVAC) की रिपोर्ट मिलने के बाद शुक्रवार को इन अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत कार्रवाई की गई. इससे पहले भी रिश्वतखोरी, फर्जी बिलिंग और नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे लेने के आरोपों में छह अन्य नगर निगम अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है. नगर निगम प्रशासन अब इन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच भी करेगा. यदि आरोप साबित होते हैं तो उन्हें केवल निलंबित रखने के बजाय स्थायी रूप से सेवा से बर्खास्त किया जा सकता है.

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कई आरोपी अधिकारी पिछले 20 वर्षों से नगर निगम में कार्यरत रहे हैं. ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन के आयुक्त समीरन ने कहा कि यह कार्रवाई मुख्यमंत्री विजय की 'भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस' नीति के अनुरूप की जा रही है. भ्रष्टाचार विरोधी अभियान केवल सरकारी विभागों तक सीमित नहीं है. हाल ही में विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने भी अपने एक पंचायत नेता को कथित रिश्वत लेते हुए वीडियो सामने आने के बाद पार्टी से निष्कासित कर दिया था. खास बात यह रही कि एफआईआर दर्ज होने से पहले ही उसके खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई कर दी गई.

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इसी सप्ताह तमिलनाडु सरकार ने भ्रष्टाचार की शिकायत दर्ज कराने के लिए DVAC के माध्यम से एक समर्पित व्हाट्सऐप हेल्पलाइन भी शुरू की है. इसके जरिए लोग सरकारी कार्यालयों में कथित रिश्वतखोरी से जुड़े सबूत और शिकायतें सीधे भेज सकेंगे. बता दें कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई तमिलगा वेत्री कड़गम के चुनावी अभियान का प्रमुख वादा रहा था. मुख्यमंत्री विजय ने चुनाव प्रचार के दौरान डीएमके और एआईएडीएमके पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए स्वच्छ और पारदर्शी शासन देने का वादा किया था. मौजूदा कार्रवाई को सीएम विजय के उसी वादे को अमल में लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

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