कोई टॉयलेट में जा छिपा, किसी ने गुरुद्वारे को बनाया ढाल... CJP प्रोटेस्ट में दिनभर चला लुका-छिपी का खेल

CJP संस्थापक अभिजीत दीपके की दादी के निधन के बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें अंतिम संस्कार के लिए महाराष्ट्र स्थित अपने गृह नगर जाने में मदद की पेशकश की. दीपके को CJP के दो अन्य नेताओं के साथ जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन के सिलसिले में हिरासत में लिया गया था.

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दिल्ली में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया गया.(Photo-PTI) दिल्ली में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया गया.(Photo-PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 7:03 PM IST

दिल्ली में CJP के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए प्रदर्शनकारी सार्वजनिक शौचालयों और गुरुद्वारे में छिपते नजर आए. शनिवार को राजधानी में हजारों पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात थे. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को वापस लेने की मांग कर रहे प्रदर्शनकारी हिरासत से बचने के लिए अलग-अलग जगहों पर शरण ले रहे थे.

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कनॉट प्लेस स्थित NDMC के एक सार्वजनिक शौचालय में 20 से ज्यादा युवा प्रदर्शनकारी रातभर छिपे रहे. उन्हें उम्मीद थी कि सुबह जंतर-मंतर की ओर मार्च करने से पहले वे सुरक्षा व्यवस्था से बचकर निकल सकेंगे. शुक्रवार को शहर में प्रतिबंधों की घोषणा के बाद प्रदर्शनकारी धीरे-धीरे वहां जुटे थे. यह शौचालय रात 10 बजे बंद होता है और सुबह 6 बजे खुलता है. हालांकि, सुबह पुलिस की जांच के दौरान उनकी योजना नाकाम हो गई.

पुलिस ने निरीक्षण के दौरान शौचालय के अंदर प्रदर्शनकारियों को पाया. आरोप है कि कुछ लोगों ने अंदर जाने के लिए दरवाजा जबरन खोला था. इसके बाद पुलिस ने सभी को हिरासत में लेकर वाहनों में बैठा दिया. हिरासत में लिए जाने के बाद भी कई प्रदर्शनकारी नारे लगाते रहे और पुलिस वाहनों के अंदर से आवाजें आती रहीं.

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बगला साहिब गुरुद्वारे में भी ली शरण

कनॉट प्लेस की तरह गुरुद्वारा बंगला साहिब में भी युवा प्रदर्शनकारियों ने रातभर शरण ली. वे प्रदर्शन में शामिल होने के लिए बार-बार गुरुद्वारे से बाहर निकलते और पुलिस के पहुंचने पर वापस अंदर चले जाते थे. इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच लुका-छिपी का सिलसिला चलता रहा. गुरुद्वारे के बाहर सड़क पर प्रदर्शनकारियों ने 'इंकलाब जिंदाबाद' और 'जय भीम' के नारे लगाए. कुछ ही मिनटों में पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया.

गुरुद्वारा प्रबंधन ने क्या कहा था?

जुलाई में भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्र गुरुद्वारे में शरण लेने पहुंचे थे. इस बार शुक्रवार को शहर में प्रतिबंध लगाए जाने के बाद प्रदर्शनकारी शनिवार के प्रदर्शन की तैयारी में वहां रुके थे. मामले से परिचित लोगों के मुताबिक, पुलिस ने बंगला साहिब के प्रतिनिधियों से प्रदर्शनकारियों को परिसर में प्रवेश नहीं देने को कहा था. हालांकि, गुरुद्वारे के प्रतिनिधियों ने ऐसा करने से इनकार कर दिया. उनका कहना था कि प्रदर्शनकारी निहत्थे हैं और परिसर के अंदर नारे नहीं लगा रहे हैं. एक प्रतिनिधि ने कहा कि वे पुलिस को परिसर में प्रवेश नहीं करने देंगे.

गुरुद्वारे के पास लाठी लेकर तैनात पुलिसकर्मियों और युवाओं को हिरासत में लिए जाने पर कुछ आगंतुकों ने नाराजगी जताई. उन्होंने धार्मिक स्थल के आसपास प्रदर्शनकारियों का पीछा किए जाने पर सवाल उठाए.

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केरल हाउस से भी नेताओं को हिरासत में लिया गया

प्रदर्शनकारियों ने दूसरे स्थानों पर भी शरण लेने की कोशिश की. बाबा खड़क सिंह मार्ग से अशोक रोड की ओर मार्च कर रहे युवा संगठनों और छात्र समूहों को रोकने के लिए पुलिस पहुंची. कुछ प्रदर्शनकारी पुलिस को देखकर गुरुद्वारे के परिसर में चले गए और फिर प्रदर्शन में शामिल होने की कोशिश करने लगे. केरल हाउस में शुक्रवार रात से ठहरे CPI(M) के कई नेता, जिनमें अलग-अलग राज्यों के पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल थे, शनिवार को प्रदर्शन में शामिल होने के लिए बाहर निकले तो उन्हें हिरासत में ले लिया गया.

CJP और अन्य वामपंथी संगठनों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन बुलाया था. SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर यह मांग की गई थी.

प्रदर्शन के मद्देनजर राजधानी में 30,000 से ज्यादा पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात किए गए थे. जंतर-मंतर के आसपास 45 मेट्रो स्टेशन बंद किए गए और 30 सड़क मार्गों पर यातायात प्रतिबंध लगाए गए. शहर के अलग-अलग हिस्सों, रेलवे स्टेशनों, बस टर्मिनलों, होटलों और संवेदनशील स्थानों पर पहचान पत्रों की जांच और वाहनों की तलाशी ली गई. कुछ सड़कों पर बैरिकेडिंग के पास स्टील के स्पाइक भी लगाए गए थे, ताकि बिना जांच के वाहन आगे न बढ़ सकें.

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