'मांगे नहीं मानीं तो...', CJP ने बुलाई बैठक, फिर दी आंदोलन की चेतावनी

CJP सोमवार को राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक कर 25 जुलाई को आंदोलन वापस लेने के बाद केंद्र के आश्वासनों की समीक्षा करेगी. संगठन ने कहा कि अगर वादों पर कार्रवाई नहीं हुई तो दोबारा शांतिपूर्ण राष्ट्रव्यापी आंदोलन पर भी विचार किया जाएगा.

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CJP की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में आंदोलन को लेकर अगले कदम पर होगा फैसला. (File photo: ITG) CJP की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में आंदोलन को लेकर अगले कदम पर होगा फैसला. (File photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 5:45 PM IST

कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) सोमवार(24) को अपनी राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक बुलाएगी. इसमें 25 जुलाई को राष्ट्रव्यापी आंदोलन वापस लेने के बाद केंद्र सरकार की ओर से किए गए आश्वासनों की स्थिति की समीक्षा की जाएगी. CJP ने कहा कि सरकार ने आश्वासनों को पूरा करने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में अभी तक औपचारिक रूप से जानकारी नहीं दी है.

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CJP ने कहा कि आश्वासनों को पूरा कराने के लिए सभी कदमों पर विचार किया जाएगा. इसमें एक बार फिर शांतिपूर्ण राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करने की संभावना भी शामिल है.CJP ने कहा कि सरकार की ओर से देश के युवाओं से किए गए वादे के आधार पर उसने अच्छे विश्वास के साथ अपना आंदोलन वापस लिया था. संगठन ने कहा कि वह इस अच्छे विश्वास को कमजोरी नहीं समझने देगा.

CJP ने छात्रों, युवा नागरिकों, अपने समर्थकों और स्वयंसेवकों से सोमवार की बैठक के नतीजे के लिए तैयार रहने को भी कहा है. ये ऐलान 18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के कुछ दिनों बाद हुए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR की एक सूची मांगी थी.

CJP ने कहा कि शीर्ष अदालत ने केंद्र से तीन बार यह सूची देने को कहा, ताकि अदालत संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत इन मामलों को रद्द करने की अपनी शक्तियों के इस्तेमाल पर विचार कर सके. CJP ने कहा कि अदालत की ओर से बार-बार सूची मांगे जाने के बावजूद केंद्र सरकार ने इसे उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता नहीं जताई. संगठन ने कहा कि सुनवाई के तुरंत बाद उसके सह-संयोजक सौरव दास और कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने चिंता जताई कि CJP की ओर से केंद्र के साथ बातचीत में मिले आश्वासनों के आधार पर आंदोलन वापस लेने के बाद सरकार युवा पीढ़ी के साथ 'धोखा' करती दिखाई दे रही है.

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FIR और मुआवजे से जुड़े कदम शामिल

इन आश्वासनों में प्रदर्शनों से जुड़ी सभी FIR वापस लेने या रद्द करने, भविष्य में किसी छात्र या शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं होने की गारंटी और मई में पेपर लीक के कारण NEET-UG परीक्षा रद्द होने के बाद आत्महत्या करने वाले उम्मीदवारों के परिवारों को मुआवजा देना शामिल था. CJP ने यह भी कहा कि संगठन के साथ बातचीत करने वाले सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने लिखित आश्वासनों को पूरा करने के लिए उठाए जा रहे कदमों, जिसमें FIR और मुआवजे से जुड़े कदम शामिल हैं,इसको दर्ज कराने के लिए उससे औपचारिक रूप से संपर्क नहीं किया.

CJP ने कहा कि आंदोलन वापस लेने का फैसला सरकार के आश्वासन के आधार पर लिया गया था. संगठन ने चेतावनी दी कि इन आश्वासनों को 'कमजोर करने, टालने, दोबारा परिभाषित करने या अपमानित करने' की किसी भी कोशिश को देश के युवाओं के साथ विश्वासघात माना जाएगा.

राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में स्थिति की समीक्षा

सोमवार को होने वाली राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में स्थिति की समीक्षा की जाएगी और CJP के अगले कदम पर फैसला लिया जाएगा. CJP ने 25 जुलाई को अपना राष्ट्रव्यापी आंदोलन वापस लिया था. यह कदम तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार की ओर से छात्रों व शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं किए जाने के आश्वासन के बाद उठाया गया था. अभियान में NEET पेपर लीक विवाद में कार्रवाई और मृत पीड़ितों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग भी शामिल थी.

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