आंध्र प्रदेश राज्य पेय निगम लिमिटेड (APSBCL) के शराब परिवहन टेंडर घोटाले में ED की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. ईडी ने इस मामले में YSRCP के पूर्व मंत्री करुमुरी नागेश्वरराव को गिरफ्तार किया है,
बता दें कि इससे पहले PMLA जांच में सामने आया था कि पूर्व आईटी सलाहकार केसिरेड्डी राजशेखर रेड्डी और APSBCL के तत्कालीन MD दोंतीरेड्डी वासुदेव रेड्डी ने मिलकर इस घोटाले की प्लानिंग की थी.
जून में ईडी ने राजशेखर रेड्डी के बेटे सुनील कुमार को इस मामले में गिरफ्तार किया था. इसके बाद 11 जून को ईडी ने मुख्य साजिशकर्ता केसिरेड्डी राजशेखर रेड्डी और तत्कालीन एमडी दोंतीरेड्डी वासुदेव रेड्डी को गिरफ्तार कर लिया था.
हैदराबाद के नामपल्ली स्थित विशेष PMLA अदालत ने दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. अब ईडी की जांच के मुताबिक, शराब परिवहन के टेंडर की शर्तों में जानबूझकर बदलाव किए गए.
कैसे हुआ सारा हेरफेर?
टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर कर इसे 'मेसर्स सिग्मा सप्लाई चेन सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड' (SSCSPL) और बाद में 'मेसर्स प्रसाद ट्रांसपोर्ट्स' के पक्ष में मोड़ा गया. ये कंपनियां सिर्फ मुखौटा थीं. असल में इनका वित्तीय और परिचालन नियंत्रण राजशेखर रेड्डी, टुकेकुला ईश्वर किरण कुमार रेड्डी और उनके करीबियों के हाथों में था.
राजशेखर रेड्डी ने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर APSBCL के तत्कालीन MDC वासुदेव रेड्डी और अपने सहयोगी किरण कुमार के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची. इस सिंडिकेट ने डिपो से खुदरा दुकानों तक शराब परिवहन के दरों को मनमाने ढंग से बढ़ाया और मुनाफा कमाया.
दरों में भारी बढ़ोतरी कर सरकारी खजाने को पहुंचाया नुकसान
जांच में सामने आया कि पहले जिला स्तर पर शराब परिवहन का औसत किराया लगभग 19.68 रुपये प्रति कार्टन बॉक्स था. सिंडिकेट ने इसे कृत्रिम रूप से बढ़ाकर 35.57 रुपये प्रति कार्टन बॉक्स तक कर दिया. इसके अलावा, स्थानीय राजनीतिक नेताओं और करीबियों को सब-कॉन्ट्रैक्ट आवंटित करने का एक नेटवर्क भी चलाया गया.
ईडी के मुताबिक, वासुदेव रेड्डी इस घोटाले के मुख्य प्रशासनिक सूत्रधार थे. उन्होंने अपने पद का गलत इस्तेमाल किया और विकेंद्रीकृत जिला-स्तरीय पारदर्शी व्यवस्था को मनमाने ढंग से खत्म कर दिया. इसके बजाय अनधिकृत रूप से राज्यव्यापी केंद्रीकृत नीति लागू कर दी.
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इस बदलाव के लिए वासुदेव रेड्डी ने सरकार को गुमराह करने वाली और झूठी सिफारिशें भेजीं. उन्होंने सरकार से मंजूरी लिए बिना ही केंद्रीकृत नीति लागू की और बिना किसी अनिवार्य अनुमति के 'SSCSPL' के ठेकों को बार-बार विस्तार दिया.
टेंडर में इस हेरफेर और अवैध विस्तार की वजह से राज्य के सरकारी खजाने को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचा है. ईडी इस स्कैम के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है.
मुनीष पांडे