ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप हो या किसी नामी रेस्टोरेंट का मेन्यू, जब भी कोई शाकाहारी शख्स पनीर की डिश देखता है तो उसके मुंह में पानी आ जाता है. पनीर टिक्का, पनीर बटर मसाला, शाही पनीर, पनीर दो प्याजा या पनीर लबाबदार देखते ही तुरंत ऑर्डर कर दिया जाता है.
लेकिन क्या कभी आपने रेस्टोरेंट में ये जानने की कोशिश की है कि आपकी प्लेट में जो पनीर परोसा जा रहा है, वो कितना असली है? फरवरी 2026 में किए आजतक के एक एक्सक्लूसिव स्टिंग ऑपरेशन में बाजार में बिक रहे इस 'नकली पनीर' और मिलावट के काले कारोबार का पर्दाफाश हुआ है.
आज बाजार में तीन तरह के पनीर बिक रहे हैं:
1.डेयरी पनीर: ये पूरी तरह दूध से बनता है और असली पनीर है।
2.टोफू: ये सोया मिल्क (सोयाबीन के दूध) से तैयार होता है, इसे भी सेहतमंद और असली माना जाता है.
3.एनालॉग पनीर: ये असली पनीर नहीं है, बल्कि इसे कई तरह के हानिकारक केमिकल्स और ऑयल से तैयार किया जाता है.
देखने में असली डेयरी पनीर और एनालॉग पनीर में फर्क करना लगभग नामुमकिन है. इसी पहचान न कर पाने की वजह से लोग जाने-अनजाने में अपनी सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं.
तीन राज्यों में बैन, लेकिन FSSAI का रुख अलग
महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और गुजरात ने एनालॉग पनीर के खतरे को समझते हुए इस पर पूरी तरह बैन लगा दिया है. इन राज्यों में कोई भी दुकानदार, होटल, रेस्टोरेंट या स्ट्रीट फूड वेंडर एनालॉग पनीर से बना खाना नहीं बेच सकता. वहां प्रशासन लगातार छापेमारी कर इसे
खत्म कर रहा है. हालांकि, खाद्य सुरक्षा नियामक (FSSAI) इसे पूरी तरह खतरनाक नहीं मानता, इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर इस पर बैन नहीं लगाया गया है.
लैब में तैयार हो रहा है पनीर, दूध और खोया
स्टिंग ऑपरेशन में खुलासा हुआ कि मिलावटखोरों की लैब में खाने-पीने का मिलावटी सामान तैयार हो रहा है. इसमें एनालॉग पनीर शामिल है जो वनस्पति तेल, स्टार्च, इमल्सीफायर और स्टेबलाइजर जैसे केमिकल से बनाया जा रहा है. वहीं सोडा और वनस्पति घी से नकली दूध बनाया जा रहा है. इसके अलावा सोपस्टोन यानी फ्रेंच चॉक (सेलखड़ी) की मदद से नकली खोया तैयार हो रहा है.
मेवात, शामली और बागपत: मिलावट के बड़े केंद्र
संवाददाता नितिन जैन की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर में नकली और एनालॉग पनीर की सप्लाई का मुख्य केंद्र हरियाणा का मेवात है. वहीं नकली दूध और खोया उत्तर प्रदेश के शामली और बागपत से सप्लाई किया जा रहा है.
मेवात की एक फैक्ट्री में स्टिंग टीम की मुलाकात 'एमके इंडस्ट्री' के हाजी करार से हुई. बाजार में ब्रांडेड कंपनी का असली पनीर जहां 450 रुपये प्रति किलोग्राम मिलता है, वहीं हाजी करार इसे महज 80 रुपये किलो में मुहैया करा रहा है. इसे वो 'रगड़ू पनीर' कहता है, जिसमें दूध का इस्तेमाल न के बराबर होता है.
मेवात के दूसरे सप्लायर सैफी ने बताया कि हर दिन लगभग 1200 से 1300 किलो नकली पनीर दिल्ली-एनसीआर के 15 डिस्ट्रीब्यूशन सेंटरों पर भेजा जाता है. शादियों और त्योहारों के सीजन में ये सप्लाई बढ़कर ढाई हजार किलो रोजाना तक पहुंच जाती है. वहीं खेड़ी कलां के मुस्तफा ने भी पुष्टि की कि इलाके में शुद्ध पनीर मिलना बेहद मुश्किल है.
सोडा से दूध और चॉक से खोया
मिलावट का ये खेल सिर्फ पनीर तक सीमित नहीं है. यूपी के शामली में नकली दूध के सप्लायर शौकीन को सोडा और डालडा मिलाकर दूध तैयार करते पाया गया. वहीं नकली खोया के सबसे बड़े गढ़ बागपत में हाशिम नाम का सप्लायर सोपस्टोन (फ्रेंच चॉक) का इस्तेमाल करके नकली मावा तैयार कर रहा था.
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दिल्ली-एनसीआर के कई बड़े होटलों, रेस्टोरेंट्स और बड़े संस्थानों के किचन तक में ये नकली सामान धड़ल्ले से पहुंच रहा है. आप रेस्टोरेंट में जो कढ़ाई पनीर या शाही पनीर चाव से खा रहे हैं, वो असल में पाम ऑयल, स्टार्च और केमिकल का खतरनाक मिश्रण हो सकता है. मिलावटखोर सस्ते दाम पर ये जहर बेचकर निकल जाते हैं और आम जनता को इसकी भारी कीमत अस्पतालों के बिल भरकर चुकानी पड़ रही है.
नितिन जैन