'आजादी का मतलब मनमर्जी नहीं, देशहित के बारे में सोचें युवा', अजित डोभाल का Gen-Z को मैसेज!

पुणे में सम्मानित होने के बाद अजित डोभाल ने युवाओं को आजादी का सही मतलब समझाया. अपने संबोधन में उन्होंने देशहित और राष्ट्र निर्माण को लेकर भी अहम बात कही.

Advertisement
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल. (Photo: ITG) राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 4:41 PM IST

महाराष्ट्र के पुणे में शनिवार को लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित हुआ. इस मौके पर गृहमंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) प्रमुख अजित डोभाल को 'लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार 2026' से सम्मानित किया. सम्मान स्वरूप उन्हें पारंपरिक पुणेरी पगड़ी, स्मृति चिह्न, चेक, गीता रहस्य की प्रति भेंट की गई. पुरस्कार मिलने के बाद अपने संबोधन में डोभाल ने युवाओं को आजादी का सही मतलब समझने की बात कही, साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व की भी खुलकर सराहना की.

Advertisement

अजित डोभाल ने कहा कि हम बेहद सौभाग्यशाली हैं कि देश को पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह जैसा मजबूत नेतृत्व मिला है. भारत इस समय आंतरिक, बाहरी दोनों तरह की चुनौतियों से निपट रहा है. देश तेजी से आगे बढ़ रहा है, इसलिए कई विरोधी ताकतें उसकी तरक्की से परेशान हैं. ऐसे समय में हर नागरिक को सबसे पहले सिर्फ देशहित के बारे में सोचना चाहिए.

'आजादी का सही मतलब समझना होगा'

युवाओं को बड़ी सीख देते हुए डोभाल ने कहा कि 'आज की पीढ़ी को आजादी का असली अर्थ जानना बेहद जरूरी है. कुछ लोग मान लेते हैं कि आजादी का मतलब मनमर्जी या कुछ भी करना है, जबकि ऐसी सोच बिल्कुल गलत है'. उन्होंने साफ कहा कि जो रास्ता राष्ट्रहित के खिलाफ हो, उस पर कदम भी नहीं बढ़ाना चाहिए. भारत को शक्तिशाली बनाना हम सभी का पहला कर्तव्य है.

Advertisement

अजित डोभाल ने अपने बचपन की यादें साझा करते हुए बताया कि शुरुआती पढ़ाई के दौरान पुणे में ही उन्होंने पहली बार लोकमान्य तिलक के विचारों को विस्तार से जाना था. अंग्रेजों के शासन में जब लोग डरकर चुप रहते थे, तब तिलक जी ने निडर होकर आवाज बुलंद की थी. जेल जाने के बाद भी उन्होंने समाज सेवा का मार्ग नहीं छोड़ा. डोभाल ने युवाओं से अपील की कि वे तिलक जी के जीवन, उनके संघर्षों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »