अभिव्यक्ति की आजादी बनाम अवमानना? AI Summit के बीच राजनीतिक पार्टियों के बीच यूं चल रही AI जंग

दिल्ली में आयोजित AI समिट में बेहतर भविष्य की चर्चाएं हो रही हैं, लेकिन वहीं राजनीतिक पार्टियां इस तकनीक को हथियार बनाकर आमने-सामने आ गई हैं. कांग्रेस ने AI का एक वीडियो जारी किया, जिसमें लोकसभा स्पीकर का मजाक उड़ाया गया, जिसे बीजेपी ने सदन की अवमानना माना और शिकायत दर्ज कराई. कांग्रेस के तीन नेताओं को नोटिस भेजा गया. दोनों पार्टियां AI वीडियो का इस्तेमाल कर विपक्षी नेताओं पर आरोप-प्रत्यारोप कर रही हैं.

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AI वीडियो पर सियासत गरम (Photo: ITG) AI वीडियो पर सियासत गरम (Photo: ITG)

मौसमी सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 19 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:00 PM IST

दिल्ली में दुनियाभर के लोग AI समिट के मंच पर बैठकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के ज़रिये बेहतर भविष्य की बातें कर रहे हैं. मगर, उसी दिल्ली में दो सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टियां AI को हथियार बनाकर आमने-सामने आ गई हैं. है न कितना अजीब?

वास्तव में, कांग्रेस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर एक AI जनरेटेड वीडियो जारी किया, जिसमें लोकसभा स्पीकर को इस तरह दर्शाया गया जो बीजेपी को रास नहीं आया. बीजेपी के सांसद विष्णु दत्त शर्मा ने इसे सदन की अवमानना बताया और प्रिविलेजेस कमेटी में शिकायत दर्ज कराई. तीन नेताओं - कांग्रेस के मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा, AICC के जयराम रमेश और सोशल मीडिया हेड सुप्रिया श्रीनाटे को नोटिस भेजा गया. जवाब देने के लिए तीन दिन का वक्त दिया गया.

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सुप्रिया ने साफ कहा कि वीडियो में ‘ड्रामाटाइज्ड वर्शन’ लिखा हुआ था और हाल के हफ्तों में उनके कई AI वीडियो पुलिस की दखल के चलते हटाए गए हैं. उनका तर्क है कि ये सिर्फ लोकतंत्र की हकीकत दिखा रहा था, जबकि बीजेपी के वीडियो उनकी तुलना में घटिया हैं.

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बीजेपी समर्थकों की तरफ से भी AI वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें राहुल गांधी को अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस से निर्देश लेते दिखाया गया है. इसके बाद कांग्रेस ने भी एक वीडियो शेयर किया जिसमें लोकसभा स्पीकर ओम बिरला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विपक्ष के नेता को न बोलने से रोकने के लिए मिलीभगत करते हुए दिखाया गया. दोनों पक्ष अपनी-अपनी कहानी पेश कर जनता को लुभा रहे हैं.

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सवाल उठता है कि AI तकनीक अब सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि राजनीति का तेज हथियार बन चुकी है. संसद के प्रिविलेज की सीमा क्या होगी? राजनीतिक व्यंग्य और गलत सूचना में फर्क कहां रखा जाएगा? लोकतंत्र में डिजिटल अभिव्यक्ति की आज़ादी की हदें क्या होंगी?

अभी इन सवालों का कोई ठोस जवाब नहीं है, पर एक बात साफ है - यह जंग अभी शुरू हुई है और यह भविष्य की जंग की नई परिभाषा गढ़ेगी.

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