किसान पंचायत: क्या वामदलों ने हाईजैक किया आंदोलन? जानें क्या बोले कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर

किसान आंदोलन के बीच देश के कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने आजतक के किसान पंचायत में कई अहम सवालों के जवाब दिए. उन्होंने किसान आंदोलन में वामपंथी दलों की एंट्री से लेकर अन्य मुद्दों पर भी बात की. कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों को समझना चाहिए कि उनके आंदोलन से लोगों को परेशानी हो रही है.

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केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 दिसंबर 2020,
  • अपडेटेड 2:52 PM IST
  • आजतक के किसान पंचायत में बोले कृषि मंत्री
  • कहा- किसानों के आंदोलन से लोगों को हो रही परेशानी

किसान आंदोलन के बीच देश के कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने आजतक के किसान पंचायत में कई अहम सवालों के जवाब दिए. उन्होंने किसान आंदोलन में वामपंथी दलों की एंट्री से लेकर अन्य मुद्दों पर भी बात की. कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों को समझना चाहिए कि उनके आंदोलन से लोगों को परेशानी हो रही है. उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि एमएसपी को लेकर शंका नहीं होनी चाहिए. एमएसपी है और आगे भी चलती रहेगी. किसान से बातचीत आगे भी जारी रहेगी. 

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किसान आंदोलन में वामपंथी भी

कितने संगठन ऑथराइज्ड तरीके से आए? इस सवाल पर कृषि मंत्री तोमर ने कहा कि पहले 31 संगठन आए, फिर 35 हो गए. बाद में वो 37 हो गए और कोई किसी का मालिक नहीं है. इसमें दिक्कत ये है, कि कुछ लोग ऐसे हैं, जो बाद में हमारे देखने में आया कि कोई उग्रान ग्रुप है, उसने मानवाधिकार दिवस मनाया, उसमें ऐसे लोगों की तस्वीरें हैं, जिनको पूजा जा रहा है.  कृषि मंत्री ने कहा, मैं किसान संगठनों से मिला लेकिन उनमें कुछ वामपंथी भी थे. ये हमें बाद में मालूम चला. इनमें उग्रान हैं, हन्नान मुल्ला शामिल हैं. किसान आंदोलन के गलत दिशा में जाने से सरकार चिंतित है.  

MSP कानून का हिस्सा क्यों नहीं,  ये बोले तोमर

जब उनसे पूछा गया कि एमएसपी को कानून का हिस्सा बनाने में परेशानी क्या है? इस पर उन्होंने कहा, हर चीज कानून से नहीं होती. कुछ चीजों के लिए कानून बनाए जाते हैं. कुछ चीजें कानून के तहत नियमों से चलती हैं और कुछ चीजें प्रशासनिक आदेशों से चलती हैं. यह एमएसपी का निर्णय भारत सरकार का प्रशासकीय निर्णय है और इसका फायदा किसानों को मिल रहा है. हर चीज के लिए कानून बने ये जरूरी नहीं है. 

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क्या एमएसपी को कानून का हिस्सा बनाने को लेकर आर्थिक चुनौती भी है? इस सवाल पर तोमर ने कहा, एक निर्णय के कई परिणाम होते हैं. सरकार को सभी पक्ष देखने होते हैं. अभी कोशिश है कि किसानों को एमएसपी का सही दाम मिल जाए. इस बार भी खरीफ की खरीद पहले की तुलना में काफी ज्यादा हुई है. रबी का भी एमएसपी घोषित किया जा चुका है. ऐसे में एमएसपी पर शंका करना बेकार है.

कृषि मंत्री ने कहा कि इस सेक्टर में बदलाव की जरूरत थी. रोजगार के अवसर पैदा होंगे. किसान देश का सबसे बड़ा उत्पादकर्ता है. ओपन ट्रेड से किसानों की स्थिति बदलेगी. किसानों की जमीन पर उद्योगपतियों का कब्जा नहीं होगा. डिजिटल मंडियों से किसान कहीं का भी भाव देखकर अपनी फसल बेच सकता है. 

जब पूछा गया कि क्या आंदोलन कर रहे किसानों की ओर से कोई फीडबैक मिला है? इस पर उन्होंने कहा कि इस आंदोलन में कई किसान यूनियन हैं. कोई एक नहीं है.  निर्णय करने में उन्हें भी दिक्कत आ रही है. 

 

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