PM मोदी के बचपन के दोस्त को अब भी नहीं मिलेगी जमीन! BJP विधायक पीछे हटे लेकिन फिर भी फंसा पेच

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बचपन के दोस्त असगर अली वोरा से जुड़े 15 साल पुराने जमीन विवाद में नया मोड़ आया है. बीजेपी विधायक द्वारा कब्जा छोड़ने के बाद भी उन्हें ये जमीन मिलने के मामले में पेच फंस गया है. जमीन से जुड़े बिल्डर ने दावा किया है कि वोरा जनवरी 2026 में केस हार चुके हैं और अब उन्होंने अपील की है.

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असगर अली वोरा ने बीजेपी विधायक की शिकायत लेकर पीएम मोदी से 8 सितंबर को मुलाकात की थी. (File Photo- ITG) असगर अली वोरा ने बीजेपी विधायक की शिकायत लेकर पीएम मोदी से 8 सितंबर को मुलाकात की थी. (File Photo- ITG)

मुस्तफा शेख

  • मुंबई,
  • 16 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 6:16 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बचपन के दोस्त असगर अली वोरा से जुड़े जमीन विवाद में नया मोड़ आ गया है. बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता द्वारा जमीन से जुड़ी डील रद्द करने के ऐलान के बाद भी असगर अली वोरा को उनकी जमीन मिलने का रास्ता साफ नहीं हुआ है. कारण, इस जमीन पर काम कर रहे बिल्डर का कहना है कि वोरा जनवरी 2026 में यह केस हार चुके हैं और अब उन्होंने 90 दिन की अवधि बीतने के बाद अपील दाखिल की है.

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दरअसल, असगर अली वोरा ने बीजेपी विधायक की शिकायत लेकर पीएम मोदी से 8 सितंबर को मुलाकात की थी. वोरा का दावा है कि उन्होंने 1989 में भायंदर ईस्ट के नवघर इलाके में करीब 2,810 वर्ग मीटर जमीन खरीदी थी. उनका आरोप है कि 2011 में स्वयं बिल्डर्स और नरेंद्र मेहता की कंपनी सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन्स ने इस जमीन पर कब्जा कर लिया. वह करीब 15 साल से इस जमीन को लेकर अलग-अलग सरकारी एजेंसियों के चक्कर लगा रहे हैं.

पीएम मोदी से मुलाकात के दौरान वोरा ने अपनी पूरी बात रखी और उन्हें सकारात्मक जवाब मिलने का दावा किया. इसके बाद सरकारी स्तर पर भी मामले में हलचल बढ़ी. मंगलवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी श्रीकर परदेशी ने मंत्रालय में इस मामले को लेकर बैठक की. इसमें असगर अली वोरा, नरेंद्र मेहता, मीरा-भायंदर नगर निगम की कमिश्नर राधा विनोद शर्मा और टाउन प्लानर पुरुषोत्तम शिंदे शामिल हुए.

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विधायक ने डील रद्द की, लेकिन जमीन वोरा को नहीं मिलेगी

बैठक के दौरान बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता ने टाउन प्लानिंग विभाग को पत्र देकर विवादित जमीन से कब्जा छोड़ने और अपनी कंपनी को मिली निर्माण अनुमति वापस लेने की जानकारी दी. मेहता के मुताबिक, उनकी कंपनी ने 2019 में यह जमीन मर्विन फर्नांडिस से खरीदी थी.

मेहता ने पुलिस कमिश्नर को भी पत्र लिखकर वोरा के खिलाफ पहले दर्ज कराई गई शिकायत वापस लेने की बात कही. उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच समझौते के बाद यह कदम उठाया गया है. हालांकि, मेहता ने साफ किया कि जमीन असगर अली वोरा को नहीं दी जाएगी. उनके मुताबिक, लेन-देन रद्द होने के बाद जमीन वापस मर्विन फर्नांडिस के पास जाएगी.

मेहता ने अपने बचाव में कहा कि उन्होंने अदालत के उस आदेश के आधार पर जमीन खरीदी थी, जिसमें प्लॉट का 50 फीसदी हिस्सा मर्विन फर्नांडिस के पक्ष में दिया गया था. उनका कहना है कि उस आदेश को चुनौती नहीं दी गई थी. अगर अदालत के आदेश पर भरोसा करके जमीन नहीं खरीदी जाएगी तो फिर किस पर भरोसा किया जाएगा.

डेवलपर का दावा- वोरा केस हार चुके हैं

वहीं स्वयं बिल्डर्स की डेवलपर शेफाल जैन ने असगर अली वोरा के दावे पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि वोरा जनवरी 2026 में केस हार चुके हैं और हाल ही में 90 दिन की अवधि गुजरने के बाद उन्होंने फैसले के खिलाफ अपील दाखिल की है. अदालत के आदेश में साफ कहा गया है कि वोरा सह-मालिक की ओर से पावर ऑफ अटॉर्नी पेश करने में नाकाम रहे. 

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उनका यह भी दावा है कि 1989 में वोरा की ओर से 1.51 लाख रुपये के भुगतान का कोई सबूत नहीं है. जमीन पर स्वंय बिल्डर्स का कब्जा है, उसके पक्ष में अदालत का आदेश है और 1.16 करोड़ रुपये के भुगतान का एग्रीमेंट भी मौजूद है. कंपनी वोरा के खिलाफ जरूरी कानूनी कार्रवाई करेगी.

वहीं, बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता ने स्थानीय राजनीति को इस विवाद के पीछे बताया है. उन्होंने बिना नाम लिए शिवसेना नेता पर निशाना साधते हुए कहा कि स्थानीय नेता उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. मेहता ने दावा किया कि स्थानीय चुनाव में गठबंधन नहीं करने के कारण कुछ लोग उनसे नाराज हैं.

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