'सर, आपका बैंक अकाउंट चाहिए... बदले में पैसे मिल जाएंगे.' सुनने में यह आसान कमाई का ऑफर लगता है. लेकिन नागपुर में कई लोग इसी लालच में फंस गए. उन्हें शायद अंदाजा भी नहीं था कि उनका बैंक खाता किसी नौकरी या बिजनेस के लिए नहीं, बल्कि साइबर ठगी के पैसों को इधर-उधर भेजने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है.
मामला नागपुर के जरिपटका इलाके का है, जहां पुलिस ने ऐसे नेटवर्क का खुलासा किया है, जिसमें किराए के बैंक खातों के जरिए साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर की जा रही थी. जांच की शुरुआत तब हुई, जब पुलिस को नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स (NCR) पोर्टल के जरिए इनपुट मिला कि शहर के करीब 62 बैंक खाते साइबर ठगी से जुड़े संदिग्ध लेन-देन में इस्तेमाल हो रहे हैं.
इसके बाद पुलिस ने इन खातों की जांच शुरू की. शुरुआती जांच में 11 बैंक खातों को शॉर्टलिस्ट किया गया. जब इन खातों का रिकॉर्ड खंगाला गया तो पता चला कि इनमें देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में संदिग्ध ट्रांजेक्शन हुए हैं.
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पुलिस के मुताबिक, ये खाते जरिपटका की इंदिरा गांधी कॉलोनी स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र की एक शाखा से जुड़े हैं. आरोप है कि साइबर ठग खाताधारकों को कुछ पैसों या कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खातों का एक्सेस हासिल कर लेते थे. इसके बाद ऑनलाइन ठगी से हासिल रकम इन्हीं खातों में ट्रांसफर की जाती और फिर आगे दूसरे खातों में भेज दी जाती थी, ताकि पैसे का स्रोत छिपाया जा सके.
इस मामले में पुलिस ने सारिका कवारे, ऐश्वर्या सूर्यवंशी, निरंजन दांडसी और शेख सलीम शेख समेत कुल 11 खाताधारकों के खिलाफ तीन अलग-अलग केस दर्ज किए हैं. पुलिस के अनुसार, सिर्फ इन 11 खातों में ही करीब 36 लाख रुपये के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है.
पुलिस का मानना है कि यह एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है. अब यह पता लगाया जा रहा है कि खाताधारक सिर्फ अपने खाते उपलब्ध करा रहे थे या उन्हें पूरे साइबर फ्रॉड नेटवर्क की जानकारी भी थी. साथ ही उन लोगों की भी तलाश की जा रही है, जो इस नेटवर्क को ऑपरेट कर रहे थे.
योगेश पांडे