महाराष्ट्र के मुंबई में खुले मैदान और खाली जगहों को बचाने को लेकर सियासत तेज हो गई है. शिवसेना यूबीटी नेता आदित्य ठाकरे ने रविवार को मुंबई में ‘मुंबई मैदान बचाओ तिरंगा आंदोलन’ का नेतृत्व किया. यह आंदोलन बांद्रा वेस्ट के नेविल डिसूजा फुटबॉल मैदान में हुआ. इस दौरान आदित्य ठाकरे ने शहर की खुली जगहों को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए.
आदित्य ठाकरे ने कहा कि मुंबई की खुली जमीन किसी भी हालत में बिल्डरों और ठेकेदारों को नहीं दी जानी चाहिए. जरूरत पड़ी तो बीएमसी मुख्यालय तक मार्च निकाला जाएगा.
आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया कि बांद्रा वेस्ट, जुहू, अंधेरी और मुलुंड में मौजूद खुली जगहों को निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान इन जगहों को लेकर कई प्रस्ताव सामने आ रहे हैं.
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ निर्वाचित प्रतिनिधि भी ऐसी योजनाओं का समर्थन कर रहे हैं. इन खुली जगहों को बिल्डरों और ठेकेदारों को सौंपने की कोशिश की जा रही है.
आदित्य ठाकरे ने कहा कि मुंबई में खुले मैदानों और सार्वजनिक जगहों की कमी पहले से ही है. ऐसे में अगर इन जगहों पर निर्माण शुरू हुआ, तो आम लोगों और खासकर युवाओं के लिए मुश्किल बढ़ जाएगी.
'जरूरत पड़ी तो BMC तक मार्च करेंगे'
आदित्य ठाकरे ने कहा कि मुंबई की खुली जमीन का एक इंच भी किसी को नहीं दिया जाएगा. अगर सरकार ने इन जगहों को लेकर फैसला आगे बढ़ाया, तो उनकी पार्टी इसका विरोध करेगी.
उन्होंने साफ कहा कि जरूरत पड़ने पर कार्यकर्ता बीएमसी मुख्यालय तक मार्च निकालेंगे. यह लड़ाई सिर्फ किसी एक मैदान की नहीं है. यह मुंबई के लोगों के लिए बची हुई खुली जगहों की लड़ाई है. उन्होंने बीजेपी के 1980 के राष्ट्रीय सम्मेलन का भी जिक्र किया. ठाकरे ने कहा कि जिस जगह पर कभी बीजेपी का राष्ट्रीय सम्मेलन हुआ था, वहां अब कन्वेंशन सेंटर बनाने की बात कही जा रही है.
आंदोलन में मैदान से जुड़े खिलाड़ी और रेफरी भी मौजूद रहे. उन्होंने कहा कि यह मुंबई का एक महत्वपूर्ण फुटबॉल मैदान है. खिलाड़ियों के मुताबिक शहर में पहले ही खेल के मैदानों की कमी है. खिलाड़ियों ने कहा कि अगर युवाओं को खेल में आगे बढ़ाना है, तो उन्हें मैदान भी देने होंगे. उन्होंने कहा कि खिलाड़ी देश के लिए खेलना चाहते हैं. लेकिन इसके लिए उन्हें अभ्यास करने की जगह चाहिए.
खिलाड़ियों ने सरकार से इस समस्या का समाधान निकालने की अपील की. उन्होंने कहा कि मैदान कम होने से खेल प्रतिभाओं को नुकसान हो सकता है.
मुंबई में खुले मैदान और सार्वजनिक जगहों को लेकर लंबे समय से बहस होती रही है. शिवसेना यूबीटी का कहना है कि शहर की खुली जगहों को बचाना जरूरी है. पार्टी इसके लिए आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है. वहीं जिन योजनाओं का ठाकरे ने विरोध किया है, उनके बारे में सरकार का पक्ष सामने आना बाकी है.
मुस्तफा शेख