पुलिस हादसा मान चुकी थी, तभी CCTV में... फिर बदल गई केतन की मौत की पूरी कहानी

लोहागढ़ किले पर केतन अग्रवाल की मौत को शुरुआत में हादसा माना गया था, लेकिन परिवार के बयानों, 18 दिनों में तीन बार किले की यात्रा, CCTV में दिखे हूडी पहने युवक और कथित इशारों ने जांच को नई दिशा दे दी. पुलिस अब तकनीकी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम को जोड़ने में जुटी है.

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केतन केस में CCTV ने दिया नया मोड़. (Photo: ITG) केतन केस में CCTV ने दिया नया मोड़. (Photo: ITG)

दिव्येश सिंह

  • पुणे,
  • 25 जून 2026,
  • अपडेटेड 7:11 PM IST

केतन अग्रवाल की मौत के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह नहीं था कि वह खाई में कैसे गिरा. असली सवाल यह था कि क्या वह ऐसा युवक था जो खुद किसी खतरनाक जगह पर जाकर जोखिम उठा सकता था. जांच की शुरुआत में पुलिस ने केतन के परिवार से लंबी बातचीत की. परिवार के लोग सदमे में थे, लेकिन उन्होंने केतन के स्वभाव के बारे में जो बातें बताईं, उन्होंने जांचकर्ताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया. परिवार का कहना था कि केतन बेहद सतर्क स्वभाव का लड़का था और वह अनावश्यक जोखिम लेने से हमेशा बचता था.

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परिजनों ने बताया कि ट्रैकिंग के दौरान भी वह हमेशा 10 से 20 फीट की दूरी बनाकर चलता था. अगर रास्ता कठिन होता तो वह और ज्यादा सावधानी बरतता था. परिवार ने यह भी बताया कि गोवा ट्रिप के दौरान उसने समुद्र में नहाने से इनकार कर दिया था. इन बातों ने पुलिस के मन में पहला संदेह पैदा किया. अगर केतन इतना सतर्क था, तो फिर वह ऐसी जगह तक कैसे पहुंचा जहां उसकी जान चली गई.

घटना वाले दिन केतन के दोनों चाचा दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक पुलिस के साथ रहे. इस दौरान पुलिस ने उनके साथ लंबी पूछताछ की. अधिकारियों ने सिर्फ घटना के बारे में नहीं पूछा, बल्कि केतन की आदतों, उसके स्वभाव, उसके व्यवहार और उसकी दिनचर्या के बारे में भी जानकारी जुटाई. पुलिस ने यह भी जानने की कोशिश की कि क्या परिवार को किसी व्यक्ति पर शक है. हालांकि परिवार ने किसी पर भी संदेह होने से इनकार कर दिया.

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जांच आगे बढ़ी तो एक और सवाल सामने आया जिसने पूरी कहानी की दिशा बदल दी. पुलिस के अनुसार, केतन 18 दिनों के अंदर तीन बार लोहागढ़ किले पर गया था. यह जानकारी सामने आने के बाद जांचकर्ताओं ने यह समझने की कोशिश शुरू की कि आखिर वह बार-बार उसी जगह क्यों जा रहा था. इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए 21 जून को 18 जून के CCTV फुटेज की विस्तृत जांच शुरू की गई.

पुलिस ने सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक की रिकॉर्डिंग को ध्यान से देखा. शुरुआत में सब कुछ सामान्य दिखाई दिया. केतन और सिया दूसरे पर्यटकों की तरह ही नजर आ रहे थे. कोई असामान्य गतिविधि दिखाई नहीं दी. जांचकर्ता लगभग अपनी जांच पूरी कर चुके थे और वहां से निकलने की तैयारी में थे.

तभी उनकी नजर एक युवक पर पड़ी

उस युवक ने हूडी पहन रखी थी और कानों में हेडफोन लगाए हुए थे. पहली नजर में यह कोई बड़ी बात नहीं लगी, लेकिन अधिकारियों को उसका पहनावा असामान्य लगा. पुलिस ने उस दिन का तापमान जांचा तो वह करीब 33 डिग्री सेल्सियस निकला. इतनी गर्मी में हूडी पहनकर घूमने वाला व्यक्ति जांचकर्ताओं की नजर में आ गया.

यहीं से फुटेज को दोबारा देखने का फैसला किया गया. इस बार पूरा ध्यान उसी युवक पर रखा गया. फुटेज में दिखाई दिया कि वह युवक नीचे की तरफ से तेजी से आता है. लेकिन जैसे ही उसकी नजर केतन और सिया पर पड़ती है, वह अचानक रुक जाता है और बैठ जाता है. पुलिस का दावा है कि इसके बाद उसने हाथ से कुछ संकेत किए. पुलिस के अनुसार, सिया की ओर से भी हल्का संकेत दिखाई दिया.

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जांचकर्ताओं ने एक और बात नोट की. पुलिस के अनुसार, उस युवक के पहुंचने से पहले सिया कई बार पीछे मुड़कर देख रही थी. यह बात अधिकारियों को सामान्य नहीं लगी. फुटेज में दिखाई देने वाली इन गतिविधियों ने जांच टीम को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि मामले को और गहराई से देखने की जरूरत है. जांच के दौरान पुलिस को एक और महत्वपूर्ण जानकारी मिली. किले के कुछ हिस्सों में CCTV रिकॉर्डिंग पूरी तरह उपलब्ध नहीं थी. जांच में सामने आया कि बंदरों ने कई कैमरों के तार तोड़ दिए थे, जिसके कारण कुछ हिस्सों की रिकॉर्डिंग प्रभावित हुई. इससे पुलिस के सामने पूरी तस्वीर नहीं थी और कई सवाल अब भी अनसुलझे  थे. 

इसी दौरान टिकट काउंटर से जुड़ी जानकारी भी सामने आई. पुलिस के अनुसार, उस दिन मोबाइल नेटवर्क की समस्या के कारण ऑनलाइन भुगतान नहीं हो पा रहा था. किले में प्रवेश के लिए टिकट लेना जरूरी था, लेकिन भुगतान में परेशानी आने के कारण केतन और सिया कुछ समय तक उसी स्थान पर खड़े रहे. पुलिस का कहना है कि इसी दौरान हूडी वाला युवक भी कुछ देर वहां बैठा रहा. बाद में वह बिना टिकट लिए ऊपर चला गया. जांचकर्ताओं ने इस गतिविधि को भी अपने नोट्स में शामिल किया और उसके मूवमेंट को विस्तार से समझने की कोशिश की.

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फुटेज और घटनास्थल की परिस्थितियों को देखने के बाद पुलिस टीम मौके पर भी पहुंची. वहां उपलब्ध तथ्यों और रिकॉर्डिंग का मिलान किया गया. पुलिस को लगा कि मामले में कुछ ऐसे पहलू हैं जिनकी और जांच की जरूरत है. लोहागढ़ से लौटते समय पुलिस को संयोगवश केतन के चाचा विजय दिखाई दिए. वह घटनास्थल देखने जा रहे थे. पुलिस उन्हें अपने साथ थाने ले गई और उनसे भी विस्तार से पूछताछ की गई. 

अधिकारियों ने उनसे भी परिवार, केतन और उसके हाल के व्यवहार के बारे में जानकारी जुटाई. सूत्रों के मुताबिक, इसके बाद केतन की बहन संजना से भी करीब 8 से 9 घंटे तक पूछताछ की गई. पुलिस ने परिवार के अलग-अलग सदस्यों से मिली जानकारियों का मिलान किया. पूछताछ के बाद जांचकर्ताओं को महसूस हुआ कि मामले में कुछ ऐसी बातें हैं जिन्हें और गहराई से समझना जरूरी है.

इसी दौरान परिवार ने पुलिस को कुछ और जानकारियां दीं

परिवार के अनुसार, 4 जून को केतन लोहागढ़ जाना चाहता था, लेकिन उसे अनुमति नहीं दी गई थी. बाद में 14 जून को उसे जाने दिया गया. परिवार ने पुलिस को बताया कि केतन ने अपनी मां से कहा था कि जब वह 4 जून को नहीं जा पाया था, तब सिया बहुत रोई थी और उसने उस पर काफी दबाव बनाया था. यही वजह थी कि बाद में उसकी मां ने उसे सिया के साथ लोहागढ़ जाने की अनुमति दे दी.

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इसके बाद 17 जून को केतन ने अपनी मां को बताया कि 18 जून को सिया के एक दोस्त ने सरप्राइज प्लान बनाया है. इसी वजह से परिवार ने उसे जाने की अनुमति दे दी. उस समय यह एक सामान्य यात्रा लग रही थी. लेकिन बाद में यही यात्रा जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई. पुलिस जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार, कथित तौर पर एक योजना बनाई गई थी. आरोप है कि किले पर पहुंचने के बाद सिया को थकने का बहाना कर बैठना था. इसे संकेत माना जाना था. पुलिस का आरोप है कि जैसे ही सिया बैठी, केतन भी रुक गया और उसी दौरान चेतन ने कथित तौर पर उसे धक्का देकर खाई में गिरा दिया.

हालांकि यह पुलिस जांच के दौरान सामने आए आरोप हैं और इनकी अंतिम पुष्टि अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी. फिलहाल पुलिस तकनीकी साक्ष्यों, CCTV फुटेज, बयानों और परिस्थितिजन्य तथ्यों को जोड़कर उस दिन की पूरी कहानी समझने की कोशिश कर रही है. एक तरफ परिवार यह मानने को तैयार नहीं कि केतन खुद जोखिम उठा सकता था. दूसरी तरफ जांच में सामने आए कुछ तथ्य लगातार नए सवाल खड़े कर रहे हैं. 

18 दिनों में तीन बार लोहागढ़ की यात्रा, CCTV में दिखाई दिया रहस्यमयी युवक, कथित इशारे, टिकट काउंटर पर बिताया गया समय और परिवार के बयान. इन सभी कड़ियों को जोड़कर पुलिस अब उस सवाल का जवाब तलाश रही है जिसका जवाब शायद पूरे मामले की सच्चाई सामने ला सकता है. आखिर 18 जून को लोहागढ़ किले पर वास्तव में क्या हुआ था.

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