घाटकोपर हिट एंड रन केस: नाबालिग की जमानत रद्द, मुंबई सेशंस कोर्ट का फैसला

मुंबई सेशंस कोर्ट ने घाटकोपर कार हादसे में शामिल नाबालिग की ज़मानत रद्द कर दी है और जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) को उसे बाल सुधार गृह भेजने के लिए आवश्यक आदेश जारी करने का निर्देश दिया है.

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 सेशंस कोर्ट ने नाबालिग को बाल सुधार गृह भेजा  (Photo: Representational) सेशंस कोर्ट ने नाबालिग को बाल सुधार गृह भेजा (Photo: Representational)

विद्या

  • मुंबई,
  • 01 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:01 AM IST

मुंबई के घाटकोपर कार हादसा मामले में मुंबई सेशंस कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने हादसे में शामिल नाबालिग की जमानत रद्द कर दी है. इसके साथ ही सबअर्बन जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) को निर्देश दिया है कि नाबालिग की मौजूदगी सुनिश्चित कर उसे बाल सुधार गृह भेजने के लिए उचित आदेश जारी किया जाए. इस हादसे में व्यवसायी ध्रुमिल प्रेमजी पटेल की मौत हो गई थी, जबकि उनकी पत्नी मीनल घायल हुई थीं.

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यह दुर्घटना 5 फरवरी की रात करीब 11:15 बजे विद्याविहार स्थित सोमैया कॉलेज के पास हुई थी. उस समय ध्रुमिल पटेल और उनकी पत्नी मीनल स्कूटर से जा रहे थे. तभी किशोर द्वारा चलाई जा रही एक किआ सेल्टोस कार ने तेज रफ्तार में उनके दोपहिया वाहन को टक्कर मार दी थी.

नाबालिग पर गैर-इरादतन हत्या, लापरवाही से वाहन चलाने और भारतीय न्याय संहिता तथा मोटर वाहन अधिनियम के तहत अन्य अपराधों के आरोप लगाए गए हैं. उसे  जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश किया गया था. बोर्ड ने 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा को देखते हुए 6 मार्च को उसे अंतरिम ज़मानत दे दी थी. बाद में उसे ऑब्जर्वेशन होम में काउंसलिंग दी गई और फिर 6 मार्च को नियमित जमानत मिल गई. इस बीच, कार के मालिक और नाबालिग के पिता को भी गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें बाद में ज़मानत मिल गई.

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ब्लड मनी देने की कोशिश

इसके बाद ध्रुमिल पटेल के परिवार ने मुंबई सेशंस कोर्ट में आपराधिक अपील दायर की, जिसमें एडवोकेट रूबेन मैस्करेनहास ने उनका पक्ष रखा. आरोप लगाया गया कि नाबालिग के परिवार ने एफआईआर वापस लेने के बदले 40 लाख रुपये की 'ब्लड मनी' देने की कोशिश की थी.

विस्तृत आदेश अभी तक उपलब्ध नहीं

जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत बच्चे का हित सबसे ऊपर माना जाता है. हालांकि, मैस्करेनहास ने तर्क दिया कि मौत का कारण बनने वाले गंभीर अपराधों के मामलों में इसे अन्य सभी पहलुओं से ऊपर नहीं रखा जा सकता. उन्होंने नाबालिग के सोशल मीडिया अकाउंट्स का भी हवाला देते हुए आरोप लगाया कि वह पहले भी सड़कों पर लापरवाही और खतरनाक स्टंट करने का आदी था. मैस्करेनहास ने यह भी कहा कि JJB ने इन सोशल मीडिया वीडियो को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि उनका मौजूदा घटना से कोई संबंध नहीं है. मैस्करेनहास की दलीलें सुनने के बाद, जबकि नाबालिग या उसके पिता की ओर से कोई भी अदालत में मौजूद नहीं था, जज एम.एस. शेख ने आदेश पारित किया. हालांकि, अदालत का विस्तृत आदेश अभी तक उपलब्ध नहीं कराया गया है.

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