हावड़ा रेलवे स्टेशन... एक मुलाकात तय थी. बाहर से देखने पर सब कुछ सामान्य लग रहा था. लेकिन स्टेशन पर पहले से CBI की टीम मौजूद थी. जैसे ही एक बैग हाथ बदला, टीम हरकत में आई और रेलवे के एक बड़े अधिकारी को वहीं पकड़ लिया. दरअसल, यहां दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल में तैनात डिप्टी चीफ सिग्नल एंड टेलीकॉम इंजीनियर (Dy. CSTE) सत्यम कुमार को अरेस्ट किया गया है. CBI का कहना है कि उन्हें 4 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया.
CBI के मुताबिक, 24 जुलाई को इस मामले में करप्शन का केस दर्ज किया गया था. आरोप है कि चक्रधरपुर रेल मंडल में चल रहे सिग्नल और टेलीकॉम से जुड़े करोड़ों रुपये के कामों में एक निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने के बदले रिश्वत मांगी जा रही थी.
जांच एजेंसी का कहना है कि यह रिश्वत प्राइस वैरिएशन क्लॉज (PVC), कॉन्ट्रैक्ट वैरिएशन फाइल, रनिंग अकाउंट (RA) बिल, सप्लीमेंट्री एग्रीमेंट और दूसरी वित्तीय फाइलों को आगे बढ़ाने और मंजूरी दिलाने के एवज में मांगी गई थी. CBI के अनुसार, मई 2026 में कंपनी की ओर से कथित तौर पर 5 लाख पहले ही दिए जा चुके थे. इसके बाद बाकी रकम देने के लिए 25 जुलाई की सुबह हावड़ा रेलवे स्टेशन पर मिलने की बात तय हुई.
यह भी पढ़ें: झांसी: 60 हजार ऐंठ चुके थे, फिर भी चैन नहीं... चौकी पर रिश्वत लेते दारोगा-सिपाही रंगेहाथ गिरफ्तार
एजेंसी को इसकी सूचना मिल चुकी थी. CBI ने ट्रैप लगाया. जैसे ही कंपनी के प्रतिनिधियों ने कथित तौर पर 4 लाख सत्यम कुमार को सौंपे, टीम ने मौके पर ही उन्हें पकड़ लिया. CBI का कहना है कि रिश्वत की पूरी रकम भी बरामद कर ली गई है.
इस कार्रवाई में CBI ने कंपनी के दो प्रतिनिधियों को भी गिरफ्तार किया है. एजेंसी ने कंपनी, उसके निदेशक और रेलवे के कुछ अज्ञात अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है. मामले की जांच सीबीआई, एसीबी कोलकाता के एएसपी तरुण कुमार सिन्हा को सौंपी गई है.
हावड़ा स्टेशन पर गिरफ्तारी के बाद मामला वहीं नहीं रुका. CBI की टीमें पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में आरोपियों के ठिकानों पर पहुंचीं. तलाशी के दौरान कई दस्तावेज, डिजिटल सबूत और अन्य सामग्री जब्त किए जाने का दावा किया गया है. इस मामले में चक्रधरपुर रेल मंडल के सीनियर डीसीएम आदित्य चौधरी ने भी पुष्टि की है. हालांकि ज्यादा जानकारी देने से परहेज किया है. उन्होंने कहा है कि सीबीआई के द्वारा जितना मामला दर्ज किया गया है, उनके पास उतनी ही जानकारी है.
CBI ने अपने आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि पश्चिम बंगाल में कई वर्षों बाद रिश्वतखोरी के मामले में यह ट्रैप कार्रवाई है. एजेंसी ने कहा कि यह अभियान भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और भ्रष्ट लोकसेवकों व निजी व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है. इस पूरे मामले की जांच अभी जारी है.
सत्यजीत कुमार