जम्मू-कश्मीर में सैनिकों पर दर्ज FIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में PIL

10 गढ़वाल राइफल के मेजर आदित्य कुमार के पिता लेफ्टिनेंट कर्नल कर्मवीर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा है कि राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान की रक्षा के लिए और जान की बाजी लगाने वाले भारतीय सेना के जवानों के मनोबल की रक्षा की जाए.

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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो- PTI) सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो- PTI)

अजीत तिवारी / संजय शर्मा

  • शोपियां,
  • 08 फरवरी 2018,
  • अपडेटेड 9:08 PM IST

जम्मू कश्मीर के शोपियां में हुई पत्थरबाजों और सैनिकों की मुठभेड़ मामले की अपील सुप्रीम कोर्ट में की गई है. सेना के मेजर आदित्य के पिता लेफ्टिनेंट कर्नल कर्मवीर सिंह ने FIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. 27 जनवरी को जम्मू कश्मीर के शोपियां में FIR दर्ज की गई थी.

10 गढ़वाल राइफल के मेजर आदित्य कुमार के पिता लेफ्टिनेंट कर्नल कर्मवीर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा है कि राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान की रक्षा के लिए और जान की बाजी लगाने वाले भारतीय सेना के जवानों के मनोबल की रक्षा की जाए.

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उन्होंने कहा कि जिस तरीके से राज्य में राजनीतिक नेतृत्व द्वारा FIR दर्ज की गई और राज्य के उच्च प्रशासन को प्रोजेक्ट किया गया, इससे लगता है कि राज्य में विपरीत स्थिति है. ये उनके बेटे के लिए समानता के अधिकार और जीवन जीने के अधिकार का उल्लंघन है.

पुलिस ने इस मामले में उनके सैन्य अधिकारी बेटे को आरोपी बनाकर मनमाने तरीके से काम किया है. ये जानते हुए भी कि वो घटना स्थल पर मौजूद नहीं था और सेना शांतिपूर्वक काम कर रही थी. वहीं, हिंसक भीड़ ने सरकारी संपत्ति को बचाने के लिए कानूनी करवाई करने के लिए मजबूर किया.

उनके मुताबिक, सेना का ये काफिला केंद्र सरकार के निर्देश पर जा रहा था और अपने कर्तव्य का पालन कर रहे थे. ये कदम तब उठाया गया जब भीड़ ने पथराव किया और कुछ जवानों को पीट-पीट कर मार डालने की कोशिश की. साथ ही देश विरोधी गतिविधियों के खिलाफ कर्रवाई से रोकने की कोशिश की गई. इस तरह के हमला सेना का मनोबल गिराने के लिए किया गया था.

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याचिका में मांग की गई है कि आतंकी गतिविधियों और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने और केंद्रीय कर्मचारियों के जीवन को खतरे में डालने वाले लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए और पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए.

यह भी मांग की गई है कि आर्मी के मामले में इस तरह के फैसले लेने से रोका जाए और ऐसी स्थिति में सैनिकों को बचाने के लिए गाइड लाइन बनाया जाए. ड्यूटी पर तैनात सेना के जवानों को इस तरह की स्थिति में मुआवजे का प्रावधान किया जाए.

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