हॉस्टल से अगवा, 4 दिन तक टॉर्चर और फिर... सरला भट मर्डर केस में 35 साल बाद इंसाफ की ओर एक बड़ा कदम, चार्जशीट हुआ फाइल

जम्मू-कश्मीर की SIA ने श्रीनगर की TADA कोर्ट में 700 से ज्यादा पेज की चार्जशीट दाखिल की है. यह मामला 1990 में SKIMS नर्स सरला भट के अपहरण, टॉर्चर और हत्या से जुड़ा है. चार्जशीट में JKLF चीफ यासीन मलिक समेत 5 लोगों का नाम है, जिनमें से तीन की मौत हो चुकी है और एक फरार है.

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1990 में कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट की हत्या के मामले में 35 साल बाद जांच एजेंसी बड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी में है (Photo: ITG) 1990 में कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट की हत्या के मामले में 35 साल बाद जांच एजेंसी बड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी में है (Photo: ITG)

पूजा शाली / सुनील जी भट्ट

  • श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर,
  • 29 जून 2026,
  • अपडेटेड 4:48 PM IST

सालों पहले कश्मीर में एक नर्स की बेहद वहशी तरीके से हत्या कर दी गई थी. अब 35 साल बाद इस केस में सबसे बड़ी कार्रवाई की है. जम्मू-कश्मीर की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी SIA ने श्रीनगर की TADA कोर्ट में 700 से ज्यादा पेज की चार्जशीट दाखिल की है. इस चार्जशीट में JKLF चीफ यासीन मलिक समेत कई लोगों का नाम शामिल है.

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ये मामला है 18 अप्रैल 1990 का. सरला भट नाम की एक नर्स श्रीनगर के SKIMS हॉस्पिटल में काम करती थीं. इस दिन आतंकियों ने उन्हें हॉस्पिटल के पास से अगवा कर लिया. इसके बाद उनके साथ बहुत बुरी तरह मारपीट, टॉर्चर और दुष्कर्म किया गया. फिर श्रीनगर के ओमर कॉलोनी, मालबाग इलाके में उन्हें गोलियों से भून दिया गया. ये उस दौर की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक मानी जाती है, जब कश्मीर में आतंकवाद अपने शुरुआती और सबसे खतरनाक दौर में था.

सूत्रों के मुताबिक इस हत्या की साजिश में यासीन मलिक के अलावा खुर्शीद अहमद चालू, अब्दुल हमीद शेख, मोहम्मद यूसुफ सोफी (जिसे इदरीस भी कहा जाता था) और गुलाम मोहम्मद टापलू का नाम शामिल है. इनमें से अब्दुल हमीद शेख, यूसुफ सोफी और गुलाम मोहम्मद टापलू की मौत हो चुकी है. यासीन मलिक फिलहाल एक दूसरे केस में जेल में बंद है. जबकि खुर्शीद अहमद चालू, जिसे सरला भट पर गोली चलाने वाला बताया जा रहा है, वो फरार है और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर भाग गया माना जाता है. उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है.

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इस केस को 18 मार्च 2024 को जम्मू-कश्मीर के DGP के आदेश पर SIA को सौंपा गया था. इतने सालों तक ये केस अनसुलझा रहा क्योंकि उस वक्त कश्मीर में डर और दहशत का माहौल था, जिसकी वजह से कोई गवाह सामने आकर सच नहीं बता पाता था. लेकिन SIA की टीम ने इस केस को नए सिरे से खोला और मौखिक गवाही, फोरेंसिक सबूत, मेडिकल रिपोर्ट, इलेक्ट्रॉनिक सबूत और लंबी फील्ड जांच के जरिए पूरी घटना को दोबारा जोड़ा.

जांच में पता चला कि सरला भट की हत्या कोई इकलौती घटना नहीं थी, बल्कि ये JKLF की एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी, जिसका मकसद कश्मीरी पंडितों में डर फैलाकर उन्हें घाटी से भगाना और अपने अलगाववादी मकसद को आगे बढ़ाना था. चार्जशीट में हत्या, अपहरण, साजिश जैसी कई गंभीर धाराओं के साथ-साथ TADA कानून की धाराएं भी लगाई गई हैं.

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