35A पर भड़के उमर अब्दुल्ला, बोले- प्रोपेगेंडा चला रही BJP, भुगतने होंगे परिणाम

उमर बोले कि अगर बीजेपी कोर्ट के जरिए अनुच्छेद 35ए को खत्म करने में सफल हो जाती है तो उनका राज्य विषय कानून समाप्त हो जाएगा. उन्होंने बताया कि बीजेपी ने कहा था कि वह धारा 370 हटाएगी लेकिन जब उसे लगा कि वह संसद के जरिए नहीं हटा सकती है तो कोर्ट में चली गई है.

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उमर अब्दुल्ला का BJP पर वार उमर अब्दुल्ला का BJP पर वार

अश्विनी कुमार

  • जम्मू,
  • 14 अगस्त 2017,
  • अपडेटेड 2:12 PM IST

जम्मू-कश्मीर में लगी अनुच्छेद 35ए को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ती जा रही है. राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती इस मुद्दे पर नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारुक अब्दुल्ला और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर चुकी हैं. अब पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस मुद्दे पर बीजेपी पर जमकर हमला बोला है.

सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस के दौरान अब्दुल्ला ने कहा कि बीजेपी इसे हटाने को लेकर प्रोपेगेंडा फैला रही है, जिसके गंभीर परिणाम भुगतना पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि BJP इसका दुष्प्रचार कर रही है. उमर बोले कि अगर बीजेपी कोर्ट के जरिए अनुच्छेद 35ए को खत्म करने में सफल हो जाती है तो उनका राज्य विषय कानून समाप्त हो जाएगा. उन्होंने बताया कि बीजेपी ने कहा था कि वह धारा 370 हटाएगी लेकिन जब उसे लगा कि वह संसद के जरिए नहीं हटा सकती है तो कोर्ट में चली गई है.

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पूर्व सीएम ने कहा कि अगर को इसे बचाने का आश्वासन दिया है तो वह इसे बस कोर्ट में ही बचा सकते हैं. अभी कोर्ट में राज्य सरकार ने इसे बचाने के लिए एफिडेविट दिया है, केंद्र को भी ऐसा ही करना चाहिए. उन्होंने कहा कि हुर्रियत नेताओं को 35ए के मुद्दे पर कुछ भी बोलने का हक नहीं है.

उन्होंने कहा कि अगर बीजेपी 35ए को हटाने में सफल हो जाती है तो राज्य में बाहर के लोग आ जाएंगे. बाहर के लोग यहां पर कैसे रहेंगे, जबकि कश्मीर के लोग ही यहां पर सुरक्षित फील नहीं करते हैं.

बता दें कि सोमवार को इस अनुच्छेद को चुनौती देने वाली एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है. कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई के लिए 5 जजों की एक बेंच बनाई है, ये बेंच 6 हफ्तों में इस मामले की सुनवाई करेगी.

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कोर्ट ने कहा कि बेंच अ की जांच सैंविधानिक रुप से जांच करेगी. और इसके तहत मिलने वाला स्पेशल स्टेटस का दर्जा का भी रिव्यू होगा. वहीं जम्मू-कश्मीर की सरकार ने कोर्ट में कहा है कि 2002 में इस मुद्दे पर हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया था, जिससे यह मामला सेटल हो गया था.

 

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