'अन्ना हजारे से मिलने गई थी मनमोहन सरकार...', वांगचुक के अनशन पर उमर अब्दुल्ला ने BJP को घेरा

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोनम वांगचुक के आमरण अनशन को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की है. उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह सरकार ने अन्ना हजारे से बातचीत की थी, जबकि मौजूदा सरकार वांगचुक के मामले में संवेदनहीन नजर आ रही है.

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सोनम वांगचुक के अनशन पर उमर अब्दुल्ला का केंद्र पर तीखा हमला (Photo-ITG) सोनम वांगचुक के अनशन पर उमर अब्दुल्ला का केंद्र पर तीखा हमला (Photo-ITG)

मीर फरीद

  • श्रीनगर,
  • 17 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:42 AM IST

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने नीट परीक्षा धांधली को लेकर दिल्ली में आमरण अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के प्रति केंद्र सरकार के रवैये की तीखी आलोचना की है. उमर अब्दुल्ला ने इस स्थिति की तुलना कांग्रेस नीत UPA सरकार के समय हुए अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से करते हुए भाजपा पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया है.

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उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत के बावजूद केंद्र सरकार "पूर्ण संवेदनहीनता" दिखा रही है. उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल की याद दिलाई.

उमर अब्दुल्ला ने कहा, "उनकी (सोनम वांगचुक) मांग सिर्फ इतनी है कि नीट घोटाले के पीड़ितों को न्याय मिले और शिक्षा मंत्री को पद से हटाया जाए. याद कीजिए कि कैसे मनमोहन सिंह सरकार और उनके मंत्री अन्ना हजारे से मिलने दौड़े चले गए थे और उनसे अनशन तोड़ने का अनुरोध किया था? यहाँ तो भाजपा सरकार एक बयान जारी करने की भी परवाह नहीं कर रही है. राजनीति अपनी जगह है, लेकिन क्या करुणा और इंसानियत का कोई महत्व नहीं है?"

9 किलो से ज्यादा वजन घटा
लद्दाख के प्रमुख एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 20वें दिन में प्रवेश कर चुके हैं. वे नीट-यूजी परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.

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यह भी पढ़ें: 'सोनम वांगचुक को शिक्षा मंत्री बनाएं', केजरीवाल की मांग, जंतर-मंतर पहुंच किया सपोर्ट

उनकी सेहत की निगरानी कर रहे सीनियर फिजिशियन डॉ. सतीश लांबा के मुताबिक, तीन हफ़्तों से जारी अनशन के कारण वांगचुक का वजन 9 किलोग्राम से ज्यादा घट चुका है.सोनम वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य को देखते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर तुरंत चिकित्सीय हस्तक्षेप की मांग की गई है, ताकि प्रशासन को उनकी उचित देखरेख या जरूरत पड़ने पर जबरन खाना खिलाने (Force-feeding) का निर्देश दिया जा सके.

'अहंकार की लड़ाई न बनाए केंद्र'
इस विरोध प्रदर्शन का आयोजन 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) द्वारा किया जा रहा है. संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी केंद्र सरकार से इसे अहंकार की लड़ाई न बनाने की अपील की है. उन्होंने X पर लिखा कि इंसानी जान दांव पर लगी है और गलती स्वीकार करना कमजोरी नहीं, बल्कि जवाबदेही और परिपक्वता की निशानी है.फिलहाल केंद्र सरकार या शिक्षा मंत्रालय की तरफ से उमर अब्दुल्ला के बयान या वांगचुक के अनशन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

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