डॉक्टर बनने का सपना लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे एक छात्र को सीनियर छात्रों के सामने कैसे पेश आना है, इसके लिए अजीब नियम थमा दिए गए. सीनियर से आंख से आंख मिलाकर बात नहीं करनी है. उन्हें उसी नाम से पुकारना है, जो वे खुद बताएं. उनके सामने व्यवहार कैसा होना चाहिए, यह भी तय कर दिया गया. एमबीबीएस प्रथम वर्ष के एक छात्र ने जब इन बातों की शिकायत कॉलेज प्रशासन से की, तो मामला एंटी रैगिंग कमेटी तक पहुंच गया. अब एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के आधा दर्जन से अधिक छात्र जांच के घेरे में हैं.
मामला हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर स्थित डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल का है. यहां प्रथम वर्ष के एक छात्र ने सीनियर छात्रों पर अभद्र व्यवहार और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है. छात्र ने अपनी परेशानी किसी मौखिक शिकायत के बजाय सीधे ईमेल के जरिए कॉलेज प्रिंसिपल तक पहुंचाई. इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है. शिकायत में सबसे हैरान करने वाली बात सीनियर छात्रों के कथित निर्देश हैं. कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. रमेश भारती के मुताबिक, शिकायत में बताया गया है कि सीनियर छात्रों ने व्यवहार से जुड़े कुछ नियम लिखकर दिए थे. इनमें आंख से आंख नहीं मिलाने और सीनियर को उनके बताए नाम से संबोधित करने जैसी बातें शामिल थीं.
दूसरे राज्य से डॉक्टर बनने आया छात्र, ईमेल में बताई परेशानी
जानकारी के मुताबिक, शिकायत करने वाला छात्र हिमाचल प्रदेश के बाहर का रहने वाला है. उसने एमबीबीएस प्रथम वर्ष में दाखिला लिया है. नए कॉलेज, नए शहर और अलग माहौल में पढ़ाई शुरू करने वाले छात्रों के लिए शुरुआती समय वैसे भी कई चुनौतियों से भरा होता है. मेडिकल की पढ़ाई में लंबे समय तक कक्षाएं, प्रैक्टिकल और परीक्षाओं की तैयारी करनी पड़ती है. ऐसे में यदि किसी छात्र को सीनियर छात्रों के व्यवहार से परेशानी हो, तो उसका असर पढ़ाई और आत्मविश्वास पर भी पड़ सकता है. हमीरपुर मेडिकल कॉलेज के इस छात्र ने आरोप लगाया कि कुछ सीनियर उसके साथ दुर्व्यवहार कर रहे थे और उसे मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा था. उसने अपनी शिकायत ईमेल के जरिए कॉलेज प्रशासन तक पहुंचाई. छात्र की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है. रैगिंग जैसे संवेदनशील मामलों में शिकायतकर्ता की गोपनीयता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है, ताकि जांच के दौरान उस पर किसी तरह का दबाव न पड़े.
ईमेल पहुंचते ही हरकत में आया कॉलेज प्रशासन
मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. रमेश भारती ने बताया कि उन्हें प्राध्यापक मोनिका के माध्यम से शिकायत की जानकारी मिली थी. मोनिका ने बताया कि एक छात्र का ईमेल आया है, जिसमें सीनियर छात्रों के अभद्र व्यवहार की शिकायत की गई है. प्रिंसिपल के अनुसार, शिकायत में सीनियर छात्रों की ओर से व्यवहार के लिए लिखित निर्देश दिए जाने का भी जिक्र था. मामला सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया और एंटी रैगिंग कमेटी को जांच के लिए सक्रिय किया. कमेटी की बैठक में शिकायत से जुड़े अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा की गई. इसके बाद संदेह के दायरे में आए छात्रों को पूछताछ के लिए बुलाया गया.
बंद कमरे में पूछताछ, आधा दर्जन से ज्यादा छात्र जांच के घेरे में
एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के आधा दर्जन से अधिक छात्रों की भूमिका की जांच की जा रही है. एंटी रैगिंग कमेटी ने संबंधित छात्रों को एक-एक करके बुलाया और बंद कमरे में उनसे पूछताछ की. पूछताछ के दौरान छात्रों के बयान भी दर्ज किए गए हैं. कमेटी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि शिकायत में जिन नियमों और व्यवहार का उल्लेख किया गया है, वे किसने तय किए थे और क्या शिकायतकर्ता छात्र के साथ वास्तव में मानसिक प्रताड़ना हुई थी. प्रिंसिपल डॉ. रमेश भारती ने स्पष्ट किया है कि एंटी रैगिंग कमेटी पूरे मामले की पारदर्शिता के साथ जांच कर रही है. अगर जांच रिपोर्ट में कोई छात्र दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. कॉलेज प्रशासन का कहना है कि शिकायत मिलते ही कार्रवाई शुरू कर दी गई थी. संबंधित छात्रों से पूछताछ की जा चुकी है और उनके बयान दर्ज किए गए हैं.
अशोक राणा