हिसार: कोविड हॉस्पिटल का उद्घाटन करने पहुंचे CM खट्टर के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन, लाठीचार्ज में कई जख्मी

हरियाणा के हांसी में सीएम मनोहर लाल खट्टर के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया है. बताया जा रहा है कि इस दौरान कई किसान घायल हुए हैं.

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किसान बैरिकेड तोड़कर आगे निकलने लगे थे. किसान बैरिकेड तोड़कर आगे निकलने लगे थे.

मनजीत सहगल / हिमांशु मिश्रा

  • हिसार,
  • 16 मई 2021,
  • अपडेटेड 10:39 AM IST
  • हरियाणा के हांसी में किसानों पर लाठीचार्ज
  • सीएम के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे किसान

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले किसानों पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया है. इस लाठीचार्ज में कई किसानों के घायल होने की खबर है. घटना हिसार जिले के हांसी की बताई जा रही है. सीएम खट्टर हिसार में एक कोविड अस्पताल का उद्घाटन करने पहुंचे थे. तभी किसानों ने उनके खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया. किसानों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेड भी लगाए थे, जिसे किसानों ने तोड़ दिए. 

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जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर हिसार में एक कोविड अस्पताल का उद्घाटन करने पहुंचे थे. सीएम के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए सैकड़ों की संख्या में किसान जुटे थे. पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग भी कर रखी थी, लेकिन गुस्साए किसान उस बैरिकेडिंग को तोड़कर आगे निकलने लगे. उसके बाद किसानों को खदेड़ने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया. साथ ही आंसू गैस के गोले भी छोड़े. पुलिस की इस कार्रवाई में कई किसानों के घायल होने की खबर है. डीएसपी अभिमन्यु लोहान भी इस झड़प में घायल हुए हैं.

इससे पहले मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पानीपत में गुरु तेग बहादुर संजीवनी अस्पताल का शुभारंभ किया. यहां 500 बेड का कोविड केयर सेंटर तैयार किया गया है. ये देश का पहला कोविड अस्पताल है, जिसे पाइपलाइन से सीधा ऑक्सीजन मिलेगा.

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पिछले 7 महीने से चल रहा है किसान आंदोलन
पिछले साल सितंबर में केंद्र सरकार ने खेती से जुड़े तीन कानून लागू किए थे. इन्हीं तीन कानूनों के खिलाफ किसान पिछले साल 26 नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं. किसान और सरकार के बीच 11 बार बातचीत भी हो चुकी है, लेकिन कोई सहमति नहीं बनी. किसान चाहते हैं कि सरकार तीनों कानूनों को रद्द करे और MSP पर गारंटी का कानून लेकर आए. लेकिन सरकार का कहना है कि वो कानूनों को वापस नहीं ले सकती. अगर किसान चाहते हैं, तो उनके हिसाब से इसमें संशोधन किए जा सकते हैं.

 

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