गुरुग्राम: 'एक रुपये का भी नुकसान नहीं हुआ', प्लॉट आवंटन FIR पर IAS डी. सुरेश की सफाई

हरियाणा के गुरुग्राम प्लॉट आवंटन मामले में डी. सुरेश ने FIR पर सवाल उठाए हैं. उनका दावा है कि सरकार को एक रुपये का भी नुकसान नहीं हुआ, जबकि FIR में करोड़ों के नुकसान का आरोप है.

Advertisement
जमीन विवाद में दर्ज एफआईआर पर बोले डी. सुरेश. (File Photo) जमीन विवाद में दर्ज एफआईआर पर बोले डी. सुरेश. (File Photo)

नीरज वशिष्ठ

  • गुरुग्राम ,
  • 13 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 2:13 PM IST

हरियाणा के गुरुग्राम में प्लॉट आवंटन को लेकर दर्ज एफआईआर पर IAS डी. सुरेश ने खुलकर अपना पक्ष रखा है. आज तक से एक्सक्लूसिव बातचीत में उन्होंने कहा कि 'इस मामले में सरकारी खजाने को एक रुपये का भी नुकसान नहीं हुआ'. उनके मुताबिक उन्होंने सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत अपनी राय दर्ज की थी, किसी को अपनी मर्जी से प्लॉट नहीं दिया.

Advertisement

पूरे विवाद पर डी. सुरेश ने कहा कि कमेटी के सामने आए एक पुराने मामले में नियम-कायदे देखकर सिर्फ अपनी राय दर्ज की गई थी. किसी फाइल पर अधिकारी की राय देना प्रशासनिक काम का हिस्सा है. इसे घोटाला बताकर पेश करना गलत है. उनका कहना है कि जब सरकार को कोई आर्थिक नुकसान हुआ ही नहीं, तब इसे आपराधिक मामला बनाना समझ से परे है.

एफआईआर की बुनियाद पर सवाल उठाते हुए डी. सुरेश ने कहा कि सात साल पुराने मामले में इस तरह केस दर्ज करना सवाल खड़े करता है. उनके मुताबिक जिस अधिकारी ने इस मामले की जांच की थी, उनकी नियुक्ति को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट पहले ही रद्द कर चुका है. ऐसे में उनकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई करना सही नहीं है. डी. सुरेश ने यह भी कहा कि सेवा के दौरान दिए गए अर्द्ध-न्यायिक आदेशों को कानूनी संरक्षण मिला होता है, जिसे इस मामले में नजरअंदाज किया गया.

Advertisement

'चुनिंदा तरीके से निशाना बनाना ठीक नहीं'

वाई. पूरन कुमार से जुड़े अपने पुराने बयान पर भी डी. सुरेश ने सफाई दी. उनका कहना है कि उन्होंने कभी राज्य सरकार या उसकी नीतियों की आलोचना नहीं की. उनकी आपत्ति चंडीगढ़ प्रशासन के कुछ अधिकारियों के रवैये को लेकर थी. उनका कहना है कि कानून सभी के लिए बराबर होना चाहिए और किसी अधिकारी को चुनकर निशाना बनाना ठीक नहीं है. डी. सुरेश के मुताबिक प्लॉट आवंटन का मामला अभी सक्षम प्राधिकरण और अदालत के सामने लंबित है. इसके बावजूद मामले को लेकर गलत धारणा बनाई जा रही है.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने डी. सुरेश के 31 अगस्त को रिटायर होने से पांच दिन पहले 26 अगस्त को एफआईआर दर्ज की थी. मामला गुरुग्राम के सेक्टर-23 में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP/हुडा) के 500 गज के एक प्लॉट से जुड़ा है. एफआईआर के मुताबिक इस प्लॉट की बाजार कीमत करीब 3.5 करोड़ रुपये थी, जबकि कलेक्टर रेट करीब 1.75 करोड़ रुपये था. आरोप है कि इसका मालिकाना हक महज 6.71 लाख रुपये में देने की प्रक्रिया पूरी की गई.

यह प्लॉट 1988 में आवंटित हुआ था. बकाया भुगतान नहीं होने पर HSVP ने इसे 2002 में जब्त कर लिया था. करीब सात साल चली विजिलेंस जांच में आरोप लगाया गया कि दूसरे प्लॉट को बहाल करने से जुड़े अदालत के आदेश का सहारा लेकर नोटशीट तैयार की गई. एफआईआर के मुताबिक मार्च 2019 में जब्ती रद्द की गई, जिसके बाद कन्वेयंस डीड कराई गई. इस मामले में तत्कालीन संपदा अधिकारी मुकेश कुमार समेत कुल नौ लोगों को आरोपी बनाया गया है. मामले की जांच अभी जारी है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »