गुजरात के अमरेली में 12 साल पुराने एक गुमशुदगी के मामले को पुलिस ने तकनीकी जांच और सोशल मीडिया के जरिए सुलझा लिया. साल 2014 में अमरेली तालुका पुलिस स्टेशन में 13 साल की नाबालिग लड़की के गायब होने का मामला दर्ज हुआ था. मामले में अपहरण और POCSO एक्ट के तहत गंभीर धाराएं लगाई गई थीं. कई साल बीत गए और इस दौरान 10 से ज्यादा पुलिस इंस्पेक्टर बदल गए, लेकिन लड़की का कोई पता नहीं चल पाया. हाल ही में एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट ने इस पुराने मामले को दोबारा उठाया. पुलिस ने पुराने दस्तावेजों के साथ तकनीकी स्रोतों के आधार पर जांच शुरू की. उस समय पुलिस के पास लड़की की पुरानी फोटो, डेट ऑफ बर्थ और उसके परिवार से जुड़ी जानकारी ही मुख्य आधार थी.
पुलिस ने लड़की को तलाशने के लिए महिला कर्मचारियों की एक टीम बनाई. टीम ने लड़की की जन्म तिथि को आधार बनाकर इंस्टाग्राम और फेसबुक के 1500 से ज्यादा अकाउंट की जांच की. इस दौरान पुलिस को एक संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट मिला. इस अकाउंट पर लड़की की जन्म तिथि वाले दिन ही हैप्पी बर्थडे का पोस्ट मिला. पुलिस को यह पोस्ट महत्वपूर्ण सुराग लगा. टीम ने इस अकाउंट की तस्वीरों और दूसरी जानकारियों को खंगालना शुरू किया.
रिक्शा से RTO और फिर बैंक खाते तक पहुंची पुलिस
एक तस्वीर में पीछे एक रिक्शा दिखाई दिया. पुलिस ने इस रिक्शा को आगे की जांच का आधार बनाया. पुलिस ने रिक्शा की पहचान करने के लिए RTO से संपर्क किया. रिक्शे के नंबर के आधार पर उसके मालिक का मोबाइल नंबर हासिल किया गया. मोबाइल नंबर की जांच करने पर पुलिस को पता चला कि इसी नंबर का इस्तेमाल गुजरात ग्रामीण बैंक में एक खाता खुलवाने के लिए किया गया था.
फिर बैंक खाते की जानकारी पुलिस के लिए एक और बड़ा सुराग बनी. खाते में पहचान के लिए वही पुरानी फोटो लगाई गई थी, जो लड़की के गायब होने के समय पुलिस के पास मौजूद थी. फोटो का मिलान होने के बाद पुलिस का शक और मजबूत हो गया. हालांकि, अब भी पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती युवती और उसके साथ रहने वाले आरोपी का सही पता लगाना था.
मोरबी के गांव तक पहुंची पुलिस
बैंक से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस टीम मोरबी जिले के हलवद तालुका के भलगामडा गांव पहुंची. पुलिस को आशंका थी कि युवती इसी इलाके में रह रही है. स्थानीय लोगों को शक न हो और युवती की पहचान सामने न आए, इसके लिए पुलिसकर्मियों ने जनगणना करने वाले शिक्षक स्टाफ का रूप अपनाया. पुलिस टीम ने गांव की गलियों में जाकर घरों की जानकारी जुटानी शुरू की. करीब 5 से 7 घरों की जांच के बाद टीम एक संदिग्ध घर तक पहुंची. वहां एक युवती मौजूद थी, लेकिन उसने अपना नाम कुछ और बताया.
पुलिस ने उसकी पहचान की पुष्टि करने के लिए उससे उसके मायके और पिता का नाम पूछा. पुलिस ने उससे कहा कि अगर उसका रजिस्ट्रेशन मायके में हो गया होगा तो उसे यहां सरकारी लाभ नहीं मिल पाएंगे, इसलिए पिता का नाम बताना जरूरी है. युवती ने जैसे ही अपने पिता का सही नाम बताया, वह नाम 2014 में दर्ज गुमशुदगी की शिकायत में मौजूद नाम से मैच हो गया. इसके बाद पुलिस ने पुष्टि कर दी कि यही 12 साल पहले गायब हुई लड़की है.
जनगणना के बहाने आरोपी को भी पकड़ा
पुलिस को जांच के दौरान पता चला कि युवती के साथ रहने वाला युवक रिक्शा चलाने गया हुआ था. पुलिस ने उसे भी जनगणना के बहाने घर बुलाया. उसके घर पहुंचते ही पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया. पुलिस जांच में सामने आया कि साल 2014 में नाबालिग की अपनी मां से अनबन हुई थी. इसके बाद वह गुस्से में घर से निकल गई थी. वह राजकोट बस स्टैंड पर करीब दो से तीन दिन रही. वहां एक शख्स ने उसकी देखभाल की. इसके बाद वह आरोपी के संपर्क में आई. पुलिस के मुताबिक, बाद में उस व्यक्ति ने दोनों की सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुसार शादी करवा दी.
12 साल बाद बदली जिंदगी
जिस लड़की को परिवार ने 2014 में खो दिया था, वह 12 साल बाद 26 साल की युवती के रूप में मिली. इस दौरान उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल चुकी थी. पुलिस के मुताबिक, अब वह अपने परिवार के साथ रह रही है और चार बच्चों की मां है. पुराने मामले में पुलिस ने युवती के मौजूदा पति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की है और उसे जेल भेज दिया गया है. इस तरह 12 साल से अनसुलझा मामला सोशल मीडिया की एक हैप्पी बर्थडे पोस्ट से मिले सुराग के जरिए सुलझ गया.
ब्रिजेश दोशी