तिहाड़ जेल में केन्द्रीय मंत्री महेश शर्मा ने किया आर्ट स्कूल का उद्घाटन

तिहाड़ जेल में तमाम खूंखार कैदी भी रहते हैं मगर कई कैदी ऐसे भी है जो अंडरट्रायल हैं. तिहाड़ के डीजी सुधीर यादव का मानना है की जेल में हम कैदियों को एक अच्छा आचरण देना चाहते हैं. इन्हें कला से जोड़ना चाहते हैं. जब कोई भी शख्स कला से जुड़ता है तो उसकी जिंदगी में इसका अलग प्रभाव पड़ता है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

शुभम गुप्ता

  • नई दिल्ली,
  • 24 अगस्त 2017,
  • अपडेटेड 4:34 AM IST

दिल्ली में तिहाड़ जेल के कैदियों के लिए बुधवार को एक आर्ट स्कूल का उद्घाटन किया गया. इस आर्ट स्कूल का उद्घाटन कला और संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने किया. इसे लेकर तिहाड़ जेल के कैदियों में एक अलग उत्साह देखने को मिला.

आपको बता दें कि तिहाड़ जेल में तमाम खूंखार कैदी भी रहते हैं मगर कई कैदी ऐसे भी है जो अंडरट्रायल हैं. तिहाड़ के डीजी सुधीर यादव का मानना है की जेल में हम कैदियों को एक अच्छा आचरण देना चाहते हैं. इन्हें कला से जोड़ना चाहते हैं. जब कोई भी शख्स कला से जुड़ता है तो उसकी जिंदगी में इसका अलग प्रभाव पड़ता है. इसी के चलते आज तिहाड़ जेल में तिहाड़ स्कूल ऑफ आर्ट का उद्घाटन किया गया. इस मौके पर केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा सहित उत्तर प्रदेश सरकार में जेल मंत्री जय कुमार जैकी भी मौजूद थे.

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केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा का कहना था कि ये इन कैदियों के लिए बहुत अच्छा प्रयास है, कोई पेंटिंग कर रहा है. हमने देखा ये सब, कोई भी जानकर मुजरिम नहीं बनता, ऐसे में ये यहां के अधिकारियों की अच्छी कोशिश है.

इस आर्ट स्कूल के तिहाड़ जेल में खुलने में ललित कला अकादमी का बहुत बड़ा योगदान है . इस अकादमी से ही कई कलाकारों ने यहां चल रहे कला अभियान में हिस्सा लिया. इस अकादमी के कृष्णा सेट्टी का भी अहम योगदान रहा. साथ ही इन कैदियों की टीचर डा. सुषमा यादव इन लोगों के लिये भगवान बन कर आईं. करीब 16  देश के बड़े कलाकारों ने तिहाड़ जेल में पेंटिंग बनाईं. मगर यहां सभी का ध्यान जेल में सजा काट रहे इन कैदियों की पेंटिंग पर था. कोई भी विश्वास नहीं कर पा रहा था की ये पेंटिंग इन कैदियों ने बनाई हैं.

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19  अगस्त से लेकर 31 अगस्त तक तिहाड़ जेल में चलने वाले इस कला अभियान में देश के अलग-अलग जेलों से करीब 100  कैदियों ने हिस्सा लिया. साथ ही यहां कैदियों ने डांस से लेकर गाने तक ऐसी मनमोहक प्रस्तुति पेश की, की हर कोई देखता ही रह गया. यहां तक की तमाम अतिथि भी यकीन नहीं कर पाए की ये पेशकश कैदी कर रहे हैं.

ये पहली दफा है जब में इतने बड़े स्तर पर कोई कार्यक्रम किया गया हो. यहां सबसे खास बात यही रही कि इस कार्यक्रम में दर्शक और कोई नहीं बल्कि इन ही थे. कोई अपने बेटे को देख कर खुश था तो कोई अपने पति को देख कर. मगर इन परिवारों से लेकर मंत्रियों तक हर किसी ने इसका श्रेय डीजी सुधीर यादव को दिया.

का कहना था कि ये हमारी पहल है, उम्मीद है सबको नया जीवन मिलेगा. कुल मिलाकर ये एक प्रयास है कि कैदी कला के माध्यम से अपने जीवन में एक नया सुधार ला सके.

 

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