'इलाज के नाम पर दीदी जीबी रोड लेकर पहुंच गई', महिला ने बताया- कैसे बनी सेक्स वर्कर

दिल्ली का जीबी रोड. इस बदनाम इलाके से निकलकर सम्मान का जीवन जी रही महिलाओं ने अपने सेक्स वर्कर बनने की कहानी बयान की है. किसी को इलाज के नाम पर जीबी रोड पहुंचा दिया गया तो किसी को नौकरी का झांसा देकर किसी महिला ने ही बेच दिया. जीबी रोड पहुंचने के बाद उन पर कैसे-कैसे जुल्म किए गए? कैसे ये महिलाएं जीबी रोड से निकल पाईं?

Advertisement
जीबी रोड से निकली महिलाओं ने सुनाई आपबीती (प्रतीकात्मक तस्वीर) जीबी रोड से निकली महिलाओं ने सुनाई आपबीती (प्रतीकात्मक तस्वीर)

मनीष चौरसिया

  • नई दिल्ली,
  • 31 अगस्त 2022,
  • अपडेटेड 10:13 PM IST

मजबूरियां ऐसी थीं कि जिंदगी ने इन्हें जिंदगी के बारे में सोचने का कभी मौका ही नहीं दिया. किसी को धोखे से, किसी को जबरदस्ती तो किसी को पैसे के लालच में किसी अपने ने ही बेच दिया और इसके बाद इन्हें धकेल दिया गया जिस्म फरोशी के धंधे में. सेक्स वर्कर्स की तरह जीवन काटती महिलाएं कभी सोच भी नहीं सकती थीं कि वे अपना मनचाहा काम भी कर सकेंगी.
 
जीबी रोड की बदनाम गली से निकलकर अब कई सेक्स वर्कर्स इज्जत की जिंदगी बसर कर रही हैं. कुछ महिलाओं ने बात की और अपने देह धंधे में पहुंचने से लेकर वहां से निकलने के बाद तक की दास्तान बयान की. एक महिला ने बताया कि उसे नौकरी का झांसा देकर एक महिला ही जीबी रोड ले गई थी. उसने बताया कि वहां औरतों का मेकअप देखकर ही मुझे अजीब लगा.

Advertisement

महिला के मुताबिक जब उसने ये काम करने से मना किया तो मारपीट की जाती, कमरे में बंद रखा जाता. खाना भी नहीं देते थे. देते भी थे तो कैदी की तरह. महिला ने बताया कि 25 से 30 साल यूं ही बीत गए. अब आजाद हूं. जो मन आता है, खाती-पीती हूं. जिससे मन होता है, बात करती हूं. अहमदाबाद गई और वहां से कढ़ाई और सिलाई सीखी. मैं चाहती हूं कि जीबी रोड की और महिलाएं भी यहां आ जाएं.

अपनी बेटी को पाने के लिए लड़ना पड़ा केस  

एक अन्य महिला ने बताया कि इलाज के नाम पर एक दीदी उसे जीबी रोड लेकर पहुंच गई. 15 साल की उम्र में मुझे जिसे बेचा गया, वह किसी और को बेच रही थी. महिला बताती है कि मारपीट के बाद मुझे मजबूरन इस धंधे में आना पड़ा. उन्होंने आगे बताया कि जब मैंने काम छोड़ने का मन बनाया तो उन लोगों ने मेरी बेटी को मुझे सौंपने से मना कर दिया.

Advertisement

वह बताती हैं कि अपनी ही बेटी को वापस लेने के लिए भी मुझे केस लड़ना पड़ा. महिला के मुताबिक केस लड़ने में दो से ढाई लाख रुपये खर्च हो गए. वह आगे कहती हैं कि जबसे वह काम छोड़कर यहां आ गई हूं, मेरी जिंदगी बदल गई है. पहले मेरी बेटी मुझसे बात नहीं करती थी. अब, जब मैंने ये काम छोड़ दिया है तो बेटी भी बात करने लगी है.

गीतांजलि बब्बर ने जीबी रोड से निकाला

जीबी रोड से महिलाओं को निकालने का कठिन कार्य संभव किया गीतांजलि बब्बर ने. सेक्स वर्कर्स के जीवन में उजाला लाने का माध्यम बनीं 'कठ कथा' नाम से संस्था चलाने वाली गीतांजलि बब्बर. जीबी रोड से निकलकर आज कोई सेक्स वर्कर सिलाई कर अपने पसंद के डिजाइनर कपड़े तैयार कर रही है तो कोई अपनी आजादी का उत्सव गैस पर कुकिंग कर मना रही है.

गीतांजलि बब्बर

गीतंजलि बताती हैं कि पहले वो एक एनजीओ के साथ सेक्स वर्कर्स के लिए काम करती थीं लेकिन फिर उन्हें एहसास हुआ कि इनकी जरूरतें बहुत अधिक हैं. वे अपनी इस मुहिम की चुनौतियां भी बताती हैं और साथ ही सेक्स वर्कर्स की जिंदगी में बदलाव लाने की जिद के सारथी बने लोगों की दास्तान भी. उन्होंने कहा कि कई सेक्स वर्कर्स अपने बच्चों को पढ़ाना चाहती थीं. कई खुद पढ़ना चाहती थीं. कई इस दलदल से निकलना चाहती थीं लेकिन उन सबको इसके लिए रास्ता दिखाने वाला कोई नहीं था.

Advertisement

गीतांजलि के सामने आईं कौन सी चुनौतियां

गीतांजलि बब्बर ने कहा कि इस कठिन मुहिम में मुझे पीरामल फाउंडेशन का साथ मिला और फिर ये ठान लिया कि सेक्स वर्कर्स को बेहतर जिंदगी देंगे. हम सेक्स वर्कर्स को इस दलदल से निकालेंगे. गीतांजलि ने कहा कि कई बार उन्हें भी खतरनाक परिस्थितियों का सामना करना पड़ा. वो एक किस्सा याद करते हुए कहती हैं कि कैसे जब वो एक कोठे में लोगों से बात कर रही थी तब एक बुजूर्ग ने उनका हाथ पकड़कर खींचना शुरु कर दिया. बहुत समझाने के बाद भी वो मानने को तैयार नहीं था फिर उन्हें उस कोठे की मालकिन ने ही बचाया था और उस दिन वो बहुत डर गई थीं. गीतांजलि का दावा है कि वे अब तक 25 महिलाओं और 55 बच्चों को जीबी रोड से निकालकर बाहर ला चुकी हैं.

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »