रविदास मंदिर तोड़े जाने विवाद में बोले मनोज तिवारी- मंदिर वहीं बनेगा

दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी भी कूद गए हैं साथ ही मनोज तिवारी ने बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि जहां रवि दास जी का मंदिर था मंदिर वहीं बनेगा. बीजेपी चाहे कोर्ट जाना पड़े  या फिर सरकार को इसको लेकर कोई फैसला लेना हो, संत रविदास जी का मंदिर वहीं बनवाएंगे.

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मनोज तिवारी (फाइल फोटो) मनोज तिवारी (फाइल फोटो)

रोहित मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 24 अगस्त 2019,
  • अपडेटेड 12:29 AM IST

भारत के महान संतों में गिने जाने वाले रैदास कहा करते थे- 'मन चंगा तो कठौती में गंगा'. यानी मन साफ है तो पुण्य कमाने के लिए गंगा स्नान के लिए गंगा नदी तक जाने की कोई जरूरत नहीं. लेकिन बात जब मंदिर की आती है, तो नजरिया भी सियासी हो जाता है. क्योंकि सियासत की दुनिया में ये कहावत बदल कर- मंदिर वहीं बनाएंगे- का रूप ले लेती है. देश की राजधानी में पिछले 12 दिनों में रविदास मंदिर को तोड़ने के बाद से जो कुछ हुआ, उसके राजनीतिक पहलू को भी देखने और समझने की जरूरत है.

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दक्षिण दिल्ली में संत रविदास का एक मंदिर गिराए जाने के बाद खिलाफ दलितों में आक्रोश है. इस मुद्दे पर सियासत भी शुरू हो चुकी है. दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने गुरुवार (22 अगस्त) को फैसला किया कि जहां मंदिर तोड़ा गया, वहां भव्य मंदिर बनाया जाएगा. दिल्ली विधानसभा ने इसके लिए प्रस्ताव भी पारित कर दिया है. जहां इस मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी और बीजेपी सामने है. जहां केजरीवाल सरकार ने इसके लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया तो ही अम्बेडकरनगर से ही आम आदमी पार्टी के विधायक अजय दत्त ने अपने तक कपड़े फाड़ लिया.

तो वहीं बीजेपी आदमी पार्टी पर आरोप लगा रही है. अब इस मुद्दे को दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी भी कूद गए हैं. साथ ही मनोज तिवारी ने बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा, 'जहां रवि दास जी का मंदिर था मंदिर वहीं बनेगा. बीजेपी को चाहे कोर्ट जाना पड़े या फिर सरकार को इसको लेकर कोई फैसला लेना हो, संत रविदास जी का मंदिर वहीं बनवाएंगे.'

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आगे मनोज तिवारी ने कहा, 'जहां मंदिर था वहीं बनेगा. बीजेपी किसी भी हालत में इसका रास्ता निकलेगी और मंदिर वहीं बनेगा. ये मामला कोर्ट में था, जब फैसला आया था, ये हमारे संज्ञान में नहीं था, नहीं जो लोग कोर्ट गए थे, उन्होंने हमें बताया, नहीं तो ऐसा हो सकता था कि बीजेपी के शासन में मंदिर टूट जाए.'

जब हम लोग को जैसे ही इसकी जानकारी मिली, हम लोग तुरंत मंत्री हरदीप पुरी से मिले थे. मनोज तिवारी यही नहीं रुके, उन्होंने दिल्ली केजरीवाल सरकार पर हमला करते हुए कहा,  'दिल्ली में पता नहीं चलता कि सरकार कौन चला रहा है. जब इतनी बड़ी घटना होने जा रही थी तो दिल्ली सरकार के एसडीएम, पटवारी और लेखपाल क्या कर रहे थे?'

दिल्ली में अगले ही साल विधानसभा का चुनाव है. जहां बीजेपी दिल्ली कि सत्ता से 22 साल से दूर है वहीं दलित जनसंख्या की बात करें तो दिल्ली में 70 में से 12 सीट सुरक्षित है जहां दलित समाज ही फैसला करता है कि आखिर कौन जीतेगा और 2011 जनगणना के मुताबिक दिल्ली में दलित और जाटव की आबादी करीब 28 लाख के करीब है जिसको लेकर आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच तलवारे खीची हुई है

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आज तक की टीम ने भी गोविंदपुरी के इलाकों में दलित समाज और जाटव समाज से मिली.  दलितों में रवि दास मंदिर को तोड़े जाने को लेकर जबरदस्त गुस्सा दिखा. जैसे ही हमलोगों ने गोविंदपुरी में रवि दास मंदिर को तोड़े जाने की बात कही, काफी संख्या में दलित समाज के लोग जुट गए उन्होंने केंद्र सरकार के खिलाफ नारे भी लगाए.

गोविंदपुरी के रवि दास मंदिर के प्रधान डॉक्टर नरेश कल्पी ने कहा, 'जो भी हुआ बहुत गलत हुआ. ये मंदिर काफी पुराना था, जब ये मंदिर बना था तो उस समय तो डीडीए भी नहीं था, इस जमीन को सिकंदर लोधी ने सौंपा था लेकिन अब डीडीए अपना अधिकार बता रही है. दलित समाज इस मुद्दे को छोड़ने वाला नहीं है.'

तो वहीं रवि दास मंदिर के पूर्व प्रधान बनारसी दास ने कहा, 'इसके लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार है. कई पार्कों में लोगों ने मंदिर और सरकारी जमीनों पर मस्जिद बनी हुई है लेकिन उनको गिराने की कोई बात नहीं करता है लेकिन हमारे पूज्य संत रवि दास जी मंदिर को तोड़ा गया, हमारा ये विरोध जारी रहेगा.'

तो वहीं दलित समाज से डॉक्टर शिव राम ने कहा, 'जैसे मंदिर तोड़ी गई है वो मंदिर वहीं बनना चाहिए ये हमारे आस्था का विषय है. काफी संख्या में दलित समाज के पुरुष हो या फिर महिलाओं में इसको लेकर जबरदस्त गुस्सा था.'

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जिसके बाद आजतक की टीम ने तुगलकाबाद के उसे जगह भी गए जहां रवि दास जी का मंदिर था. जहां दिल्ली के अलग-अलग इलाकों से दलित समाज के लोग बाहर ही पूजा करने पहुंच रहे थे.

जिस जगह पर ये मंदिर था उससे रवि दास मार्ग कहा जाता है. मंदिर जाने के रास्ते को दीवार से ढक दिया है और पुलिस का जबरदस्त पहरा है. जब मंदिर के बारे में लोगों से पूछा गया तो उन्होंने बताया, 'ये मंदिर ज्यादा बड़ा था और नहीं छोटा, ये काफी पुराना मंदिर था. मंदिर के पास ही एक तालाब था जहां लोग स्नान करते थे. साथ ही एक आस्था भी जुड़ी हुई है कि तालाब के पास की मिट्टी को लोग अपने साथ ले जाते थे. लोगों का मानना था कि जिसको भी चर्म रोग है वो व्यक्ति अगर तालाब के पास मिट्टी को शरीर पर लगाने से चर्म रोग खत्म हो जाता है.'

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर डीडीए ने रविदास मंदिर तोड़े जाने के विरोध में दलित समुदाय के लोगों ने दिल्ली में जमकर प्रदर्शन और तोड़फोड़ की. बुधवार रात होते-होते मामला इतना गंभीर हो गया कि जहां मंदिर तोड़ा गया था वहां प्रदर्शनकारी तुगलकाबाद के उस इलाके में घुसने की कोशिश करने लगे. उसके चारों ओर बनी दीवार को भी उन्होंने तोड़ने की कोशिश की. लोगों ने पुलिस पर पथराव किया और डंडे बरसाए. इस मामले में गोविंदपुरी थाना पुलिस ने भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर समेत करीब 80 लोगों को हिरासत में ले लिया, जिन्हें बुधवार देर रात गिरफ्तार करने की बात कही गई.

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