मार्शल आर्ट्स ट्रेनर था, बच्चे का किया था कत्ल... 31 साल बाद गिरफ्तार यूट्यूबर सलीम वास्तिक की कहानी

वो खुद को कई साल से सोशल मीडिया पर एक्स-मुस्लिम एक्टिविस्ट सलीम वास्तिक बताता था. यूट्यूबर पर वीडियो बनाता था. लेकिन असलियत में वो एक पुराने जघन्य हत्या के केस का फरार मुजरिम निकला. सलीम वास्तिक उर्फ सलीम अहमद ने अपनी पहचान एक्स-मुस्लिम यूट्यूबर के तौर पर बना ली थी. उसे 31 साल पुराने अपहरण और हत्या के मामले में अरेस्ट किया गया है. उसने दिल्ली के एक बिजनेसमैन के 13 साल के बच्चे का कत्ल किया था.

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मृतक बच्चे के स्कूल में मार्शल आर्ट ट्रेनर था सलीम. (Photo: ITG) मृतक बच्चे के स्कूल में मार्शल आर्ट ट्रेनर था सलीम. (Photo: ITG)

अरविंद ओझा / मयंक गौड़

  • नई दिल्ली/गाजियाबाद,
  • 25 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 1:28 PM IST

दिल्ली की गलियों में 31 साल पुराना एक खौफनाक केस फिर सुर्खियों में है. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने लंबे समय से फरार चल रहे कुख्यात अपराधी सलीम वास्तिक उर्फ सलीम अहमद को गिरफ्तार किया है. सलीम ने दिल्ली के एक कारोबारी के बेटे का साल 1995 में किडनैप किया था, फिर हत्या कर दी थी. सलीम उसी बच्चे के स्कूल में मार्शल आर्ट्स सिखाता था. इतने सालों में वह यूट्यूबर और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट बनकर अपनी पहचान छुपाता रहा, लेकिन अब अरेस्ट हो चुका है.

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यह कहानी शुरू होती है 20 जनवरी 1995 से, जब दिल्ली के एक बिजनेसमैन का 13 साल का बेटा संदीप बंसल रोज की तरह स्कूल के लिए घर से निकला था, लेकिन वह कभी वापस नहीं लौटा. परिवार ने जब तलाश शुरू की तो कुछ ही घंटों बाद उन्हें एक धमकी भरा फोन आया. फोन करने वाले ने बच्चे की सुरक्षित रिहाई के बदले 30 हजार रुपये की फिरौती मांगी. धमकी साफ थी- अगर पुलिस को बताया गया तो बच्चे की जान ले ली जाएगी.

परिवार दहशत में था, लेकिन पुलिस भी जांच में जुट चुकी थी. कुछ ही समय बाद जांच में एक ऐसा सच सामने आया जिसने सभी को झकझोर दिया. अपहरण के बाद बच्चे की हत्या कर दी गई थी. उसका शव दिल्ली के मुस्तफाबाद इलाके के एक नाले से बरामद हुआ.

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जांच में पुलिस को संदेह सलीम खान पर गया, जो उस समय एक स्कूल में मार्शल आर्ट्स सिखाता था. पुलिस ने जब उससे पूछताछ की तो मामला और गहराता गया. पूछताछ के दौरान उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया और अपने साथी अनिल का नाम भी उजागर किया. दोनों ने मिलकर पैसों के लालच में इस अपहरण और हत्या की वारदात को अंजाम दिया था.

साल 1997 में कोर्ट ने सलीम खान और उसके साथी अनिल को उम्रकैद की सजा सुनाई. इसके बाद साल 2000 में दिल्ली हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई. फिर सलीम कोर्ट में पेश नहीं हुआ और फरार हो गया. इसके बाद वह कानून की नजरों से बचने के लिए गायब हो गया.

यह भी पढ़ें: यूट्यूबर सलीम वास्तिक पर हमले का आरोपी जीशान पुलिस मुठभेड़ में ढेर, ADG ने बताया- कैसे हुआ एनकाउंटर

पुलिस को चकमा देने के लिए सलीम ने खुद को मृत घोषित करवा दिया. इसके बाद उसने अपनी पहचान पूरी तरह बदल ली और सलीम अहमद, फिर बाद में सलीम वास्तिक के नाम से रहने लगा. वह हरियाणा और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों में छिपता रहा और लगातार अपनी लोकेशन बदलता रहा, ताकि कोई उसे पकड़ न सके.

आखिरकार वह गाजियाबाद के लोनी इलाके में बस गया. यहां उसने महिलाओं के कपड़ों की दुकान खोल ली और सामान्य जीवन जीने का नाटक करने लगा. आसपास के लोगों को कभी अंदाजा भी नहीं था कि यह शख्स एक पुराने सनसनीखेज मर्डर केस का फरार मुजरिम है.

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फरारी के दौरान सलीम ने एक और पहचान बनाई. वह सोशल मीडिया पर खुद को यूट्यूबर और सामाजिक एक्टिविस्ट के रूप में पेश करने लगा. उसके वीडियो और बयानों के कारण वह चर्चा में भी रहता था. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को एक गुप्त सूचना मिली कि एक यूट्यूबर जिसकी ऑनलाइन पहचान सलीम वास्तिक है, वह असल में 1995 के एक पुराने मर्डर केस का फरार अपराधी हो सकता है.

इसके बाद पुलिस ने पुराने रिकॉर्ड, फोटो और फिंगरप्रिंट का मिलान शुरू किया. जांच में शक यकीन में बदल गया और पहचान पूरी तरह कन्फर्म हो गई. इंस्पेक्टर रॉबिन त्यागी के नेतृत्व में एक टीम बनाई गई और लोनी में छापेमारी की गई. वहीं से सलीम को गिरफ्तार कर लिया गया. गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि फरार होने के बाद उसने अलग-अलग जगहों पर काम किया और अपनी पहचान बदलता रहा. उसने बताया कि वह लंबे समय तक पुलिस से बचने के लिए हर संभव तरीका अपनाता रहा.

फिल्म और हमले का कनेक्शन

चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई कि हाल ही में एक फिल्म प्रोड्यूसर ने उसकी जिंदगी पर फिल्म बनाने के लिए उसे 15 लाख रुपये का एडवांस भी दिया था. इसके अलावा फरवरी 2026 में उस पर लोनी में हमला भी हुआ था, जिसमें उसे गंभीर चोटें आई थीं. उस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को एनकाउंटर में मार गिराया था. फिलहाल सलीम को गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया गया है. दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह गिरफ्तारी साबित करती है कि कानून से कोई भी अपराधी हमेशा नहीं बच सकता, चाहे वह कितनी भी चालाकी क्यों न कर ले.

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