'मुझे और बहन को एक अंकल परेशान करते हैं...', निर्भीक कंप्लेंट बॉक्स से मिला बच्ची का लेटर

दिल्ली पुलिस ने पिछले साल द्वारका में 400 स्कूल में कंप्लेंट बॉक्स लगाए थे. इसका मकसद था, अगर किसी बच्चे को कोई समस्या हो तो वो उसको लिखकर बॉक्स में डाल सकता है. हाल ही में इस बॉक्स का फायदा भी हुआ. जब इसमें 12 साल की एक बच्ची की शिकायत मिली.

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बॉक्स से मिला बच्ची का लेटर. बॉक्स से मिला बच्ची का लेटर.

मनीष चौरसिया

  • नई दिल्ली,
  • 18 मई 2023,
  • अपडेटेड 3:20 PM IST

दिल्ली पुलिस की एक शानदार मुहिम आजकल शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है. पुलिस ने 'निर्भीक स्कीम' को और आगे बढ़ाते हुए पिछले साल द्वारका में 400 स्कूल में कंप्लेंट बॉक्स लगाए थे. इसका मकसद था, अगर किसी बच्चे को कोई समस्या हो तो वो उसको लिखकर बॉक्स में डाल सकता है. कई बार बच्चों के साथ ऐसी प्रॉब्लम होती हैं, जिनका जिक्र वो न तो अपने घर में कर पाते हैं और न ही स्कूल में. पुलिस स्टेशन जाना बच्चों के लिए बहुत आसान नहीं होता. ऐसे में ये कंप्लेंट बाक्स उनके काम आते हैं.

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'दिल्ली पुलिस, मुझे और बहन को एक अंकल रास्ते में परेशान करते हैं'

हाल ही में इस निर्भीक कंप्लेंट बॉक्स का फायदा भी हुआ. जब 12 साल की एक बच्ची की शिकायत इस बॉक्स में मिली. पुलिस के मुताबिक, 9 मई को जब छावला इलाके के एक स्कूल के शिकायत बॉक्स को खोला गया तो उसमें 12 साल की एक बच्ची का शिकायत पत्र मिला. इस बॉक्स को सिर्फ महिला सिपाही ही खोलती हैं. 

इस शिकायत में बच्ची ने लिखा था कि अजय नाम के शख्स ने उसके और उसकी 14 साल की बहन के साथ छेड़छाड़ की. इसके बाद पुलिस ने स्कूल के जरिए बच्ची से संपर्क किया और उसकी काउंसलिंग कराई. फिर पुलिस ने छावला थाने में केस दर्ज किया और जांच शुरू की. पुलिस ने छावला के उस इलाके के आसपास ट्रैप लगाया, जहां बच्ची ने छेड़खानी होने की शिकायत बताई थी. इसके बाद ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया.
 
'400 बॉक्स, डेडीकेटेड टीम'

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फिलहाल, पुलिस ने जिले के स्कूलों में करीब 400 बॉक्स लगाए हैं. द्वारका डीसीपी एम. हर्षवर्धन बताते हैं कि इस काम के लिए अलग से एक डेडीकेटेड टीम बनाई गई है. ये टीम लोकल थाने के लेवल की होती है. इसके अलावा डीसीपी ऑफिस की भी एक टीम है जो हर हफ्ते बाक्स चेक करने के लिए जाती है.

'लड़कियां खुश, बोलीं- जो कह नहीं पाते वो लिख देते हैं'

दिल्ली पुलिस की इस मुहिम को छात्राओं का खूब साथ मिल रहा है. सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली एक छात्रा कहती है कि कई बार सड़क पर हमारे साथ छेड़छाड़ होती है. ऐसी बातें हम घरवालों को बताने से बचते हैं. ऐसे में ये बॉक्स बेहद मददगार साबित होता है. एक छात्रा कहती है कि कई लड़कियां इंट्रोवर्ट होती हैं, वो अपनी बात हर किसी से फेस टू फेस नहीं कह पातीं. ये बॉक्स उनके लिए सबसे ज्यादा मददगार साबित होता है.

पुलिस चाहती है कि किसी भी बच्चे की पढ़ाई में कोई बाधा न आए. बच्चे अपने घर और स्कूल के बीच के रास्ते में खुद को हमेशा सुरक्षित महसूस करें. इसके लिए हर कोशिश आगे भी जारी रहेगी.

 

 

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