शराब नीति मामले में केजरीवाल और सिसोदिया को राहत! CBI की याचिका पर जवाब के लिए मिला समय

दिल्ली शराब नीति मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. ट्रायल कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के खिलाफ CBI की चुनौती पर कोर्ट ने आरोपियों को अपना पक्ष रखने के लिए समय दे दिया है.

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पिछले दिनों निचली अदालत ने केजरीवाल-सिसोदिया सहित कई आरोपियों को डिस्चार्ज कर दिया था. (File Photo: PTI) पिछले दिनों निचली अदालत ने केजरीवाल-सिसोदिया सहित कई आरोपियों को डिस्चार्ज कर दिया था. (File Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ल,
  • 16 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 2:49 PM IST

दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य आरोपियों को CBI की याचिका पर जवाब देने के लिए समय दिया. जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने ट्रायल कोर्ट के बरी करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर यह निर्देश जारी किया है. केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) ने निचली अदालत के उस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें सभी आरोपियों को डिस्चार्ज कर दिया गया था. 

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कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई 6 अप्रैल के लिए तय की है. 

यह समय तब दिया गया, जब आरोपियों ने अपना पक्ष रखने के लिए उचित मोहलत की मांग की.

CBI ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को बताया 'गलत'

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने CBI का पक्ष रखते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेश को गलत करार दिया. उन्होंने दलील देते हुए कहा कि ऐसा आदेश रिकॉर्ड पर एक सेकंड भी नहीं रहना चाहिए और जवाब दाखिल करने के लिए एक हफ्ते से ज्यादा का समय नहीं मिलना चाहिए. मेहता का तर्क था कि निचली अदालत का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध है, इसलिए विस्तृत जवाब की जरूरत नहीं है. हालांकि, आरोपियों के वकीलों ने दलील दी है कि कोई जल्दबाजी नहीं है और उन्हें जवाब तैयार करने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए.

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सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, हाई कोर्ट का रुख साफ

आम आदमी पार्टी के नेताओं की तरफ से पेश हुए सीनियर वकीलों ने कोर्ट को बताया किया कि वे ट्रायल कोर्ट के बरी करने के आदेश के खिलाफ पहले ही सुप्रीम कोर्ट का रुख कर चुके हैं. इस पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि जब तक सुप्रीम कोर्ट से कार्यवाही पर रोक (Stay) का कोई औपचारिक आदेश नहीं मिल जाता, तब तक हाई कोर्ट में मामला आगे बढ़ता रहेगा. कोर्ट ने प्रक्रिया को जारी रखते हुए सभी पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने की अनुमति दे दी है.

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ट्रायल कोर्ट ने CBI के केस को बताया था 'काल्पनिक'

27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल और सिसोदिया सहित सभी 21 लोगों को बरी कर दिया था. कोर्ट ने CBI की खिंचाई करते हुए कहा था कि उसकी कहानी न्यायिक जांच में टिकने के लायक नहीं है और पूरी तरह से काल्पनिक है. निचली अदालत के मुताबिक, कथित साजिश केवल अटकलों पर आधारित थी और कोई भी स्वीकार्य सबूत पेश नहीं किया गया था. कोर्ट ने माना था कि बिना किसी कानूनी सबूत के आरोपियों को आपराधिक मुकदमे की कठोरता का सामना करने के लिए मजबूर करना न्याय के हित में नहीं होगा.

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