जब बीजेपी की ट्रंप कार्ड सुषमा स्वराज पर भारी पड़ा था शीला दीक्षित का जादू

दिल्ली की राजनीति में बीजेपी की ट्रंप कार्ड मानी जाने वाली सुषमा स्वराज के खिलाफ कांग्रेस ने  शीला दीक्षित पर दांव लगाया था. शीला का जादू दिल्ली पर इस कदर छाया कि सुषमा स्वराज को आगे करने के बाद भी बीजेपी अपना सियासी किला नहीं बचा पाई.

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शीला दीक्षित (फोटो-PTI) शीला दीक्षित (फोटो-PTI)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 21 जुलाई 2019,
  • अपडेटेड 2:59 PM IST

दिल्ली की सियासत में कांग्रेस को सत्ता के सिंहासन तक पहुंचने वाली शीला दीक्षित का शनिवार की शाम निधन हो गया. दिल्ली की राजनीति में बीजेपी की ट्रंप कार्ड मानी जाने वाली सुषमा स्वराज के खिलाफ कांग्रेस ने  शीला दीक्षित पर दांव लगाया था. शीला का जादू दिल्ली पर इस कदर छाया कि सुषमा स्वराज को आगे करने के बाद भी बीजेपी अपना सियासी किला नहीं बचा पाई.

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बता दें कि 1993 में पहली बार दिल्ली में विधानसभा चुनाव हुए. बीजेपी पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई और मुख्यमंत्री की कुर्सी पर पार्टी के दिग्गज नेता मदनलाल खुराना विराजमान हुए. बीजेपी ने 2 साल 86 दिन के बाद 1996 में खुराना की जगह जाट नेता साहेब सिंह वर्मा को मुख्यमंत्री बनाया, लेकिन बचे हुए कार्यकाल को वो भी पूरा नहीं कर सके. विधानसभा चुनाव से महज कुछ महीने पहले बीजेपी ने अपने कद्दावर नेता सुषमा स्वराज को मुख्यमंत्री बनाने का दांव चला.

वहीं, कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव से ऐन पहले दिल्ली प्रदेश की कमान शीला दीक्षित को देकर राजधानी की सियासी जंग को दिलचस्प बना दिया. शीला ने जहां दिल्ली में कांग्रेस संगठन को एक्टिव किया. साथ ही उन्होंने खुद को दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री सुषमा स्वराज के विकल्प के तौर पर भी स्थापित किया.

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1998 का चुनाव शीला दीक्षित बना सुषमा स्वराज

यही वजह थी कि 1998 का दिल्ली विधानसभा चुनाव सुषमा स्वराज बनाम शीला दीक्षित हुआ. इस जंग में सुषमा स्वराज पर शीला दीक्षित का जादू भारी पड़ा. शीला दीक्षित ने उस वक्त की बीजेपी सरकार के खिलाफ जनता के असंतोष को भी आवाज दी और इस तरह से 1998 में बीजेपी को सत्ता से बाहर करके कांग्रेस सत्ता में आ गई.

तत्कालीन मुख्यमंत्री सुषमा स्वराज स्वयं की सीट जीतने में तो सफल रहीं, लेकिन भाजपा महज 15 सीट पर सिमट गई. कांग्रेस ने 52 विधानसभा सीटें जीतकर प्रदेश में सरकार बनाई. यही वजह रही कि दिल्ली के मुख्यमंत्री के लिए कांग्रेस के दिग्गज नेताओं को दरकिनार कर शीला दीक्षित के नाम पर मुहर लगी.

1998 के बाद शीला को बीजेपी से कोई नेता टक्कर नहीं दे सका. इसी का नतीजा था कि शीला दीक्षित के नेतृत्व में कांग्रेस 2003 और 2008 में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने में सफल रही. 15 साल तक लगातार शीला दीक्षित दिल्ली की मुख्यमंत्री पद पर बनी रहीं. शीला की सत्ता को 2013 में अन्ना आंदोलन से निकले अरविंद केजरीवाल ने चुनौती ही नहीं दी बल्कि सत्ता से भी देखल कर दिया.

20 जुलाई की शाम शीला दीक्षित का निधन हो गया. ऐसे में सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर कहा कि,  'शीला दीक्षित के निधन की खबर सुनकर मुझे बहुत दुख हो रहा है. हम राजनीति में प्रतिद्वंदी थे, लेकिन असल जिंदगी में दोस्त थे. वो एक बहुत अच्छी इंसान थीं.'

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