दिल्ली दंगों से जुड़े हेट स्पीच केस में 15 याचिकाएं खारिज, FIR-SIT जांच की मांग HC ने ठुकराई

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान नेताओं की कथित हेट स्पीच को लेकर FIR दर्ज करने और SIT से जांच कराने की मांग वाली सभी 15 याचिकाएं खारिज कर दी हैं. कोर्ट के इस फैसले से इन मामलों में FIR और SIT जांच की मांग को बड़ा झटका लगा है.

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भाजपा नेता कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा भाजपा नेता कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 12:06 PM IST

दिल्ली हाई कोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े कथित हेट स्पीच मामले में कपिल मिश्रा और अनुराग ठाकुर जैसे नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज करने और SIT जांच की मांग वाली सभी 15 याचिकाएं खारिज कर दीं. जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस मनोज जैन की बेंच ने इन याचिकाओं पर फैसला सुनाया. ये सभी याचिकाएं दंगों के बाद 2020 में दाखिल की गई थीं.

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याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि CAA और NRC के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान कुछ राजनीतिक नेताओं के भाषणों ने हिंसा भड़काने में भूमिका निभाई. याचिकाओं में नेताओं के साथ-साथ उन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई थी, जिन पर ड्यूटी में लापरवाही का आरोप लगाया गया था.

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कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर समेत कई नेताओं के खिलाफ FIR की मांग

शेख मुजतबा की एक याचिका में BJP नेताओं कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर, परवेश वर्मा और अभय वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई थी. याचिका में आरोप लगाया गया कि इन नेताओं के भाषणों ने 2020 के दंगों के दौरान हिंसा में योगदान दिया.

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याचिका में अनुराग ठाकुर के एक भाषण का भी जिक्र था, जिसमें उन पर CAA विरोधी प्रदर्शनकारियों को लेकर ‘देश के गद्दारों को गोली मारो’ नारे का नेतृत्व करने का आरोप लगाया गया था. वहीं, परवेश वर्मा पर शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों को लेकर भड़काऊ बयान देने का आरोप लगाया गया था.

एक अन्य याचिका में कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा, AAP नेताओं मनीष सिसोदिया और अमानतुल्लाह खान, AIMIM प्रमुख अकबरुद्दीन ओवैसी और पूर्व विधायक वारिस पठान के खिलाफ भी FIR की मांग की गई थी.

पुलिस कार्रवाई और NIA जांच की भी मांग

CPI(M) नेता बृंदा करात की याचिका में पुलिस, RAF और दूसरे सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कथित गलत आचरण और लापरवाही की स्वतंत्र जांच की मांग की गई थी. वहीं, एक अन्य याचिका में CAA विरोधी प्रदर्शनों की कथित फंडिंग और समर्थन की जांच NIA से कराने की मांग की गई थी.

24 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में CAA और NRC के खिलाफ प्रदर्शनों के बीच सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी. इसमें कम से कम 53 लोगों की मौत हुई थी, जबकि करीब 700 लोग घायल हुए थे. हिंसा के दौरान आगजनी और तोड़फोड़ की कई घटनाएं सामने आई थीं.

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