क्या है साल्मोनेला? बारिश में बच्चों को इससे बचाने के लिए बना टीका, जानिए- इसके बारे में 

साल्मोनेला एक बैक्टीरिया है. साल्मोनेला एक छोटा छड़ी जैसा बैक्टीरिया है जिसकी लंबाई लगभग 0.7 से 1.5 माइक्रोमीटर होती है. ये अपनी सतह पर झिलमिलाते झाग़ (flagella) बनाए रखता है, जिनकी मदद से यह खुद को हिलाता‑डुलाता है. कुछ सीरोटाइप दूषित या खराब भोजन व पानी के जरिए पेट और आंत के संक्रमण (फूड पोइज़निंग) का कारण बन सकते हैं.

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aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 जून 2025,
  • अपडेटेड 4:56 PM IST

देश ने एक और स्वदेशी वैक्सीन तैयार की है. ये वैक्सीन बार‍िश के दौरान फैलने वाली बीमार‍ियों जैसे टाइफाइड और पैरा टाइफाइड से बच्चों को बचाएगी. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR), भारत बायोटेक और बायोलॉजिकल ई की साझेदारी से तैयार हुआ साल्मोनेला टीका अब बच्चों को टाइफाइड और पैरा टाइफाइड जैसी खतरनाक बीमारियों से बचाएगा. खास बात यह है कि यह टीका 2026 तक देश के हर ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने की तैयारी हो रही है. 

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बच्चों की सेहत के लिए बनी स्वदेशी वैक्सीन

जानकारी के अनुसार भारतीय आयुर्व‍िज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के पश्च‍िम बंगाल स्थ‍ित राष्ट्रीय जीवाणु संक्रमण अनुसंधान संस्थान के वैज्ञान‍िकों ने  टाइफाइड के ख‍िलाफ दुनिया का पहला मिश्रित टीका व‍िकस‍ित किया है. ये टीका साल्मोनेला बैक्टीर‍िया के अलग अलग दो स्ट्रेन से बचाव करने में सक्षम है. टाइफाइड से बचाव करने वाले वीआई पॉलीसेकेनाइड वैक्सीन औ टाइफाइड कंजुगेट वैक्सीन (TCB) जैसे टीके मुख्य रूप से साल्मोनेला टाइफी को लक्ष‍ित करते हैं. 

बारिश के मौसम में गंदे पानी और दूषित खाने से फैलने वाले टाइफाइड और पैरा टाइफाइड से हर साल लाखों बच्चे प्रभावित होते हैं. खासकर ग्रामीण इलाकों में ये परेशानी सबसे ज्यादा फैलती है. ICMR के डायरेक्टर जनरल डॉ. राजीव बहल ने मीड‍िया को बताया कि पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिम बंगाल और झारखंड तक हर मानसून में साल्मोनेला जन‍ित बीमार‍ियां फैलाती हैं. गंदा पानी और खुले में रखी खाद्य सामग्री से गांवों में हर साल डायर‍िया और टाइफाइड के सैकड़ों मामले आते हैं. साल्मोनेला के ख‍िलाफ बना स्वदेशी टीका इन तीनों प्रकार के संक्रमणों के ख‍िलाफ एक साथ सुरक्षा देने में सक्षम है. 

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ये भारत का पहला स्वदेशी साल्मोनेला टीका है जो 9 महीने से 14 साल तक के बच्चों को बीमारी से बचाएगा. ग्रामीण भारत में यह एक क्रांति लाएगा. इस टीके की खासियत यह है कि यह 4 डिग्री तापमान पर भी खराब नहीं होता यानी बिजली की कमी वाले गांवों में भी इसे आसानी से सुरक्षित रखा जा सकेगा. 

गांवों तक पहुंचेगा टीका 

अभी तक यह टीका सिर्फ निजी अस्पतालों में 1500 रुपये से ज्यादा की कीमत पर उपलब्ध था, लेकिन अब यह मुफ्त में ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचेगा. यूनिसेफ के सहयोग से 2026 तक 10,000 से ज्यादा केंद्रों पर यह टीका बच्चों को लगाया जाएगा. ICMR के वरिष्ठ वैज्ञानिक का कहना है कि ये वैक्सीन देश के दूरदराज के इलाकों में जानलेवा बीमारियों से लाखों बच्चों को बचा सकती है. 

साल्मोनेला है क्या

असल में साल्मोनेला एक बैक्टीरिया है. साल्मोनेला एक छोटा छड़ी जैसा बैक्टीरिया है जिसकी लंबाई लगभग 0.7 से 1.5 माइक्रोमीटर होती है. ये अपनी सतह पर झिलमिलाते झाग़ (flagella) बनाए रखता है, जिनकी मदद से यह खुद को हिलाता‑डुलाता है. कुछ सीरोटाइप दूषित या खराब भोजन व पानी के जरिए पेट और आंत के संक्रमण (फूड पोइज़निंग) का कारण बन सकते हैं. ये दूषित पानी और भोजन से फैलता है जो आंतों में सूजन और तेज बुखार पैदा करता है. समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा भी हो सकता है. बच्चों और बुजुर्गों को इसका सबसे ज्यादा खतरा रहता है. लेकिन अब यह स्वदेशी टीका इस दुश्मन को हराने के लिए तैयार है जो भारत बायोटेक और बायोलॉजिकल ई की मेहनत का नतीजा है. 

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क्या है वैक्सीन की खासियत?

ये स्वदेशी तकनीक पूरी तरह भारत में विकसित है. इसकी तापमान सहनशीलता की बात करें तो 4 डिग्री पर भी असरदार है. इसल‍िए बिजली की कमी से परेशानी नहीं होगी. ये ट्रायल में 90% तक प्रभावी पाया गया. 
 

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