दवाएं खाकर भी कंट्रोल में नहीं है डायबिटीज तो करा लें ये सर्जरी, बीमारी को कर सकती है जड़ से खत्म, AIIMS डॉक्टर ने बताया

Surgery vs Medication: Which is Better for Type 2 Diabetes : डायबिटीज ऐसी बीमार है जो किसी महामारी की तरह बढ़ती दिख रही है. इसको कंट्रोल करने के लिए लोग अब ओजेंपिक जैसी दवाएं खाने लगे हैं, हालांकि दिल्ली एम्स के डॉक्टर का कहना है कि जिन मरीजों में डायबिटीज कंट्रोल में नहीं है उनके लिए सर्जरी ज्यादा फायदेमंद है.

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डायबिटीज का सही इलाज क्या है डायबिटीज का सही इलाज क्या है

अभिषेक पांचाल

  • नई दिल्ली,
  • 30 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 1:41 PM IST

जिनको डायबिटीज है वह चाहते हैं कि यह हमेशा कंट्रोल में रहे. इसके लिए लोग दवाएं खाते हैं. कुछ का काम एक दवा से चल जाता है तो कुछ को हर दिन तीन से चार दवाएं भी खानी पड़ती हैं. अब बीते दो से तीन सालों में टाइप- 2 डायबिटीज के इलाज में ओज़ेम्पिक और मौनजारो जैसी दवाएं भी काफी यूज हो रही है. कई डॉक्टर मरीजों को इनको खाने की सलाह दे रहे हैं. इससे इन दवाओं की खपत भी तेजी से बढ़ रही है. यह इस बीमारी को कंट्रोल के साथ- साथ मोटापा भी कम कर रही हैं. हालांकि इनके कुछ साइड इफेक्ट भी हैं, इस बीच AIIMS दिल्ली के विशेषज्ञ का कहना है कि टाइप-2 डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए मेटाबॉलिक सर्जरी ज्यादा फायदेमंद है. उनका दावा है कि यह सर्जरी अनकंट्रोल डायबिटीज को जड़ से खत्म कर सकती है.

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ओज़ेम्पिक और मौनजारो जैसी दवाओं की बात करें तो यह ब्लड शुगर को घटाने और इंसुलिन का लेवल सुधारने का काम करती हैं, दोनों दवाएं हफ्ते में एक बार लगने वाले इंजेक्शन के रूप में दी जाती हैं. यह दवाएं शरीर में जीएलपी-1 (GLP-1) हार्मोन की नकल करती हैं, जिससे जरूरत पड़ने पर पैक्रियास से इंसुलिन निकलता है और पाचन धीमा होता है. वहीं, मौनजारो GLP-1 के साथ-साथ जीआईपी (GIP) नाम के दूसरे हार्मोन को भी एक्टिव करती हैं, इनसे डायबिटीज मरीजों को भूख कम लगती है, जिससे शुगर कंट्रोल में आ जाता है और वजन भी कम होने लगता है, लेकिन बीते कुछ महीनों में इन दवाओं के कई साइड इफेक्ट भी सामने आए हैं.

कई रिसर्च में बताया गया है कि इन दवाओं से लोगों का वजन जरूरत से ज्यादा कम हो रहा है और मुंह भी पिचक रहा है. कुछ मरीजों को हड्डियों में कमजोरी की शिकायत भी हो रही है. डेनमार्क की साउथ डेनमार्क विश्वविद्यालय  के वैज्ञानिकों की रिसर्च में तो यह भी पता चला है कि ओजेंपिक जैसी दवा से आंखों की नसों को नुकसान पहुंच रहा है, तो क्या ऐसे में इन दवाओं को लेने की जगह मेटाबॉलिक सर्जरी कराना ज्यादा फायदेमंद है? 

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क्या कहते हैं दिल्ली एम्स के डॉक्टर

इस बारे में दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के शल्य चिकित्सा विभाग में प्रोफेसर डॉ.मंजूनाथ मारुति पोल ने बताया है. डॉ मंजूनाथ मेटाबोलिक और बैरिएट्रिक सर्जरी और वैस्कुलर सर्जरी के विशेषज्ञ हैं. वह बताते हैं कि टाइप-2 डायबिटीज की बीमारी बहुत तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में इसको काबू में करने के लिए सही कदम उठाने की जरूरत है. बीते कुछ सालों में देखा गया है कि इस बीमारी को खत्म भी किया जा सकता है. इसके लिए मेटाबॉलिक सर्जरी काफी फायदेमंद है. जिन मरीजों की डायबिटीज कंट्रोल से बाहर है उनमें यह सर्जरी फायदेमंद है. इसको कराने के बाद अगर व्यक्ति खानपान और लाइफस्टाइल को अच्छा रखता है तो सालों तक बीमारी के वापिस आने की आशंका नहीं रहती है. ना ही मरीज को कोई भी दवा लेने की जरूरत पड़ती है. 

डॉ मंजूनाथ बताते हैं कि एम्स दिल्ली में टाइप-2 डायबिटीज के कई मरीजों की यह सर्जरी की गई है. इसमें देखा गया है कि जिनका HBa1c लेवल 10 से अधिक था वह 6 के अंदर आ गया. पिछले साल ही ऐसे 30 मरीजों की सर्जरी की गई थी, जिनमें डायबिटीज काबू में आई और उनको दवा लेने की जरूरत नहीं पड़ी है. कई मरीजों की बीमारी को खत्म हो गई है. 

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सर्जरी के बाद नहीं होते कोई गंभीर साइड इफेक्ट

डॉ मंजूनाथ बताते हैं कि इस सर्जरी को कराने के बाद कोई गंभीर साइड इफेक्ट भी नहीं देखे गए हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि हम मरीजों को सर्जरी के बाद अच्छा और ज्यादा मात्रा में भोजन करने की सलाह देते हैं. इसके लिए एक डाइट चार्ट तैयार किया जाता है. मरीजों का लगातार फॉलो अप भी किया जाता है. इससे ना तो उनका वजन कम होता है और ना ही शरीर में कोई कमजोरी होती है, जबकि डायबिटीज को कंट्रोल करने वाली ओजेंपिक और मौंजारों जैसी दवाओं को खाना शुरू करने के बाद मरीज को भूख लगना बहुत कम हो जाता है. इससे उसका शरीर कमजोर होने लगता है. इन दवाओं से 15 से 25 फीसदी मरीजों की ही डायबिटीज कंट्रोल हो पाती है.

कई मरीज तो ऐसे भी हैं जो दवाओं का कोर्स शुरू करने के बाद इनके साइड इफेक्ट्स होने के कारण इलाज को बीच में ही छोड़ देते हैं, जिससे डायबिटीज फिर से बढ़ जाती है, जबकि सर्जरी के बाद ऐसा नहीं होता है. मेटाबॉलिक सर्जरी अगर सही विशेषज्ञ और अच्छे अस्पताल से कराएं तो इसके बेहतरीन परिणाम मिलते हैं. एम्स में यह सर्जरी निशुल्क है और कई मरीज इसको करा रहे हैं. जिन मरीजों में डायबिटीज कंट्रोल में नहीं है उनको दवाओं की जगह इस सर्जरी को कराने पर विचार करना चाहिए. 

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सर्जरी

डायबिटीज को कैसे ठीक करती है मेटाबॉलिक सर्जरी

डॉ. मंजूनाथ बताते हैं कि इस सर्जरी को अलग तरीके से किया जाता है. इसमें पेट की सर्जरी करके उसको सीधे आंतों से जोड़ दिया जाता है. इससे खाना डियोडेनम में ना जाकर पेट से सीधे आंतों में चला जाता है. इससे शरीर के हार्मोन और मेटाबॉलिज्म में सुधार आ जाता है. इंसुलिन के काम करने की क्षमता बढ़ती है. जिससे डायबिटीज कंट्रोल में आ जाती है. मरीजों की दवाएं कम हो जाती या दवा बिलकुल ही खत्म हो जाती है. हालांकि ये सर्जरी डायबिटीज के हर मरीज के लिए बिलकुल नहीं है. यह उनके लिए है जिनकी डायबिटीज किसी भी तरह से कंट्रोल नहीं आ रही है और इस कारण मरीज को किसी दूसरे अंग के खराब होने का रिस्क है. 

डायबिटीज

इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन भी मानती है कारगर

डॉ मंजूनाथ बताते हैं कि करीब 10 साल पहले 2016 में गाइडलाइंस आई थीं. उनमें भी मेटाबॉलिक सर्जरी को टाइप-2 डायबिटीज का इलाज माना गया था. इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन भी इसको कारगर मानती है. इस सर्जरी के बाद 10 साल तक भी डायबिटीज खत्म रह सकती है.

डॉ. मंजूनाथ बताते हैं कि डायबिटीज को कंट्रोल में रखना जरूरी है नहीं तो यह कई दूसरी बीमारियों का कारण बन सकती है. इससे किडनी खराब, आंखों के खराब होने और यहां तक की गैंगरीन होने का रिस्क होता है. इसलिए अपने डॉक्टर की सलाह पर इस बीमारी का सही इलाज कराना जरूरी है.अगर डॉक्टर ने मेटाबॉलिक सर्जरी कराने की सलाह दी है तो इसको करा सकते हैं, इससे कोई खास नुकसान नहीं है, लेकिन फायदे काफी हैं, हालांकि ध्यान रखें कि इसके लिए हमेशा अच्छा सर्जन और अच्छे अस्पताल का चयन करें. सर्जरी कराने के बाद नियमित फॉलो अप कराएं और डॉक्टर की सभी सलाह का पालन जरूर करें. 
 

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