मोटापा और डायबिटीज मरीजों को जरूर कराना चाहिए लिवर का टेस्ट, इन बीमारियों का चल जाता है पता

लिवर की बीमारी कई मामलों में बिना खास लक्षण के बढ़ती है, जिससे समय रहते पहचानना मुश्किल हो जाता है. डॉक्टरों के अनुसार, नियमित लिवर टेस्ट और नॉन-इन्वेसिव जांच से समय रहते बीमारी का पता लगाकर इलाज किया जा सकता है.

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 लिवर टेस्ट (Photo- AI generated) लिवर टेस्ट (Photo- AI generated)

आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 28 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 12:53 PM IST

लिवर की बीमारी कई साल तक बिना किसी साफ लक्षण के बढ़ सकती है. जब तक आंखें पीली पड़ती हैं या पेट में पानी भरने लगता है, तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है. कुछ लोगों में लिवर की बीमारियों का रिस्क भी अधिक होता है. ऐसे में इनको डॉक्टर की सलाह पर लिवर का टेस्ट कराना चाहिए.

डॉक्टर बताते हैं कि लिवर हमारे शरीर का एक ऐसा अंग है, जो लगातार काम करता रहता है, लेकिन इसके खराब होने का पता तब चलता है, जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि लिवर में गंभीर नुकसान होने के बावजूद शुरुआत में दर्द या दूसरे लक्षण दिखाई नहीं देते. कई लोगों को रूटीन हेल्थ चेकअप के दौरान पता चलता है कि उनके लिवर में फाइब्रोसिस यानी स्कारिंग या सिरोसिस जैसी गंभीर समस्या हो चुकी है.

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किन लोगों को जरूर कराने चाहिए लिवर टेस्ट?

गुरुग्राम के मेदांता हॉस्पिटल में लिवर ट्रांसप्लांट विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. प्रशांत विलास भंगुई ने इस बारे में बताया है. वह कहते हैं कि मोटापा, डायबिटीज, शराब का अधिक सेवन और हेपेटाइटिस बी या सी का पुराना संक्रमण लिवर की बीमारी का खतरा बढ़ाते हैं. इन स्थितियों में लिवर में फैट जमा हो सकता है, सूजन आ सकती है और धीरे-धीरे फाइब्रोसिस विकसित हो सकता है. ऐसे में जिन लोगों को मोटापा, डायबिटीज और हाई बीपी की परेशानियां हैं उनको लिवर का टेस्ट जरूर कराना चाहिए. सही समय पर टेस्ट कराने से लिवर सिरोसिस से लेकर हेपेटाइटिस का पता चल जाता है. 

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लिवर के कौन से टेस्ट होते हैं

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लिवर के लिए ब्लड टेस्ट, हेपेटाइटिस की जांच और जरूरत पड़ने पर लिवर की स्कारिंग का पता लगाने वाले नॉन-इन्वेसिव टेस्ट किए जा सकते हैं. लेकिन ये भी ध्यान रखें कि लिवर एंजाइम्स की रिपोर्ट सामान्य होने का मतलब हमेशा यह नहीं है कि लिवर पूरी तरह स्वस्थ है. ऐसे में डॉक्टर की सलाह पर ब्लड टेस्ट के अलावा दूसरे टेस्ट भी कराने चाहिए.

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लक्षणों का इंतजार करना पड़ सकता है भारी

लिवर की बीमारी का समय रहते पता चल जाए, तो इसके कई कारणों का इलाज किया जा सकता है और बीमारी को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है. कुछ मामलों में लिवर की स्कारिंग में भी सुधार संभव है, इसलिए लक्षण दिखाई देने का इंतजार न करें..अपने जोखिम को पहचानें, डॉक्टर की सलाह से जांच कराएं और समय रहते लिवर की सेहत का ध्यान रखें.


 

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