किसी डॉक्टर से जब आप कैंसर के 5 बड़े लक्षणों के बारे में पूछते हैं तो वजन घटने को इसका एक लक्षण जरूर बताया जाता है. लेकिन वजन कितने दिनों में घटना नॉर्मल है और कब ये कैंसर का खतरा है, ये जानना भी आपके लिए जरूरी है. इसके बारे में डॉक्टर ने बताया है.
वैशाली के मैक्स हॉस्पिटल में ऑन्कोलॉजी विभाग में डॉ रोहित कपूर बताते हैं कि तेजी से वजन कम होना कैंसर का एक बड़ा लक्षण होता है. लेकिन ये ध्यान रखना होता है कि ये वेटलॉस बिना किसी एक्सरसाइज और डाइट में बदलाव के हो. साथ ही किसी दूसरी बीमारी जैसे डायबिटीज या कोई मेटाबॉलिक डिसऑर्डर भी न हो. अगर ऐसा कुछ नहीं है और फिर भी वजन कम हो रहा है तो ये कैंसर का लक्षण हो सकता है.
कैंसर में वजन कम क्यों होता है? कैंसर में वजन तेजी से घटने के कई कारण होते हैं. जब शरीर में कैंसर सेल्स बढ़ते हैं तो वह इस दौरान साइटोकाइन्स जैसे केमिकल छोड़ते हैं. ये केमिकल मेटाबॉलिज्म को बहुत तेज कर देते हैं. इससे आराम की स्थिति में भी शरीर सामान्य से ज्यादा कैलोरी जलाने लगता है. तेजी से कैलोरी बर्न होने के कारण वजन भी घटने लगता है.
इन केमिकल का असंतुलन सीधे ब्रेन के उन हिस्सों पर भी असर डालता हैं जो भूख को कंट्रोल करते हैं. इससे मरीज की भूख कम हो जाती है. इसका असर वजन पर भी होता है. कैंसर सेल्स को ज्यादा एनर्जी की जरूरत भी होती है. ऐसे में ये अपनी एनर्जी की जरूरत को पूरा करने के लिए शरीर की मसल्स को तोड़ना शुरू कर देती हैं. इसका असर ये होता है कि वजन कम होने लगता है.
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कितना वजन घटना है कैंसर का खतरा
डॉ. रोहित बताते हैं कि अगर किसी व्यक्ति का 6 से 12 महीनों में शरीर के वजन का 5% या उससे ज्यादा वजन बिना किसी खास वजह के कम हो जाता है, तो डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए. इसको ऐसे समझें कि अगर आपका वजन 60 किलो है और 6 महीने में ही ये बिना किसी कारण 3 किलो या इससे ज्यादा घट जाता है तो डॉक्टर से मिलें. ये भी ध्यान रखें कि अगर इसके साथ कुछ गंभीर लक्षण जैसे कि शरीर में कोई गांठ महसूस होना, बिना वजह लिम्फ नोड्स का बढ़ना, लगातार बुखार, रात में पसीना आना, बिना वजह खून की कमी है तो कैंसर की जांच करवाना और भी जरूरी हो जाता है.
इसके अलावा अगर मल में खून आ रहा हो या लगातार खांसी हो, शरीर के किसी हिस्से में दर्द हो जो ठीक ही न हो रहा हो तो भी कैेंसर टेस्ट जरूरी है.
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कौन से टेस्ट कराएं
किस लक्षणों के आधार पर कौन से टेस्ट होंगे इसका फैसला डॉक्टर लेते हैं, लेकिन फिर भी कुछ टेस्ट ऐसे हैं जिनको आप खुद से भी लक्षण दिखने पर करा सकते हैं. जैसे CBC, KFT,LFT, ESR/CRP, HbA1c, TSH और यूरिन टेस्ट करवाने पर विचार करें.उम्र के हिसाब से कैंसर की स्क्रीनिंग करें और जरूरत पड़ने पर टारगेटेड इमेजिंग/एंडोस्कोपी करवाएं.
आजतक हेल्थ डेस्क