Egg Freezing Process: लेट शादी का प्लान? एग फ्रीजिंग से सुरक्षित करें अपना भविष्य, कितना आता है खर्च

क्या आप भी करियर के चक्कर में फैमिली प्लानिंग को डिले कर रही हैं? हाल ही में एक्ट्रेस कीर्ति सेनन ने भी एग फ्रीजिंग कराई है. यह स्टोरी आपको बताएगी कि कैसे मॉडर्न साइंस और एग फ्रीजिंग महिलाओं को बिना अधिक उम्र में भी मां बनने का सुख दे रहा है और इसमें कितना खर्च आता है.

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एग फ्रीजिंग का ट्रेंड भारत में काफी बढ़ा है. (Photo: AI Generated) एग फ्रीजिंग का ट्रेंड भारत में काफी बढ़ा है. (Photo: AI Generated)

आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 14 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 7:40 PM IST

Egg Freezing Benefits: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में करियर और पर्सनल गोल्स को बैलेंस करना किसी चुनौती से कम नहीं है. ऐसे में कई महिलाएं अपनी प्रोफेशनल लाइफ में इतना बिजी हो जाती हैं कि शादी और फैमिली प्लानिंग में वे 30 या 35 साल की हो जाती हैं. लेकिन यहीं आकर महिलाओं की हेल्थ संबंधी एक बड़ी मुश्किल खड़ी होती है और वो है बायोलॉजिकल क्लॉक.

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कृति सेनन ने हाल ही में खुलासा किया कि उन्होंने 'मिमी' फिल्म की शूटिंग के दौरान ही अपने एग्स फ्रीज कराए थे. यह सिर्फ एक सेलिब्रिटी का कदम नहीं है बल्कि एक ऐसा फैसला है जो आज की हर कामकाजी महिला को अपनी सेहत और भविष्य के लिए गंभीरता से सोचना चाहिए. एग फ्रीजिंग क्यों कराना फायदेमंद है और इसमें कितना खर्चा आता है, इस बारे में जान लीजिए.

30 के बाद क्यों कम हो जाती है फर्टिलिटी?

नेचर ने महिलाओं के लिए गर्भधारण का लिमिटेड टाइम दिया है. मेडिकल साइंस के मुताबिक, 20 से 30 साल की उम्र महिलाओं के लिए फर्टिलिटी के लिहाज से सबसे बेहतरीन समय होता है.

अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्स्टेट्रिशियंस एंड गायनेकोलॉजिस्ट्स (ACOG), एक स्वस्थ महिला के 30 साल की उम्र में प्रेग्नेंट होने के चांस हर महीने लगभग 20% होते हैं जो 40 की उम्र तक आते-आते 5% से भी कम हो जाते हैं. इसका मुख्य कारण अंडों (Eggs) की संख्या और उनकी क्वालिटी में आने वाली गिरावट है. जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, ओवरी में अंडों का रिजर्व कम होने लगता है जिससे नेचुरल कंसीव करने की संभावना घटने लगती है.

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क्या है एग फ्रीजिंग?

एग फ्रीजिंग को मेडिकल भाषा में ओसाइट क्रायोप्रिजर्वेशन कहा जाता है. यह एक ऐसी प्रोसेस है जिसमें महिला के अंडों को ओवरी से निकालकर सुरक्षित फ्रीज कर दिया जाता है.

यशोदा मेडिसिटी की कंसल्टेंट (IVF और इनफर्टिलिटी) डॉ. स्नेहा मिश्रा बताती हैं कि पहले यह प्रक्रिया सिर्फ कैंसर जैसी बीमारियों से जूझ रही महिलाओं तक सीमित थी लेकिन अब कामकाजी महिलाएं इसे अपना रही हैं. डॉ. मिश्रा के अनुसार, भारत में अपनी उम्र के 30 के आसपास की महिलाएं यह समझदारी भरा फैसला ले रही हैं, क्योंकि वे अपनी पढ़ाई, करियर, आर्थिक मजबूती और सही पार्टनर ढूंढने पर ध्यान देना चाहती हैं. फर्टिलिटी के बारे में बढ़ती जागरूकता इसका बड़ा कारण है.

कैसे काम करती है यह प्रोसेस?

डॉ. मिश्रा के मुताबिक, यह पूरी प्रक्रिया करीब 2 हफ्ते में पूरी हो जाती है. इसमें महिला को 10 से 12 दिनों तक हार्मोन इंजेक्शन दिए जाते हैं, ताकि हर महीने एक अंडे के बजाय कई अंडे परिपक्व हो सकें. इसके बाद, एनेस्थीसिया देकर एक सरल प्रक्रिया के जरिए अंडों को निकाला जाता है.

निकाले गए अंडों को 'विट्रिफिकेशन' तकनीक से संरक्षित किया जाता है. डॉ. मिश्रा बताती हैं, विट्रिफिकेशन अंडों को बहुत तेजी से फ्रीज करने की प्रक्रिया है, ताकि फ्रीज करते समय वे डैमेज न हों. इन अंडों को -196 डिग्री सेल्सियस पर तरल नाइट्रोजन में सालों तक सुरक्षित रखा जा सकता है. हकीकत यह है कि एक दशक से भी ज्यादा समय से फ्रीज किए गए अंडों से भी आज स्वस्थ बच्चे जन्म ले रहे हैं.

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कितना बढ़ा है भारतीय मार्केट?

भारत में फर्टिलिटी और एग फ्रीजिंग का मार्केट बेहद तेजी से विस्तार कर रहा है. इचेलॉन कंसल्टिंग ग्रुप की रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत का फर्टिलिटी मार्केट जो 2025 में लगभग ₹11,700 करोड़ रुपये का था, वह 2030 तक बढ़कर 28,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है. वहीं 2034 तक यह आंकड़ा 40,700 करोड़ रुपये को पार कर सकता है.

इस ग्रोथ के पीछे सबसे बड़ा कारण 'सोशल एग फ्रीजिंग' का चलन है. पिछले एक दशक में यह प्रक्रिया केवल कैंसर जैसे गंभीर मेडिकल कारणों से निकलकर अब कामकाजी महिलाओं की लाइफस्टाइल और करियर प्लानिंग का एक हिस्सा बन गई है.

आंकड़ों के मुताबिक, भारत में हर साल करीब 5 से 7.5 लाख कपल्स या महिलाओं को आईवीएफ (IVF) या फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन की मेडिकल सलाह दी जाती है लेकिन उनमें से केवल 2 से 2.5 लाख लोग ही वर्तमान में इस प्रक्रिया को अपना पा रहे हैं. यह जो बड़ा 'गैप' है. वही अगले कुछ वर्षों में इस सेक्टर को और ऊंचाई पर ले जाएगा.

साथ ही अब फर्टिलिटी क्लिनिक्स का विस्तार केवल दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे मेट्रो शहरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी इन सेंटर्स की संख्या में सालाना 18-22% की दर से बढ़ोतरी हो रही है, जो यह साबित करता है कि अब छोटे शहरों में भी महिलाएं अपने भविष्य को लेकर अधिक जागरूक हो रही हैं.

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इंडिया में क्यों बढ़ रहा है यह ट्रेंड?

भारत में भी शादी की औसत उम्र लगातार बढ़ रही है. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) के आंकड़े बताते हैं कि शहरी भारत में महिलाएं अब 25 से 30 साल की उम्र के बाद ही शादी को प्राथमिकता दे रही हैं. करियर में स्टेबिलिटी की तलाश में महिलाएं पहली प्रेगनेंसी को 30-35 की उम्र तक टाल रही हैं.

रिप्रोडक्टिव मेडिसिन एसोसिएट्स ऑफ़ न्यूयॉर्क (RMA) के अनुसार, 30-34 की उम्र के बीच एग फ्रीज करने पर भविष्य में गर्भधारण के चांस काफी हाई रहते हैं जबकि 40 के बाद यह प्रक्रिया उतनी प्रभावी नहीं रह जाती.

क्या यह सिर्फ सेलिब्रिटीज के लिए है?

यह एक गलत धारणा है कि एग फ्रीजिंग सिर्फ बड़ी एक्ट्रेसेस या अमीर लोगों का शौक है. आज के समय में, मिडिल क्लास वर्किंग वुमन भी इस बारे में जागरुक हो रही हैं. यह आपकी मदरहुड फ्रीडम का हिस्सा है. एग फ्रीजिंग न केवल आपको बायोलॉजिकल प्रेशर से आजाद करती है बल्कि आपको उस सही समय का इंतजार करने का मौका भी देती है जब आप मानसिक, आर्थिक और भावनात्मक रूप से मां बनने के लिए पूरी तरह तैयार हों.

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