आशु मोंगिया और मुनीष रायजादा... वो लोग जिन्होंने AAP को खालिस्तानी फंडिंग मिलने के लगाए आरोप

दिल्ली के कथित शराब घोटाला मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पहले ही जेल में बंद हैं और अब उनकी मुश्किलें और बढ़ती नजर रहीं हैं. कथित खालिस्तानी फंडिंग मामले में उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने उनके खिलाफ एनआईए जांच की सिफारिश की है. इस मामले में आशु मोंगिया और मुनीष रायजादा के नाम सामने आ रहे हैं.

Advertisement
आम आदमी पार्टी पर खालिस्तानी फंडिंग का आरोप लगा है. (फाइल फोटो) आम आदमी पार्टी पर खालिस्तानी फंडिंग का आरोप लगा है. (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 मई 2024,
  • अपडेटेड 3:11 PM IST

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के लिए नई मुश्किलें खड़ी होती नजर आ रहीं हैं. उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने खालिस्तानी फंडिंग के आरोपों पर उनके खिलाफ NIA जांच की सिफारिश की है. एलजी दफ्तर की ओर से भेजी गई चिट्ठी में लिखा गया है कि जेल में बंद आतंकी देवेंद्र पाल भुल्लर की रिहाई के लिए आम आदमी पार्टी को खालिस्तानी संगठनों से 1.6 करोड़ डॉलर (करीब 133 करोड़ रुपये) की फंडिंग मिली थी.

Advertisement

आरोप है कि केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को ये फंडिंग प्रतिबंधित संगठन 'सिख फॉर जस्टिस' ने की थी. सिख फॉर जस्टिस वही संगठन है, जिसकी शुरुआत खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने की थी.

इस पूरे मामले में दो लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, जिन्होंने खालिस्तानी फंडिंग के कथित सबूत दिए थे. एलजी की चिट्ठी में भी इनका जिक्र है. पहला नाम आशु मोंगिया का है और दूसरा है मुनीष रायजादा का.

कौन हैं ये दोनों?

आशु मोंगिया खुद को वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन इंडिया का राष्ट्रीय महासचिव बताते हैं. उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, वो राष्ट्रीय गोरक्षा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं.

वहीं, मुनीष कुमार रायजादा आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता रहे हैं. फिलहाल वो भारतीय लिबरल पार्टी (बीएलपी) नाम की राजनीतिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. उन्होंने X (पहले ट्विटर) की बायो में बताया है कि वो 21 साल तक अमेरिका में डॉक्टर रह चुके हैं. उनकी पार्टी दिल्ली में लोकसभा चुनाव भी लड़ रही है. 

Advertisement

आशु मोंगिया X पर कई तस्वीरें और वीडियो शेयर करते रहते हैं. 21 मार्च को सीएम अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने एक गाना गाया था, जिसे आशु ने भी शेयर किया है. कपिल मिश्रा पहले आम आदमी पार्टी में ही थे. 

इनकी तरफ से क्या आरोप लगाए गए?

एलजी वीके सक्सेना के प्रधान सचिव की ओर से केंद्रीय गृह सचिव को भेजी गई चिट्ठी में आशु मोंगिया और मुनीष कुमार रायजादा का नाम है. आशु मोंगिया ने इसी साल एक अप्रैल को एलजी सक्सेना के पास शिकायत दर्ज कराई थी. 

आशु मोंगिया ने अपनी शिकायत में मुनीष रायजादा के कुछ ट्वीट्स भी अटैच किए थे. इनमें दिसंबर 2014 में न्यूयॉर्क के रिचमंड हिल गुरुद्वारे में अरविंद केजरीवाल और सिख नेताओं की मुलाकात की तस्वीरें थीं. 

आरोप है कि रिचमंड हिल गुरुद्वारे में केजरीवाल ने कथित खालिस्तान समर्थक नेताओं के साथ बंद दरवाजे के भीतर एक बैठक की थी. 

हालांकि, जिस वक्त अरविंद केजरीवाल न्यूयॉर्क में थे, उस वक्त वो दिल्ली के मुख्यमंत्री नहीं थे. 

एलजी की भेजी गई चिट्ठी में लिखा गया है कि उस बैठक में अरविंद केजरीवाल ने जेल में बंद आतंकी देवेंद्र पाल भुल्लर की रिहाई का वादा किया था. इसके बदले में आम आदमी पार्टी के लिए कथित रूप से फंडिंग मांगी थी.

Advertisement

मुनीष रायजादा ने 25 मार्च को सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट की हैं, जिसमें उन्होंने दिसंबर 2014 की केजरीवाल की अमेरिकी यात्रा के बारे में बताया है.

1.6 करोड़ डॉलर की फंडिंग

एलजी सक्सेना को भेजी शिकायत में आशु मोंगिया ने एक पेन ड्राइव भी सौंपी है. इस पेन ड्राइव में खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू का एक वीडियो भी है. इस वीडियो में पन्नू कथित तौर पर केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को फंडिंग देने की बात कह रहा है.

उपराज्यपाल ने अपनी चिट्ठी में बताया है कि 2014 से 2022 के बीच केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी को खालिस्तानी संगठनों से 1.6 करोड़ डॉलर की फंडिंग मिली थी.

और क्या आरोप हैं?

अपनी शिकायत में आशु मोंगिया ने ये भी दावा किया है जनवरी 2014 में केजरीवाल ने तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को लिखी चिट्ठी में भुल्लर की सजा माफ करने की भी मांग की थी.

इतना ही नहीं, 27 जनवरी 2014 को केजरीवाल ने इकबाल सिंह नाम के शख्स को एक चिट्ठी लिखी थी. इकबाल सिंह तब जंतर-मंतर पर भुल्लर की रिहाई की मांग को लेकर अनशन पर था. केजरीवाल ने उसे चिट्ठी लिखकर आश्वासन दिया था कि दिल्ली सरकार ने भुल्लर की रिहाई की सिफारिश की है. इसके बाद इकबाल सिंह ने अपना अनशन खत्म कर दिया था.

Advertisement

मोंगिया ने अपनी शिकायत में आम आदमी पार्टी को कथित खालिस्तानी फंडिंग की विस्तृत जांच की मांग की है. 

एलजी सक्सेना ने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि चूंकि शिकायत एक मुख्यमंत्री और प्रतिबंधित आतंकी संगठन से राजनीतिक फंडिंग से जुड़ी है, इसलिए शिकायतकर्ता की ओर से दिए इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस की फोरेंसिक जांच कराए जाने की जरूरत है. उन्होंने इस पूरे मामले की जांच नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) से कराने की सिफारिश की है.

ये भुल्लर कौन है?

1993 में दिल्ली में हुए बम धमाके के मामले में आतंकी देवेंद्र पाल भुल्लर को दोषी ठहराया गया है. इस धमाके में 9 लोगों की मौत हो गई थी. टाडा कोर्ट ने भुल्लर को फांसी की सजा सुनाई थी. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इसे आजीवन कारावास में बदल दिया था. 2015 तक भुल्लर दिल्ली की तिहाड़ जेल में ही था. लेकिन जून 2015 में उसे अमृतसर की जेल में शिफ्ट कर दिया गया था.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »