'वाराणसी' के लिए राजामौली की टेक्निकल क्रांति! इंडियन सिनेमा को घर में मिलेगा इंटरनेशनल VFX, कम होगा फिल्मों का बजट

एस एस राजामौली की फिल्म ‘वाराणसी’ सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि इंडियन सिनेमा के लिए टेक्निकल रिवॉल्यूशन साबित हो सकती है. AI VFX स्टूडियो, एडवांस मोशन कैप्चर और डॉल्बी प्रोसेसिंग जैसी तकनीकों के जरिए ये फिल्म भविष्य की फिल्ममेकिंग का रास्ता तैयार कर रही है. इसका असर लंबे समय तक पूरी इंडस्ट्री पर दिखेगा.

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राजामौली की 'वाराणसी' लाएगी इंडियन सिनेमा में टेक्निकल क्रांति! (Photo: Instagram/@rrrmovie; Screengrab) राजामौली की 'वाराणसी' लाएगी इंडियन सिनेमा में टेक्निकल क्रांति! (Photo: Instagram/@rrrmovie; Screengrab)

सुबोध मिश्रा

  • नई दिल्ली ,
  • 11 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 2:26 PM IST

ईगा, मगधीरा या बाहुबली— एस एस राजामौली की हर फिल्म इंडियन सिनेमा का लेवल थोड़ा सा और ऊंचा कर देती है. पर उनकी अगली फिल्म वाराणसी, इंडियन सिनेमा के लिए एक लंबी छलांग साबित हो सकती है.

महेश बाबू, प्रियंका चोपड़ा और पृथ्वीराज सुकुमारन के साथ राजामौली इन दिनों वाराणसी का शूट तेजी से निपटा रहे हैं. मगर कैमरे के पीछे राजामौली जो तकनीकी तैयारियां कर रहे हैं, वो वाराणसी के लिए उनके ग्रैंड विजन और स्केल का सबूत हैं. मॉडर्न फिल्ममेकिंग में मोशन कैप्चर, VFX डिजाइन और पोस्ट प्रोडक्शन की कई तकनीकें हॉलीवुड में अब रूटीन हो चुकी हैं. पर इंडियन सिनेमा अभी भी इनका रेगुलर और बेस्ट यूज नहीं कर पाता.

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कारण— ऐसी कई तकनीकों तक हमारी पहुंच अभी भी लिमिटेड है. राजामौली ने बाहुबली के वक्त ऐसी ही कई नई चीजें की थीं, जो अब इंडियन सिनेमा के लिए रूटीन हैं. अब वाराणसी को टेक्निकली वर्ल्ड क्लास बनाने के लिए राजामौली कई ऐसी चीजें करने जा रहे हैं जिनका फायदा इंडियन सिनेमा को लॉन्ग टर्म में बहुत तगड़ा होगा.

मॉडर्न AI पावर्ड VFX स्टूडियो
सिनेमा से जुड़े कुछ भरोसेमंद पोर्टल्स और रेडिट हैंडल्स ने रिपोर्ट किया है कि राजामौली एक AI-पावर्ड मॉडर्न VFX स्टूडियो सेटअप करवाने पर काम कर रहे हैं. इसके लिए उन्होंने एक ग्लोबल VFX कंपनी से हाथ मिलाया है और दूसरी तरफ आंध्र प्रदेश सरकार से भी बातचीत जारी है. इसे इंडिया के सबसे मॉडर्न VFX स्टूडियो के तौर पर डेवलप करने की प्लानिंग है. रिपोर्ट्स में स्पष्ट नहीं है कि राजामौली खुद इस स्टूडियो में इन्वेस्ट करने वाले हैं या उन्होंने वाराणसी से इसे एक सॉलिड स्टार्ट देने के लिए हाथ मिलाया है.

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ये एक बहुत महत्वपूर्ण डेवलपमेंट इसलिए है क्योंकि VFX का ग्लोबल हब होने के बावजूद, इंडियन कंपनियों के काम में एक लिमिटेशन है. हम इंटरनेशनल फिल्मों को बहुत किफायती दाम में बहुत बढ़िया VFX देते हैं. लेकिन फर्क इस बात का है कि हमारे स्टूडियोज की मास्टरी VFX के किस प्रोसेस में है. 

RRR में VFX के इस्तेमाल से ऐसे तैयार हुआ था जूनियर एनटीआर का एंट्री सीन! (Photo: Youtube/@CineBehind-y2r)

फ्रेम बाय फ्रेम इमेज की सफाई, एक्टर्स को बैकग्राउंड में परफेक्ट तरीके से फिट करना या कम्प्यूटर जेनरेटेड (CG) आर्मी और शहर दिखाने जैसे कामों में हम टॉप क्लास हैं. हमें हॉलीवुड कंपनियां इसी तरह के काम देती हैं. हमें इंटरनेशनल फिल्मों के शॉट्स VFX के लिए मिलते हैं लेकिन सीक्वेंस डिजाइन और क्रिएटिव कंट्रोल नहीं मिलता. अपनी फिल्मों के इसी तरह के पोर्शन्स के लिए काम देती हैं. इसलिए राजामौली ने बाहुबली में माहिष्मती शहर या युद्ध के सीन्स का VFX तो इंडियन कंपनी से ही करवा लिया. RRR में राम चरण के इंट्रो सीन में आठ-नौ सौ आर्टिस्ट्स की भीड़ को, स्क्रीन पर दो-तीन हजार लोगों की भीड़ में इंडियन कंपनी ने ही बदला.

लेकिन बारीक रियलिस्टिक डिटेलिंग, CG कैरेक्टर्स को लाइव एक्टर्स के साथ मिलाना और आंखों को एकदम रियल दिखने वाले क्रीचर तैयार करने में अभी भी इंटरनेशनल कंपनियां ही मास्टर हैं. इसलिए RRR में जूनियर एनटीआर के इंट्रो सीन वाला टाइगर, या क्लाइमेक्स सीन में ट्रक से कूदते जानवरों का सीन यूएस, यूके या कनाडा की VFX कंपनियों से करवाया गया.

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विदेशी VFX कंपनियों में काम करवाने के नुकसान
फिल्म के शूट से पहले ग्राफिक एलिमेंट और एक्टर के इर्दगिर्द के CG माहौल का एक डिजिटल मॉडल, जितना बेहतर होता है एक्टर्स उतना बेहतर काम कर पाते हैं. इसे प्री-विजुअलाइजेशन कहा जाता है. जब जेम्स कैमरून अवतार 2 में एक्टर्स की परफॉर्मेंस शूट करते हैं तो वो खुद और उनके एक्टर्स, रियल टाइम में उस डिजिटल माहौल को देख पाते हैं जिसमें किरदार फाइनली बड़े पर्दे पर नजर आएगा.

इससे लाइव एक्शन परफॉर्म कर रहे एक्टर्स और कहानी के डिजिटल संसार की तस्वीरें, एकसाथ ज्यादा बेहतर फिट बैठते हैं. ये एक चीज फिल्म का पूरा एक्सपीरियंस बदल देती है. लेकिन राजामौली जब RRR शूट करते हैं तो उनके एक्टर्स ज्यादातर अपने अनुमान से रिएक्ट करते हैं कि VFX से बनने वाले संसार में उनके सामने क्या है.

जैसे— RRR शूट करते वक्त जूनियर एनटीआर के सामने शेर की इमेज तक नहीं थी, नीले रंग का मेकैनिकल शेर था. इसी सीक्वेंस में थोड़ा पहले उन्होंने शेर और भेड़िए के बीच से हवा में जंप लगाई थी. लेकिन शूट के वक्त एनटीआर को कोई आइडिया नहीं था कि कहां शेर है, कहां भेड़िया! एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इंडियन VFX कंपनियों को अभी प्री-विजुअलाइजेशन टूल्स और बेहतर करने की जरूरत है.

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RRR का टाइगर विदेशी VFX कंपनी ने तैयार किया था (Photo: Youtube/@CineBehind-y2r)

RRR जैसी इंडियन फिल्म को इससे तीन तरह के नुकसान होते हैं— फिल्म का बजट बढ़ता जाता है. VFX का प्रोसेस स्लो हो जाता है क्योंकि एक-एक सीन पर कई कंपनियों को काम करना है. और अलग-अलग जगह काम होने से फाइनल VFX की क्वालिटी भी कई बार हल्की रह जाती है. यानी ऊपर बताई दिक्कतों को सॉल्व करने वाला एक इंटरनेशनल स्टूडियो अगर इंडिया में ही बैठा हो तो इंडियन फिल्ममेकर्स के तीनों नुकसानों की भरपाई एकसाथ हो जाएगी.

इस VFX स्टूडियो से पहले राजामौली वाराणसी के लिए दो और तगड़े टेक्निकल अपग्रेड पर काम कर रहे हैं. ये अपग्रेड क्या हैं, हम आपको बताएंगे इस स्टोरी के दूसरे पार्ट में. तबतक नजर और सब्र बनाए रखें!

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