'राम-लखन, सीता और गीता ठीक तो जानकी नाम पर दिक्कत क्यों?', केरल HC की सेंसर बोर्ड को फटकार

प्रोडक्शन हाउस 'कॉसमॉस एंटरटेनमेंट' के वकील ने तर्क दिया कि सिनेमैटोग्राफ (सर्टिफिकेशन) रूल्स, 1983 के अनुसार, रिवाइजिंग कमेटी शो-कॉज नोटिस जारी नहीं कर सकती. इसकी भूमिका फिल्मों में कट्स का सुझाव देने और सर्टिफिकेशन देने तक सीमित है.

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सुरेश गोपी और अनुपमा परमेश्वरन की फिल्म 'जानकी वर्सेस स्टेट ऑफ केरल' 27 जून को रिलीज होने वाली थी. (Screengrab) सुरेश गोपी और अनुपमा परमेश्वरन की फिल्म 'जानकी वर्सेस स्टेट ऑफ केरल' 27 जून को रिलीज होने वाली थी. (Screengrab)

aajtak.in

  • तिरुवनंतपुरम,
  • 27 जून 2025,
  • अपडेटेड 8:10 PM IST

केरल ​हाई कोर्ट ने शुक्रवार को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) से मलयालम फिल्म ‘JSK– Janaki vs State of Kerala’ में ‘जानकी’ नाम के इस्तेमाल पर आपत्ति जताने के मामले में सवाल पूछे. इस फिल्म में केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता सुरेश गोपी और एक्ट्रेस अनुपमा परमेश्वरन ने अभिनय किया है. ​सर्टिफिकेशन में देरी को लेकर फिल्म के प्रोडक्शन हाउस 'कॉसमॉस एंटरटेनमेंट' द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एन नागरेश ने कहा कि भारतीय सिनेमा में बिना किसी विवाद के पौराणिक नामों के इस्तेमाल का इतिहास रहा है. 

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जस्टिस नागरेश ने सीबीएफसी का प्रतिनिधित्व कर रहे डिप्टी सॉलिसिटर जनरल (DSGI) से पूछा, 'हमारे यहां सीता और गीता नाम की एक फिल्म है. सीता को ही जानकी कहते हैं. इस फिल्म पर कुछ नहीं हुआ, कोई समस्या नहीं हुई. किसी को कोई शिकायत नहीं है इस पर. हमारे यहां राम लखन नाम की एक फिल्म है. इस पर भी किसी को कोई शिकायत नहीं है. फिर जानकी वर्सेस स्टेट ऑफ केरल फिल्म को लेकर शिकायत कैसे हो सकती है?' हाई कोर्ट की यह टिप्पणी सीबीएफसी द्वारा फिल्म निर्माताओं को कारण बताओ नोटिस जारी करने के बाद आई, जिसमें उन्हें फिल्म के शीर्षक और संवादों से 'जानकी' नाम हटाने का निर्देश दिया गया था.

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सीबीएफसी ने तर्क दिया कि ऐसे कॉन्टेंट वाली फिल्म में देवी सीता से जुड़े नाम 'जानकी' का उपयोग सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 की धारा 5 बी (2) के तहत दिशानिर्देश 2 (xi) का उल्लंघन हो सकता है, जो नस्लीय, धार्मिक या अन्य समूहों के प्रति अपमानजनक दृश्यों या शब्दों को प्रतिबंधित करता है. सेक्सुअल वायलेंस और एडल्ट कॉन्टेंट वाली यह फिल्म 27 जून को रिलीज होने वाली थी, लेकिन सीबीएफसी की ओर से सर्टिफिकेशन मिलने में देरी के कारण इसकी रिलीज रोक दी गई. हालांकि, अदालत ने इस आपत्ति के पीछे के तर्क पर सवाल उठाया और कहा कि सीबीएफसी की स्क्रीनिंग कमेटी ने पहले ही फिल्म को मंजूरी दे दी थी, लेकिन चेयरमैन ने इसे रिवाइजिंग कमेटी को भेज दिया, जिसने नाम से संबंधित मुद्दा उठाया. 

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प्रोडक्शन हाउस 'कॉसमॉस एंटरटेनमेंट' के वकील ने तर्क दिया कि सिनेमैटोग्राफ (सर्टिफिकेशन) रूल्स, 1983 के अनुसार, रिवाइजिंग कमेटी शो-कॉज नोटिस जारी नहीं कर सकती. इसकी भूमिका फिल्मों में कट्स का सुझाव देने और सर्टिफिकेशन देने तक सीमित है. न्यायाधीश ने निर्देश दिया कि कारण बताओ नोटिस 30 जून को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए तथा फिल्म निर्माताओं से कहा कि वे नोटिस का जवाब देने या अपील दायर करने के लिए स्वतंत्र हैं. प्रोडक्शन हाउस ने कहा कि उसने 12 जून को सर्टिफिकेशन के लिए फिल्म सीबीएफसी के पास भेजी थी और 18 जून को इसकी स्क्रीनिंग पूरी कर ली गई थी. प्रोडक्शन कंपनी का दावा है कि उनकी फिल्म ‘JSK– Janaki vs State of Kerala’ के सर्टिफिकेशन में देरी और इसके नाम पर अचानक आपत्ति के कारण वित्तीय नुकसान हो रहा है और अनुच्छेद 19(1)(A) (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और 19(1)( G) (किसी भी पेशे को अपनाने का अधिकार) के तहत उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है.

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