खिड़की, कत्ल और दूरबीन! व्हीलचेयर पर बैठे शख्स ने कैसे सुलझाई मर्डर मिस्ट्री

रियर विंडो सिर्फ एक मर्डर मिस्ट्री नहीं है. यह दूसरों की निजी जिंदगी में चुपके से झांकने की इंसानी आदत पर बनी फिल्म है. जेफ के पास पड़ोसियों को देखने का कोई जरूरी कारण नहीं है. शुरुआत में वह सिर्फ बोरियत दूर करने के लिए ऐसा करता है लेकिन जितना ज्यादा वह देखता है, उतना ही ज्यादा उसे लगता है कि वह इन लोगों को समझने लगा है.

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हिचकॉक की रियर विंडो एक बेहतरीन फिल्म है. (Photo: ITG) हिचकॉक की रियर विंडो एक बेहतरीन फिल्म है. (Photo: ITG)

आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 14 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 6:38 PM IST

साल 1954 में जब फिल्ममेकर अल्फ्रेड हिचकॉक की रियर विंडो रिलीज हुई, तब आज की तरह हर हाथ में कैमरा नहीं था, सोशल मीडिया नहीं था और किसी दूसरे की जिंदगी में झांकना इतना आसान भी नहीं था. लेकिन हिचकॉक ने करीब सात दशक पहले ही इंसान की उस जिज्ञासा को पकड़ लिया था, जो आज सोशल मीडिया, सीसीटीवी, रियलिटी शो और पड़ोस की खिड़कियों से लेकर फोन की स्क्रीन तक हर जगह दिखाई देती है कि दूसरे की जिंदगी में क्या चल रहा है, यह जानने की बेचैनी. 

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फिल्म में जेम्स स्टुअर्ट का किरदार जेफ जेफ्रीज एक फोटोग्राफर है, जो पैर टूटने के कारण व्हीलचेयर पर अपने अपार्टमेंट में कैद है. बाहर निकलने का रास्ता बंद है, काम करने को कुछ खास नहीं और सामने खुलता है एक बड़ा-सा आंगन, जिसके दूसरी तरफ कई अपार्टमेंट हैं. धीरे-धीरे जेफ उन खिड़कियों के पीछे रहने वाले लोगों की जिंदगी देखने लगता है. कोई अकेला है, कोई प्यार में है, कोई संगीत लिख रहा है, कोई शादी के शुरुआती दिनों में है और किसी की जिंदगी में रिश्तों की कड़वाहट दिखाई देती है.

लेकिन फिर एक रात जेफ को अपने पड़ोसी लार्स थोरवर्ल्ड के व्यवहार में कुछ ऐसा नजर आता है, जिससे उसे शक होता है कि शायद उसने अपनी पत्नी का कत्ल कर दिया है. अब सवाल सिर्फ यह नहीं रह जाता कि जेफ ने क्या देखा, बल्कि यह बन जाता है कि क्या हम जो देखते हैं, वही सच होता है?

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रियर विंडो मूवी का एक सीन

यहीं से हिचकॉक अपनी असली चाल चलते हैं. जेफ की आंखें ही दर्शक की आंखें बन जाती हैं. कैमरा ज्यादातर वही दिखाता है जो जेफ अपने कमरे से देख सकता है यानी हमें भी थोरवर्ल्ड के घर के अंदर जाकर सच देखने की इजाजत नहीं है. हम उतने ही असहाय हैं जितना जेफ. वह व्हीलचेयर पर बैठा है और दूरबीन से दूसरी खिड़की में देखता है और हम स्क्रीन पर उसी खिड़की को देखते रहते हैं. इस तरह हिचकॉक ने दर्शक और किरदार के बीच की दूरी लगभग खत्म कर दी. हम जेफ को पड़ोसियों की जिंदगी में झांकते हुए नहीं देख रहे होते, बल्कि खुद उसके साथ झांक रहे होते हैं. यही रियर विंडो की सबसे दिलचस्प चाल है कि फिल्म हमें उस काम में शामिल कर देती है, जिस पर फिल्म खुद सवाल उठाती है.

इसका मतलब यह भी है कि रियर विंडो सिर्फ एक मर्डर मिस्ट्री नहीं है. यह दूसरों की निजी जिंदगी में चुपके से झांकने की इंसानी आदत पर बनी फिल्म है. जेफ के पास पड़ोसियों को देखने का कोई जरूरी कारण नहीं है. शुरुआत में वह सिर्फ बोरियत दूर करने के लिए ऐसा करता है लेकिन जितना ज्यादा वह देखता है, उतना ही ज्यादा उसे लगता है कि वह इन लोगों को समझने लगा है. यही भ्रम हिचकॉक को दिलचस्प लगता है कि हम किसी इंसान की जिंदगी के कुछ टुकड़े देखकर उसके बारे में पूरी कहानी बना लेते हैं.

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फिल्म का सबसे बड़ा खेल यहां है कि हिचकॉक दर्शक को भी दोषी बनाते हैं. हम जानते हैं कि जेफ पड़ोसियों को उनकी अनुमति के बिना देख रहा है, फिर भी हम उसकी तरह ही उत्सुक रहते हैं. जब किसी खिड़की में कुछ संदिग्ध दिखाई देता है, तो हम भी चाहते हैं कि वह और देखे. जब कहानी थोड़ी देर के लिए सामान्य लगती है, तो हमें भी बेचैनी होती है कि कहीं मामला हत्या वाला न निकले यानी जिस Voyeurism पर फिल्म सवाल उठा रही है, उसी Voyeurism का आनंद दर्शक खुद ले रहा है. फिल्म पर लिखने वाले आलोचकों ने इसी वजह से इसे सिनेमा और दर्शक के रिश्ते पर भी एक टिप्पणी माना है.

हिचकॉक ने इस फिल्म में एक ही जगह को पूरी दुनिया बना दिया. फिल्म का लगभग पूरा हिस्सा जेफ के अपार्टमेंट और उसके सामने बने विशाल कोर्टयार्ड सेट के आसपास घटता है. इस कोर्टयार्ड को ध्यान से देखो तो यह अपने आप में एक छोटी सी दुनिया है. हर खिड़की के पीछे एक अलग कहानी चल रही है. कहीं नया-नया प्यार है, कहीं अकेलापन, कहीं शादी, कहीं झगड़ा, कहीं संघर्ष और कहीं ऐसा रिश्ता जिसमें प्यार खत्म हो चुका है.

जेफ इन सबको बाहर बैठकर देखता है और अनजाने में अपने रिश्ते को भी उन्हीं कहानियों के बीच समझने लगता है. यही वजह है कि ग्रेस कैली का लीजा फ्रेमंट वाला किरदार सिर्फ रोमांटिक नहीं है. जेफ शादी को लेकर हिचकता है क्योंकि उसे लगता है कि स्थायी रिश्ता उसकी आजाद जिंदगी को सीमित कर देगा. सामने की खिड़कियों में वह अलग-अलग तरह के रिश्ते देख रहा है और उसी दौरान लीजा धीरे-धीरे साबित करती है कि वह सिर्फ खूबसूरत, सजी-धजी प्रेमिका नहीं, बल्कि खतरे में जाकर सच पता करने वाली साहसी महिला भी है.

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यहीं फिल्म का रोमांस और मर्डर मिस्ट्री एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं. जेफ खिड़की से देख रहा है, लेकिन लीजा अंदर जाने का जोखिम उठाती है यानी जो आदमी खुद को ऑब्जर्वर समझता था, उसे आखिरकार एक्शन की जरूरत पड़ती है. दूसरों की जिंदगी को दूर से देखना आसान है, लेकिन जब वही खतरा अपनी जिंदगी तक पहुंच जाए तो क्या होगा? हिचकॉक इसी बदलाव से सस्पेंस पैदा करते हैं.

जेफ का टूटा पैर और व्हीलचेयर सिर्फ कहानी की सुविधा नहीं है. वह फिल्म के पूरे अनुभव को नियंत्रित करती है. वह देख सकता है, लेकिन आसानी से जा नहीं सकता इसलिए उसकी आंखें उसकी सबसे बड़ी ताकत भी हैं और सबसे बड़ी कमजोरी भी और फिर आता है फिल्म का शायद सबसे शानदार क्षण जब देखने वाला खुद देखा जाता है. पूरी फिल्म में जेफ ही थोरवर्ल्ड को देख रहा है. थोरवर्ल्ड को शायद अंदाजा भी नहीं कि कोई उसकी हरकतों पर नजर रख रहा है लेकिन एक वक्त ऐसा आता है जब थोरवर्ल्ड को जेफ की मौजूदगी का एहसास हो जाता है और वह सीधे उसकी तरफ देखता है. उस पल पूरी सत्ता बदल जाती है. जो आदमी अब तक दूसरों को देख रहा था, वह अचानक खुद निगरानी के दायरे में आ जाता है. यही वह क्षण है जब हिचकॉक दर्शक को भी चौंका देते हैं क्योंकि इतने समय से हम भी जेफ की तरह देख रहे थे.

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