बंटवारा 1947 V/s गदर: देशभक्ति की लड़ाई मजहब तक पहुंची, तारा सिंह से सिकंदर बने सनी, कितने बदले तेवर?

सनी देओल की फिल्म बंटवारा 1947 के ट्रेलर ने ऑडियंस की उम्मीदों को हाई कर दिया है. ये फिल्म सिनेमाघरों में 14 अगस्त को रिलीज होगी. गदर के बाद सनी फिर से पर्दे पर गरजने वाले हैं.

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गदर के तारा सिंह का कितना बदला किरदार? (Photo: Social Media) गदर के तारा सिंह का कितना बदला किरदार? (Photo: Social Media)

हंसा कोरंगा

  • नई दिल्ली,
  • 29 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 3:36 PM IST

सनी देओल एक बार फिर पर्दे पर देशभक्ति का जोश बिखेरने वाले हैं. उनकी मचअवेटेड रिलीज 'बंटवारा 1947' का ट्रेलर आते ही छा गया है. भारत-पाकिस्तान की पृष्ठभूमि को लेकर उन्होंने कई फिल्में की हैं. लेकिन मोस्ट सक्सेसफुल लिस्ट में गदर और गदर 2 को काउंट किया जाता है. 'बंटवारा 1947' में सनी को देख लोगों को गदर के तारा सिंह की याद आ गई है. हालांकि इस बार उनका अंदाज बदल गया है.

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सनी 'बंटवारा 1947' में देशभक्ति के साथ मजहब और इंसानियत का भी पाठ पढ़ा रहे हैं. 'गदर' से 'बंटवारा 1947' तक ये जर्नी काफी चेंज हो चुकी है. दोनों का बैकड्रॉप भले ही भारत-पाकिस्तान विभाजन पर हो, लेकिन कहानी का सार और इमोशंस बदले हैं. जानते हैं, 'बंटवारा 1947' v/s 'गदर' में भारत-पाकिस्तान विभाजन की कहानी कितनी अलग हो गई है.

गदर की लव स्टोरी, 'बंटवारे' की इंसानियत
गदर में तारा सिंह और सकीना की लव स्टोरी पर फोकस था. पार्टिशन की वजह से सकीना के लिए तारा सिंह ने पहले अपनों से लड़ाई लड़ी, फिर पाकिस्तानियों से. सरहद पार का प्यार और देशभक्ति का दमदार कॉम्बो जनता ने देखा. तारा सिंह की हुंकार और सकीना के लिए उनकी तड़प ने कईयों को रुलाया. इस कहानी के इमोशंस इतने हाई थे कि तारा-सकीना की लव स्टोरी अमर हो गई.

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दूसरी तरफ, 'बंटवारा 1947' विभाजन के दर्द पर कसके चोट करती है. इंसानियन, मजहब और मां की ममता को लेकर दो धर्म के लोगों की जंग देखने को मिलती है. फिल्म का फोकस विभाजन के दर्द और इंसानी रिश्तों पर है. 

तारा नहीं, अब सिकंदर मिर्जा की हुंकार है...
'गदर' में जहां सनी देओल एक ट्रक ड्राइवर और देशभक्त पति के रोल में थे. सकीना के लिए वो अपनी कौम से भिड़ गए थे. पाकिस्तान जाकर ढाई किलो के हाथ और हैंडपंप का जोर दिखाया था.

मगर 'बंटवारा 1947' में वो मुस्लिम शख्स बने हैं. जिसका नाम सिकंदर मिर्जा है. सिकंदर पाकिस्तान में रहते हुए वहां के कट्टरपंथियों से लड़ रहा है. इंसानियत का नारा बुलंद करते हुए उसका मानना है किसी भी मां का कोई मजहब नहीं होता. वो पत्नी-बेटे के लिए नहीं बल्कि एक हिंदू मां के लिए अपनों से जंग लड़ रहा है. सनी का किरदार परिवार और विभाजन के दौर की मुश्किलों से बैखौफ होकर लड़ता है. तारा सिंह से सिकंदर मिर्जी बनने की जर्नी में सनी का एग्रेशन टोन डाउन हुआ है. 

भारत-पाकिस्तान की दुश्मनी से बात धर्म पर आई
गदर में पाकिस्तान बनाम हिंदुस्तान के बीच लड़ाई दिखी थी. वहीं 'बंटवारा 1947' में फोकस मजहब, मानवीय त्रासदी पर है. सिकंदर कैसे पाकिस्तान में अपनी कौम से एक हिंदू की रक्षा के लिए लड़ता है, सांप्रदायिक तनाव, हिंसा के बीच इंसानियत दिखाता है, कहानी की शिफ्ट इसी पर है.

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कमर्शियल से गंभीर हुआ कंटेंट
गदर एक कमर्शियल ड्रामा थी. जिसमें रोमांस, इमोशंस और एंटरटेनमेंट का डोज था. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर दमदार कमाई की थी. लेकिन 'बंटवारा 1947' का सीन अलग है. ये सीरियल फिल्म है. जिसमें रोमांस और एंटरटेनिंग फैक्टर की जगह नहीं है. इसमें किरदारों और त्रासदी के बैकड्रॉप में इमोशनल स्ट्रगल को परोसा गया है. 

सनी की फिल्म 'बंटवारा 1947' इसी साल 14 अगस्त को सिनेमाघरों में दस्तक देगी. देखना होगा कमाई के मामले में ये मूवी गदर से कितना आगे निकलती है.

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