गोवा का 'विश्वनाथ' कैसे बना बॉलीवुड का नाना पाटेकर? जानिए नाम के पीछे की असली कहानी

नाना पाटेकर, जिनका 8 अक्टूबर 2026 को 75 साल की उम्र में निधन हो गया, हिंदी और मराठी सिनेमा में सिर्फ 'नाना' के नाम से जाने जाते थे. लेकिन उनका असली नाम 'नाना' नहीं था.

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नाना पाटेकर का असली नाम? (Photo: x/@BajpayeeManoj) नाना पाटेकर का असली नाम? (Photo: x/@BajpayeeManoj)

आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 08 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 4:29 PM IST

भारतीय सिनेमा के दिग्गज एक्टर नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है. हिंदी और मराठी फिल्मों में अपनी दमदार एक्टिंग, अलग अंदाज और कड़क आवाज़ से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले नाना पाटेकर ने 8 अक्टूबर 2026 की सुबह दुनिया को अलविदा कह दिया. पर्दे पर अपनी एक-एक लाइन से थिएटर गूंजा देने वाले इस कलाकार को पूरी दुनिया 'नाना' के नाम से ही जानती है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि 'नाना' उनका असली या जन्म का नाम नहीं था.

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उनका असली नाम विश्वनाथ गजानन पाटेकर था. एक आम घर के लड़के 'विश्वनाथ' से देश के चहेते 'नाना पाटेकर' बनने का सफर काफी दिलचस्प रहा है. आइए जानते हैं कि बचपन का एक प्यारा सा निकनेम कैसे उनकी असली पहचान बन गया.

गोवा में ली अंतिम सांस
नाना पाटेकर का निधन 8 अक्टूबर 2026 की सुबह गोवा में हुआ. प्राप्त जानकारियों के अनुसार, वे डोना पाउला स्थित अपने निवास पर अचानक बेहोश पाए गए थे. इसके बाद मेडिकल टीम ने उन्हें तुरंत संभाला और अस्पताल ले जाने से पहले कार्डियक मसाज भी दी. डॉक्टरों ने उन्हें बचाने और होश में लाने की लगभग 45 मिनट तक लगातार कोशिश की, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका. सुबह करीब 5:20 बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. शुरुआती रिपोर्टों में मौत की वजह कार्डियक अरेस्ट मानी जा रही है, हालांकि सही कारणों की पुष्टि आगे की मेडिकल जांच के बाद ही हो सकेगी.

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बचपन और शुरुआती ज़िंदगी
नाना पाटेकर का जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में स्थित मुरुद-जंजीरा में हुआ था. जन्म के समय उनका नाम विश्वनाथ गजानन पाटेकर रखा गया था. उनके पिता का नाम दिनकर पाटेकर और मां का नाम निर्मला पाटेकर था, जो एक हाउस वाइफ थीं. एक साधारण मराठी परिवार में पले-बढ़े विश्वनाथ को कला से लगाव था, जिसके चलते आगे चलकर उन्होंने मुंबई के प्रसिद्ध 'बांद्रा स्कूल ऑफ आर्ट' से अपनी पढ़ाई पूरी की.

मां की सहेली ने दिया 'नाना' नाम
समय के साथ उनका असली नाम 'विश्वनाथ' लोगों की ज़ुबान से ओझल होता गया और उसकी जगह 'नाना' ने ले ली. खुद नाना पाटेकर ने एक बार इस नाम के पीछे की सीधी-सरल कहानी शेयर की थी. उन्होंने बताया था कि उनकी मां की एक बहुत करीबी सहेली थीं, जिन्हें उनकी मां बिल्कुल अपनी बहन जैसा मानती थीं. वह सहेली बचपन में उन्हें प्यार से 'नाना-नाना' कहकर पुकारती थीं. बस वहीं से यह नाम उनके साथ ऐसा जुड़ा कि हमेशा के लिए उनका हो गया.

हर सरकारी कागज पर दर्ज हुआ निकनेम
जो नाम घर में प्यार से पुकारने के लिए शुरू हुआ था, वह धीरे-धीरे उनकी पहचान बनता चला गया. आगे चलकर उन्होंने इसी नाम को आधिकारिक तौर पर भी अपना लिया. नाना ने एक बातचीत में मुस्कुराते हुए कहा था कि यह बहुत अच्छा नाम है और उनके पासपोर्ट, आधार कार्ड से लेकर हर ज़रूरी सरकारी दस्तावेज पर भी अब यही नाम दर्ज है.

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स्कूल के दिनों में कहलाते थे 'विशु'
'नाना' नाम से मशहूर होने से पहले, स्कूल के दिनों में उन्हें उनके असली नाम विश्वनाथ या प्यार से 'विशु' कहकर बुलाया जाता था. एक्टर ने बताया था कि दशकों बाद भी अगर कोई उन्हें 'विशु' कहकर आवाज देता था, तो वे तुरंत समझ जाते थे कि यह इंसान जरूर उनके स्कूल के जमाने का कोई पुराना साथी है.

सिनेमा का यादगार चेहरा
वक्त के साथ विश्वनाथ नाम पीछे छूट गया और 'नाना पाटेकर' भारतीय सिनेमा के सबसे मशहूर और सम्मानित नामों में शामिल हो गया. 'परिंदा', 'क्रांतिवीर', 'वेलकम' और 'नटसम्राट' जैसी यादगार फिल्मों से अपनी पहचान बनाने वाले इस बेहतरीन कलाकार के पीछे हमेशा वही सादगी भरा 'विश्वनाथ' छुपा रहा, जिसे बचपन में अपनों ने प्यार से एक नाम दिया था.

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