सेट पर जाने से लगा डर, इतनी होती थी गंदगी, एक्ट्रेस बोली- महिलाओं की कोई परवाह नहीं

मशहूर सीनियर एक्ट्रेस जयति भाटिया टीवी इंडस्ट्री के शुरुआती दिनों को याद किया. इस दौरान एक्ट्रेस ने कई बड़े खुलासे किए. जिसके मुताबिक साल 2008-09 के दौरान टेलीविजन इंडस्ट्री में एक बहुत बड़ी हड़ताल के बाद हालात सुधरे.

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टीवी इंडस्ट्री पर बोलीं जयति (Photo: Instagram/@jayatibhatia) टीवी इंडस्ट्री पर बोलीं जयति (Photo: Instagram/@jayatibhatia)

आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 02 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:24 PM IST

टेलीविजन इंडस्ट्री बाहर से जितनी चकाचौंध और ग्लैमर से भरी दिखाई देती है, उसके पीछे का सच उतना ही अलग और कभी-कभी परेशान करने वाला होता है. एकता कपूर के शो से अपने करियर की शुरुआत करने वाली मशहूर सीनियर एक्ट्रेस जयति भाटिया ने हाल ही में टीवी सेट्स पर काम करने के अपने पुराने और कड़वे एक्सपीरियंस को शेयर किया है. जयति भाटिया ने उस दौर की बात की है जब टीवी सीरियल्स की लोकप्रियता तो आसमान छू रही थी, लेकिन सेट्स पर काम करने वाली महिलाओं को वो बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिलती थीं, जिसकी वे हकदार थीं. 

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सुरक्षा के लिए चुना टीवी
The Super Womaniya Show को इंटरव्यू में जब होस्ट ने जयति भाटिया से टीवी सेट्स की पुरानी स्थितियों के बारे में पूछा, तो उन्होंने बेबाकी से जवाब दिया. जयति ने कहा, 'हम लोग टेलीविजन इंडस्ट्री में इसलिए आए थे क्योंकि हम यहां खुद को सुरक्षित महसूस करना चाहते थे.' उन्होंने याद करते हुए बताया कि मुंबई के साकीनाका इलाके में तीन-तीन और चार-चार मंजिला कई बड़े स्टूडियो हुआ करते थे. इन स्टूडियोज में दिन-रात यानी 24 घंटे लगातार शूटिंग चलती रहती थी और कलाकार भी शिफ्टों में डे-नाइट काम किया करते थे.

जयति भाटिया ने अपने सबसे बड़े डर का खुलासा करते हुए बताया कि उस दौर में वह सेट पर पहुंचने से पहले ही एक बात को लेकर बेहद घबरा जाती थीं. उन्होंने कहा, 'मैंने यह बात पहले भी अपने इंटरव्यूज में कही है कि मुझे सेट पर जाने से इस बात का डर रहता था कि अगर मुझे वॉशरूम जाना पड़ा, तो क्या होगा. क्योंकि सेट्स पर वॉशरूम कभी भी साफ नहीं मिलते थे.' 

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सिविक सेंस की भारी कमी
पूरी इंडस्ट्री और समाज में स्वच्छता को लेकर रवैये पर सवाल उठाते हुए जयति ने कहा, 'मुझे लगता है कि जो एक बेसिक सिविक सेंस होनी चाहिए, वो हमारी पूरी इंडस्ट्री में और सच कहूं तो हमारे देश में भी थोड़ी कम है.' उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि लोगों में यह आदत बिल्कुल नहीं थी कि वे इस्तेमाल करने के बाद दूसरों के लिए एक साफ माहौल छोड़कर जाएं. जयति के शब्दों में, 'लोगों की सोच बस इतनी थी कि हमारा काम हो गया, हम चल दिए. उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता था कि उनके बाद वहां कौन आने वाला है.'

प्रोडक्शन हाउस के पास नहीं था कोई कॉन्सेप्ट
जयति भाटिया ने खुलासा किया कि उस समय के प्रोडक्शन हाउसेज को भी इस बात की कोई परवाह नहीं थी. उन्होंने कहा कि सेट पर जो प्रोडक्शन के लोग होते हैं, उन्हें कम से कम यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वॉशरूम साफ-सुथरे रहें, क्योंकि वहां महिलाएं काम कर रही हैं और उन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है. लेकिन उस दौर में ऐसा कोई कॉन्सेप्ट या नियम ही नहीं था कि महिलाओं के लिए साफ वॉशरूम की व्यवस्था रखी जाए.

हड़ताल के बाद बदले हालात
हालांकि, समय के साथ स्थितियों में आए सुधार पर बात करते हुए जयति भाटिया ने बताया कि साल 2008-09 के दौरान टेलीविजन इंडस्ट्री में एक बहुत बड़ी हड़ताल (स्ट्राइक) हुई थी. इस हड़ताल के बाद कलाकारों और वर्कर्स की बुनियादी सहूलियतों को लेकर नियम बनाए गए. जयति ने कहा, 'उस स्ट्राइक के बाद से चीजें काफी हद तक बेहतर हुई हैं. अब लोग सेट्स पर काम शुरू करने से पहले खुद जाकर चेक करते हैं कि वहां साफ-सुथरे वॉशरूम की सुविधा है या नहीं.'

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