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'रंग दे बसंती' से 'युवा' तक, छात्र आंदोलनों की सबसे दमदार कहानी कहती हैं ये 7 फिल्में

आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 22 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 7:20 AM IST
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देश में पिछले कुछ समय से शिक्षा व्यवस्था को लेकर बहस तेज है. NEET पेपर लीक विवाद, छात्रों के प्रदर्शन, सोनम वांगचुक के आंदोलन और युवाओं की ओर से शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की मांग ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है. 

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इसी बीच सोशल मीडिया पर भी छात्र आंदोलनों की खूब चर्चा हो रही है. ऐसे माहौल में बॉलीवुड की कई ऐसी फिल्में याद आती हैं, जिन्होंने सिर्फ मनोरंजन नहीं किया, बल्कि छात्रों के गुस्से, संघर्ष, राजनीति और बदलाव की लड़ाई को बड़े पर्दे पर दमदार तरीके से दिखाया. आइए जानते हैं ऐसी 7 फिल्मों के बारे में.

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रंग दे बसंती (2006): छात्र आंदोलनों पर बनी सबसे आइकॉनिक फिल्मों में 'रंग दे बसंती' का नाम सबसे ऊपर आता है. फिल्म में कुछ बेफिक्र कॉलेज स्टूडेंट्स अपने दोस्त की मौत के बाद भ्रष्ट सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाते हैं. धीरे-धीरे उनका विरोध एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले लेता है. आज जब युवा शिक्षा व्यवस्था और सरकारी जवाबदेही की बात कर रहे हैं, तब यह फिल्म फिर से बेहद रिलेटेबल लगती है.

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युवा (2004): मणिरत्नम की 'युवा' छात्र राजनीति की ताकत को दिखाती है. फिल्म में अजय देवगन एक जोशीले छात्र नेता के रोल में हैं, जो युवाओं से सिर्फ विरोध करने की नहीं, बल्कि राजनीति में उतरकर सिस्टम बदलने की अपील करता है. यह फिल्म बताती है कि बदलाव सिर्फ नारों से नहीं, बल्कि भागीदारी से भी आता है.

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हजारों ख्वाहिशें ऐसी (2005): सुधीर मिश्रा की यह फिल्म 1970 के दशक की राजनीतिक उथल-पुथल और छात्र आंदोलनों की कहानी है. सेंट स्टीफंस कॉलेज के तीन छात्रों की जिंदगी के जरिए फिल्म दिखाती है कि कैसे युवा सामाजिक बदलाव के लिए अपनी पूरी जिंदगी दांव पर लगा देते हैं. इसमें नक्सल आंदोलन और छात्रों की राजनीतिक चेतना को बेहद गंभीर अंदाज में पेश किया गया है.

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गुलाल (2009): अनुराग कश्यप की 'गुलाल' विश्वविद्यालय की राजनीति, सत्ता की भूख, अलगाववाद और छात्र संगठनों के टकराव को बेहद कच्चे और वास्तविक अंदाज में दिखाती है. फिल्म यह बताती है कि छात्र आंदोलन सिर्फ आदर्शवाद तक सीमित नहीं रहते, बल्कि कई बार सत्ता की राजनीति का हिस्सा भी बन जाते हैं.

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हासिल (2003): इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति पर बनी 'हासिल' छात्र संघ चुनावों के बहाने राजनीति, अपराध और युवाओं के संघर्ष की कहानी कहती है. फिल्म दिखाती है कि कैसे शिक्षा संस्थानों की राजनीति कई बार बाहुबल और अपराध से प्रभावित हो जाती है और इसका असर छात्रों के भविष्य पर पड़ता है.

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आरक्षण (2011): प्रकाश झा की 'आरक्षण' शिक्षा व्यवस्था, सामाजिक न्याय और आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर आधारित है. फिल्म में आरक्षण नीति को लेकर छात्रों के प्रदर्शन, विरोध और बहस को प्रमुखता से दिखाया गया है. यह बताती है कि शिक्षा से जुड़े फैसले किस तरह पूरे समाज और युवाओं को प्रभावित करते हैं.

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हुड़दंग (2022): 'हुड़दंग' सीधे तौर पर 1990 के मंडल आयोग आंदोलन की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म है. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्रों के जरिए फिल्म दिखाती है कि कैसे सरकारी फैसलों के खिलाफ देशभर में बड़े पैमाने पर छात्र आंदोलन खड़े हुए थे. आज के दौर में जब शिक्षा और युवाओं के मुद्दों पर फिर से प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं, तब यह फिल्म उन ऐतिहासिक आंदोलनों की याद दिलाती है.

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