मां अखिलेश के साथ, बेटी बीजेपी संग... अनुप्रिया-कृष्णा पटेल में कौन पड़ेगा भारी?

बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के अपना दल (एस) से हाथ मिला रखा है तो सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अनुप्रिया की मां कृष्णा पटेल के अपना दल से गठबंधन किया है. 2022 के चुनावी रण में देखना होगा कि मां-बेटी में कौन कितना भारी पड़ता है? 

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अखिलेश यादव और कृष्णा पटेल अखिलेश यादव और कृष्णा पटेल

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली ,
  • 25 नवंबर 2021,
  • अपडेटेड 1:05 PM IST
  • कृष्णा पटेल ने अखिलेश से मिलाया हाथ
  • अनुप्रिया पटेल का बीजेपी से गठबंधन
  • मां-बेटी में कौन इस बार पड़़ेगा भारी

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और सपा के बीच शह-मात का खेल जारी है. बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की अपना दल (एस) के साथ हाथ मिला रखा है तो सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अनुप्रिया की मां कृष्णा पटेल की अपना दल से गठबंधन किया है. 2022 के चुनावी रण में एक तरफ कृष्णा पटेल तो विरोधी खेमे में बेटी अनुप्रिया पटेल होंगी. ऐसे में देखना होगा कि मां-बेटी में कौन कितना भारी पड़ता है? 

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कृष्णा पटेल ने अखिलेश से मिलाया हाथ

अपना दल की अध्यक्ष कृष्णा पटेल ने बुधवार को लोहिया ट्रस्ट में अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद 2022 चुनाव में सपा के साथ मिलकर लड़ने का ऐलान किया. साथ ही कृष्णा पटेल और अखिलेश संयुक्त रूप से चुनाव प्रचार भी करेंगे. हालांकि, सीट शेयरिंग को लेकर अभी तक कोई फॉर्मूला नहीं आया है, लेकिन कृष्णा पटेल ने कहा कि सीटों को लेकर हम दोनों के बीच कोई विवाद नहीं है. 

अनुप्रिया पटेल का बीजेपी से गठबंधन

वहीं, अनुप्रिया पटेल के अपना दल (एस) का बीजेपी के साथ गठबंधन है. बीजेपी के साथ मिलकर अनुप्रिया 2014-2019 के लोकसभा और 2017 का विधानसभा चुनाव लड़ चुकी हैं और 2022 के चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी है. हालांकि, अभी तक अनुप्रिया पटेल की भी बीजेपी के साथ सीट बंटवारे पर कोई सहमति नहीं बन पाई है, लेकिन अपना दल (एस) इस बार पिछले चुनाव से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने का दम भर रही है. 

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कुर्मी वोट पर सियासी दलों की नजर

बता दें अपना दल का गठन डॉ. सोनेलाल पटेल ने किया था, जो कुर्मी समाज से आते थे. ऐसे में अपना दल का राजनीतिक आधार कुर्मी वोटरों के बीच है, लेकिन सोनेलाल पटेल अपने सियासी सफर में कभी विधायक नहीं बन सके. सोनेलाल पटेल का निधन एक सड़क हादसे में हो गया, जिसके बाद उनकी पत्नी कृष्णा पटेल के हाथ में पार्टी की बागडोर मिली. उन्होंने पार्टी में संगठन को मजबूत करने का काम किया. 

अपना दल का खाता प्रतापगढ़ सीट पर उपचुनाव में खुला था. 2012 के विधानसभा चुनाव में अनुप्रिया पटेल वाराणसी के रोहनिया विधानसभा की विधायक चुनी गईं. यह अपना दल से पहली बार था जब सोनेलाल पटेल के परिवार का कोई सदस्य विधानसभा पहुंचा था. इसके बाद अनुप्रिया की बीजेपी से नजदीकी बढ़ी और 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के साथ हाथ मिला लिया. 

दो धड़ों में बटी अपना दल

मोदी लहर में अनुप्रिया पटेल मिर्जापुर की सांसद बनीं और फिर मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री. इसके बाद धीरे-धीरे अनुप्रिया पटेल और उनकी मां कृष्णा पटेल के बीच सियासी वर्चस्व की जंग छिड़ गई. कृष्णा पटेल ने अपनी बड़ी बेटी पल्लवी पटेल को पार्टी में अहम जिम्मेदारी देने फैसला किया तो अनुप्रिया पटेल विरोध में उतर गई. देखते-देखते मां-बेटी में ऐसी दूरियां बढ़ीं कि अपना दल मां-बेटी के बीच दो धड़ों में बंट गई. 

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अपना दल के दो धड़ों में बंटने के बाद एक की कमान कृष्णा पटेल के हाथों में है तो अनुप्रिया पटेल ने अपना दल (एस) नाम से दूसरी पार्टी बना ली. अनुप्रिया पटेल बीजेपी के साथ मिलकर तीन चुनाव में पार्टी को जिताकर खुद को सोनेलाल पटेल के वारिस के तौर पर साबित करने में सफल रही हैं. वहीं, कृष्णा पटेल और पल्लवी पटेल तमाम कोशिशों के बाद भी अभी तक सफल नहीं रही है. 

कृष्णा पटेल अभी तक सफल नहीं रही

अपना दल की प्रमुख कृष्णा पटेल ने 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन किया. कांग्रेस ने अपना दल को दो सीटें दी, जिसमें एक सीट पर खुद कृष्णा पटेल ने लड़ा और दूसरी फूलपुर लोकसभा सीट पर पल्लवी पटेल के पति पंकज निरंजन ने किस्मत आजमाई, लेकिन दोनों ही जीत नहीं सके.

वहीं, अनुप्रिया पटेल के गुट को 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में दो सीटें मिली और दोनों ही सीटें जीतने में सफल रही. इस तरह अनुप्रिया पटेल खुद को सोनेलाल पटेल के वारिस के तौर पर स्थापित करने में सफल रही हैं. 

कृष्णा पटेल और अनुप्रिया पटेल दोनों ही पार्टियां का दारोमदार कुर्मी वोटर पर टिका है. यूपी में करीब 6 फीसदी कुर्मी वोट हैं, जिसे अपने पाले में लाने के लिए बीजेपी और सपा दोनों ही कवायद में जुटी है. यही वजह है कि बीजेपी ने अनुप्रिया को अपने साथ साथ रखा है तो अखिलेश ने उनकी मां कृष्णा पटेल को मिला लिया. ऐसे में देखना है कि 2022 के चुनाव में अनुप्रिया और कृष्णा पटेल में कौन कितना भारी पड़ता है. 

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