टिहरी गढ़वाल लोकसभा सीट: हैट्रिक लगाने की कोशिश में उत्तराखंड की पहली महिला MP

Tehri garhwal lok sabha constituency मौजूदा आम चुनाव के लिए टिहरी गढ़वाल लोकसभा सीट से टिकट की लाइन में कई नेता हैं. इस सीट पर कभी कांग्रेस की ओर से विजय बहुगणा बीजेपी को टक्कर देते थे. पर अब विजय बहुगुणा बीजेपी में हैं. इस बार वह भी बीजेपी की ओर से ही इस सीट से टिकट पाने के लिए जोर आजमाइश कर रहे हैं. हालांकि उत्तराखंड बीजेपी के अध्यक्ष अजय भट्ट कह चुके हैं कि उत्तराखंड में लोकसभा सीटों पर कोई वैकेंसी नहीं है.

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सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह. फोटो-Twitter/ MalaRajyaShah सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह. फोटो-Twitter/ MalaRajyaShah

पन्ना लाल

  • नई दिल्ली,
  • 09 फरवरी 2019,
  • अपडेटेड 5:43 PM IST

टिहरी गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र उत्तराखंड के देहरादून, टिहरी गढ़वाल और उत्तरकाशी जिलों में फैला है. टिहरी गढ़वाल सीट की राजनीति कांग्रेस और बीजेपी के इर्द-गिर्द घुमती रही है. आजादी के बाद इस सीट पर चुनाव और उपचुनाव मिलाकर कुल 18 बार वोटिंग हुए.  इसमें जनता ने 10 बार कांग्रेस को चुना, जबकि 7 बार बीजेपी को मौका मिला. 1977 में इस सीट पर जनता पार्टी को जीत मिली थी.

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टिहरी गढ़वाल सीट पर बीजेपी की माला राज्य लक्ष्मी शाह मौजूदा सांसद हैं. खास बात यह है कि माला राज्यलक्ष्मी शाह का जन्म नेपाल की राजधानी काठमांडू में हुआ था. उत्तराखंड बीजेपी की प्रमुख महिला नेत्रियों में शुमार माला राज्यलक्ष्मी शाह उत्तराखंड की पहली महिला लोकसभा सांसद हैं. वे टिहरी के पूर्व शाही परिवार के वंशज मानवेंद्र शाह की बहू हैं. मानवेंद्र शाह ने कांग्रेस और बीजेपी के टिकटों पर इस सीट पर रिकॉर्ड आठ बार जीत हासिल की है.

2019 के लिए जोर आजमाइश

2019 आम चुनाव के लिए टिहरी गढ़वाल लोकसभा सीट से टिकट की लाइन में कई नेता हैं. इस सीट पर कभी कांग्रेस की ओर से विजय बहुगणा बीजेपी को टक्कर देते थे. पर अब विजय बहुगुणा बीजेपी में हैं. इस बार वह भी बीजेपी की ओर से ही इस सीट से टिकट पाने के लिए जोर आजमाइश कर रहे हैं. हालांकि उत्तराखंड बीजेपी के अध्यक्ष अजय भट्ट कह चुके हैं कि उत्तराखंड में लोकसभा सीटों पर कोई वैकेंसी नहीं है. पिछली लोकसभा चुनाव में विजय बहुगुणा के बेटे साकेत बहुगुणा माला राज्यलक्ष्मी शाह को टक्कर दे चुके थे. विजय बहुगुणा के पिता हेमवती नंदन बहुगुणा भी इस सीट से सांसद रह चुके हैं. वहीं माला राज्यलक्ष्मी शाह इस बार भी सियासी रण में उतरने की जोर शोर से तैयारी कर रही हैं.

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राजनीतिक पृष्ठभूमि

1952 में कांग्रेस के कमलेंदुमति शाह इस सीट से चुनाव जीतीं. 1957 में कांग्रेस मानबेंद्र शाह चुनाव कांग्रेस के टिकट पर इलेक्शन चुनाव जीते. मानबेंद्र शाह के जीत का सिलसिला 1962 और 67 में भी जारी रहा. 1971 में ही कांग्रेस के परिपूर्णानंद विजयी हुए. 1977 में जीत का सेहरा जनता पार्टी त्रेपन सिंह नेगी के सिर पर सजा. 1980 में भी वे जीते लेकिन इस बार वे कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े,

1984 और 89 में ब्रह्म दत्त कांग्रेस बतौर कांग्रेस उम्मीदवार चुनाव जीते. 1991 में इस सीट पर पहली बार बीजेपी का कमल खिला और मानबेन्द्र शाह विजयी रहे. बीजेपी की जीत का सिलसिला 91 के बाद 96, 98, 99 और 2004 में भी जारी रहा. 2007 में इस सीट पर उपचुनाव हुआ और कांग्रेस के विजय बहुगुणा जीते. 2009 में विजय बहुगुणा एक बार फिर जीते. 2012 के उपचुनाव बीजेपी ने इस सीट पर वापसी की और माला राज्यलक्ष्मी शाह चुनाव में विजयी रहीं. 2014 में बीजेपी के टिकट पर फिर जीतीं.

सामाजिक ताना-बाना

टिहरी गढ़वाल लोकसभा सीट के अंदर विधानसभा की 14 सीटें आती हैं. इस संसदीय क्षेत्र के तहत आने वाली विधानसभा सीटें हैं चकराता, देहरादून कैंट, मसूरी, रायपुर, राजपुर रोड़, साहसपुर, विकासनगर, धनौल्टी, घंसाली, प्रतापपुर, टिहरी, गंगोत्री, और पुरोला. 2017 के विधानसभा चुनाव में पुरोला और चकराता सीट पर कांग्रेस ने कब्जा किया था. धनौल्टी सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत हासिल की थी. बाकी 11 सीटों पर बीजेपी ने कब्जा जमाया है.

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2011 की जनगणना के मुताबिक यहां की जनसंख्या 19 लाख 23 हजार 454 थी. यहां की आबादी का लगभग 62 फीसदी आबादी गांवों में रहती है, जबकि 38 फीसदी हिस्सा शहरों में निवास करती है. इस इलाके में अनुसूचित जाति का आंकड़ा 17.15 प्रतिशत है, जबकि अनुसूचित जनजाति का हिस्सा 5.8 प्रतिशत है.

पिछली लोकसभा चुनाव के आंकड़ों पर गौर करें तो यहां कुल 7 लाख 12 हजार 39 पुरुष मतदाता थे, जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 6 लाख 40 हजार 806 थी. यहां पर कुल 13 लाख 52 हजार 845 मतदाता थे.  2017 में हुई विधानसभा के मुताबिक इस सीट पर 14 लाख 51 हजार 457 मतदाता हैं.

2014 का जनादेश

पिछले लोकसभा चुनाव में माला राज्य लक्ष्मी शाह ने कांग्रेस के साकेत बहुगुणा को 1,92, 503 वोटों से हराया. इस चुनाव में माला राज्यलक्ष्मी शाह को 4,46,733 वोट मिले थे, जबकि साकेत बहुगुणा को 2 लाख 54 हजार 230 वोट मिले थे. 2014 के चुनाव में यहां पर 57.38 फीसदी वोट पड़े थे.

सांसद का रिपोर्ट कार्ड

सांसदों के कामकाज पर निगाह रखने वाली  वेबसाइट Parliamentarybusiness.com के मुताबिक सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह ने मौजूदा लोकसभा के 33 डिबेट्स में भाग लिया है. इस लोकसभा में उन्होंने 33 सवाल पूछे. सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह ने सदन में एक निजी बिल भी पेश किया है. 16 लोकसभा के दौरान सदन में इनकी उपस्थिति 89 प्रतिशत रही, यानी कि वह लोकसभा की 316 बैठकों में 280 दिन सदन में मौजूद रहीं.

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सांसद निधि का पैसा खर्च करने में माला राज्य लक्ष्मी शाह फिसड्डी साबित हुई हैं. आंकड़ों के मुताबिक माला राज्यलक्ष्मी शाह ने पांच साल में सांसद निधि के 25 करोड़ फंड में से मात्र 7.76 करोड़ रुपये ही विकास कार्यों पर खर्च कर सकी हैं.

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