केरलम के नतीजे आ चुके हैं. इसी के साथ देश में लेफ्ट का आखिरी मजबूत किला भी ढह गया है. राज्य की सत्ता अब कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF के हाथों में है. चुनावी हार की तस्वीर साफ होते ही मुख्यमंत्री पिनराई विजयन राजभवन पहुंचे. वहां उन्होंने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया. राज्यपाल ने भी उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया है. हालांकि, राज्यपाल ने उनसे नई सरकार बनने तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री के तौर पर जिम्मेदारी संभालते रहने को कहा है. इन नतीजों की सबसे बड़ी खबर यही है कि कांग्रेस 63 सीटें जीतकर राज्य की नंबर वन पार्टी बन गई है. उसने LDF के लगातार तीसरी बार सत्ता में आने के सपने को पूरी तरह तोड़ दिया है.
सुबह से जारी मतगणना में यूडीएफ की बढ़त लगातार बनी रही. 140 सीटों वाली विधानसभा में इस गठबंधन ने 99 सीटों का आंकड़ा छू लिया है. पिनराई विजयन की सरकार ने उम्मीद लगाई थी कि वे इतिहास रचेंगे, मगर उन्हें हार का सामना करना पड़ा. जनता ने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे की बातों पर भरोसा जताया. इसी भरोसे ने एलडीएफ को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया.
कांग्रेस की धमाकेदार वापसी और लेफ्ट का सूपड़ा साफ
फाइनल आंकड़े बताते हैं कि INC ने अकेले दम पर 63 सीटों पर कब्जा जमाया है. वहीं, उनकी साथी मुस्लिम लीग (IUML) को 22 सीटें मिली हैं. केरल कांग्रेस (KEC) को 7 और RSP को 3 सीटें मिली हैं. दूसरी तरफ, सत्ता से बेदखल हुई सीपीआई (एम) महज 26 सीटों पर सिमट गई. सीपीआई को सिर्फ 8 सीटों से संतोष करना पड़ा है. बड़ी बात यह भी है कि बीजेपी ने राज्य में अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हुए 3 सीटें जीती हैं.
9 अप्रैल को हुई 78.27 फीसदी वोटिंग ने उसी दिन बड़े उलटफेर का इशारा कर दिया था. आज जब नतीजे सामने आए तो साफ हो गया कि जनता अब नए हाथों में राज्य की कमान सौंपना चाहती है. जीत के बाद राहुल गांधी ने केरल की जनता का शुक्रिया अदा किया. उन्होंने इसे युवाओं और विकास की जीत बताया. वहीं, खरगे ने भरोसा दिलाया कि अब केरल में 'असली कल्याण' शुरू होगा. विजयन के इस्तीफे के साथ ही केरल में एक लंबे दौर का अंत हो गया है. अब सबकी नजरें इस पर हैं कि कांग्रेस अपना अगला मुख्यमंत्री किसे चुनती है. फिलहाल तो पूरे राज्य में यूडीएफ के जश्न का शोर है.
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