उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस का सपा के साथ गठबंधन है, लेकिन सीट शेयरिंग का मामला फंसा हुआ है. कांग्रेस ने यूपी में गठबंधन की नई स्क्रिप्ट लिखने की कवायद में जुट गई है. कांग्रेस की नजर दलित नेता चंद्रशेखर आजाद और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की है.
सहारनपुर से कांग्रेस के लोकसभा सांसद इमरान मसूद ने आजतक से बात करते हुए असदुद्दीन ओवैसी को भाई और चंद्रशेखर आजाद को अपना दोस्त और हमदर्द बताया है.
इमरान मसूद ने कहा कि यूपी में बीजेपी को कोई अकेले दम पर चुनाव नहीं हरा पाएगा. उत्तर प्रदेश में अगर कोई गलत फहमी में है तो वो दूर कर ले. राहुल गांधी का हाथ थामे बगैर कोई भी बीजेपी को नहीं हरा सकता है. इस तरह इमरान मसूद यूपी में गठबंधन की नई इबारत लिखने की कवायद में है.
यूपी में कांग्रेस गठबंधन की नई स्क्रिप्ट लिख रही
कांग्रेस के सांसद इमरान मसूद ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी अपने गठबंधन की स्क्रिप्ट तैयार कर रही है. इस गठबंधन में कई छोटे दल शामिल हो सकते हैं. चंद्रशेखर आजाद और असदुद्दीन ओवैसी को अपना भाई बताते हुए इमरान मसूद ने कहा कि अभी कांग्रेस की तरकश में बहुत तीर है. मसूद ने कहा कि सूबे में अपनी स्क्रिप्ट कांग्रेस पार्टी गठबंधन को लेकर खुद लिखने वाली है.
कांग्रेस एक तरफ ए ग्रेड की 170 सीटों की बात और दूसरी तरफ चंद्रशेखर और ओवैसी की तारीफ. यह इशारा कर रहा है कि कांग्रेस यूपी में अखिलेश यादव के दामन को छोड़ना तो नहीं चाहती है, लेकिन पिछलग्गू बनकर भी गठबंधन में नहीं रहेगी. ऐसे में इमरान मसूद ने जिस तरह से चंद्रशेखर और ओवैसी को गले लगाने की कवायद में है, उसके राजनीतिक मायने हैं.
ओवैसी और चंद्रशेखर को इमरान ने बताया भाई
इमरान मसूद ने आजतक से बात करते हुए बीजेपी को तो सांप्रदायिक तो कहा, लेकिन ओवैसी पर सांप्रदायिक होने का ठप्पा लगाने से बचते रहे. इससे पहले तक कांग्रेस के नेता असदुद्दीन ओवैसी को बीजेपी की बी-टीम कहते रहे हैं. असदुद्दीन ओवैसी को इमरान मसूद ने अपना बड़ा भाई बताया, लेकिन गठबंधन के सवाल पर कहा कि यह फैसला पार्टी करेगी.
असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में 2027 को लेकर अपनी तैयारी शुरू कर दी है. मुस्लिम बहुल बहराइच के मटेरा से अपनी चुनावी तैयारी की शुरुआत करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने मटेरा सीट से अपने प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली को अपना उम्मीदवार भी घोषित कर दिया. ओवैसी के सक्रिय होने के साथ ही इमरान मसूद ने जिस तरह नरम तेवर अपना रखा है, उसके सियासी संकेत माने जा रहे हैं.
आजाद समाज पार्टी के नेता चंद्रशेखर आजाद को इमरान मसूद ने अपना दोस्त और हमदर्द बताया. उन्होंने कहा कि 2024 के चुनाव में चंद्रशेखर ने उनकी मदद की है, हम चाहते हैं कि वो खूब तरक्की करें. ऐसे में हमसे जो बन पढ़ेगा, वो करेंगे. चंद्रशेखर की पार्टी से गठबंधन के सवाल पर साफ-साफ जवाब नहीं दिया, लेकिन संकेत जरूर दे दिया.
सपा पर प्रेशर पॉलिटिक्स का दांव तो नहीं?
यूपी में सपा का कांग्रेस के साथ गठबंधन है, जिसके संकेत अखिलेश यादव कई बार दे चुके हैं. सपा और कांग्रेस में सीट शेयरिंग को लेकर मामला जरूर फंसा हुआ है. ऐसे में इमरान मसूद ने ओवैसी और चंद्रशेखर के साथ हाथ मिलाने के संकेत देकर सपा पर दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकती है. हालांकि, यूपी में सपा और कांग्रेस दोनों का सियासी आधार करीब-करीब एक ही है. दोनों ही पार्टियों का कोर वोटबैंक मुस्लिम है, जिसके चलते ही उनके रिश्ते काफी उतार चढ़ाव वाले रहते हैं.
इमरान मसूद 2022 के चुनाव में कांग्रेस छोड़कर सपा में गए थे, लेकिन उन्हें अखिलेश यादव ने चुनाव नहीं लड़ाया था. इसके बाद बसपा से होते हुए कांग्रेस में फिर से वापसी कर गए थे. चंद्रशेखर आजाद भी इमरान मसूद के जिले सहारनपुर से आते हैं. चंद्रशेखर भी 2022 में सपा के साथ गठबंधन करने के लिए बहुत मशक्कत की थी, लेकिन बात नहीं बन सकी. इमरान मसूद ने अपना और चंद्रशेखर का जिक्र करते हुए कहा कि 2022 में हम दोनों को बहुत जिल्लत उठानी पड़ी है, उनका इशारा अखिलेश यादव की तरफ था.
सपा यूपी में ओवैसी और चंद्रशेखर के साथ गठबंधन के लिए रजामंद नहीं है और कांग्रेस ने उन दोनों के साथ हाथ मिलाने के संकेत देकर अखिलेश यादव पर दबाव बनाने का सियासी दांव तो नहीं चल दिया है. अब देखना है कि कांग्रेस यूपी में गठबंधन की कौन सी स्क्रिप्ट लिखती है.
कुमार अभिषेक